
कांग्रेस नेता जयराम रमेश (फोटो- एएनआई)
Great Nicobar Project: ग्रेट निकोबार द्वीप मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना को लेकर राजनीतिक और पर्यावरणीय बहस लगातार तेज होती जा रही है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने बुधवार को एक बार फिर इस परियोजना के खिलाफ गंभीर आपत्तियां दर्ज कराते हुए कहा कि इससे इकोलॉजिकल तबाही तय है। उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव को लिखे विस्तृत पत्र में आरोप लगाया कि सरकार ने पर्यावरणीय प्रभाव आकलन यानी एनवायरमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट (EIA) के जरूरी मानकों का पालन किए बिना परियोजना को मंजूरी दी।
जयराम रमेश ने कहा कि परियोजना के लिए तैयार की गई EIA रिपोर्ट खुद स्वीकार करती है कि यह केवल रैपिड रिकॉनिसेंस स्टडी थी और इसके लिए आंकडे केवल एक मौसम चक्र के दौरान जुटाए गए। उनके अनुसार द्वीपीय और तटीय क्षेत्रों से जुडी परियोजनाओं के लिए बहु-मौसमी अध्ययन जरूरी होता है। उन्होंने पत्र में लिखा कि केवल सेकेंडरी डेटा के आधार पर इतने विशाल प्रोजेक्ट को मंजूरी देना स्थापित पर्यावरणीय नियमों के खिलाफ है। रमेश ने यह भी कहा कि पर्यावरणीय अध्ययन तैयार करने वाली एजेंसियों ने खुद ही अपने अध्ययन की समीक्षा की, जो प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खडा करता है।
कांग्रेस नेता ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि गलाथिया बे क्षेत्र के कई हिस्सों को तटीय कटाव प्रभावित माना गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कटाव का खतरा पहले से दर्ज है, तब तीन मौसमों में विस्तृत अध्ययन क्यों नहीं कराया गया। रमेश ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की पूर्व टिप्पणियों का भी उल्लेख किया, जिनमें पर्यावरण मंजूरी प्रक्रिया में कई अनुत्तरित कमियों की बात कही गई थी। उन्होंने हाई पावर्ड कमेटी की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग करते हुए कहा कि जब परियोजना से जुडे दस्तावेज पहले से सार्वजनिक हैं, तब समीक्षा रिपोर्ट को सीलबंद रखने का कोई औचित्य नहीं है।
रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार अब परियोजना को पर्यावरणीय आधार पर नहीं बल्कि रणनीतिक आवश्यकता बताकर बचाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत की सामरिक जरूरतों को कैंपबेल बे स्थित आईएनएस बाज (INS Baaz) जैसे मौजूदा रक्षा ढांचे को मजबूत करके भी पूरा किया जा सकता है। उनके अनुसार ग्रेट निकोबार परियोजना मुख्य रूप से एक व्यावसायिक उद्यम है, जिससे कई दुर्लभ प्रजातियां और प्राकृतिक आवास नष्ट हो सकते हैं। वहीं दूसरी तरफ सरकार ने इस परियोजना का उद्देश्य पूर्व-पश्चिम शिपिंग रूट के नजदीक स्थित द्वीप की रणनीतिक स्थिति का लाभ उठाना, विदेशी ट्रांसशिपमेंट बंदरगाहों पर निर्भरता घटाना और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है। परियोजना में अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल, ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट, गैस-सोलर पावर प्लांट और आधुनिक टाउनशिप शामिल हैं।
Published on:
03 Jun 2026 11:18 am
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