
Lok Sabha Elections 2024 : आंध्रप्रदेश की चुनावी यात्रा के दौरान में गुंटूर से अपने अगले पड़ाव के लिए गुंंटूर-तिरुपति एक्सप्रेस से रवाना होकर पहुंच गया हूं कडपा। यह सीट देश की प्रमुख हॉट सीट में से एक है। इसलिए राजनीति में रुचि रखने वालों की नजर इस पर हो रहे सियासी संघर्ष पर है। स्टेशन से बाहर निकलते ही मैं टैक्सी से शहर में घूमने निकला हूं। कुछ ही दूरी पर महावीर सर्किल आता है। अब मैं टैक्सी से उतरकर पैदल ही चल रहा हूं। काफी दूर तक पैदल चलने के बाद कहीं भी ऐसा लगा ही नहीं कि यहां लोकसभा और विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। किसी भी जगह प्रचार सामग्री नजर नहीं आई। न किसी तरह का शोर था।
यहां काफी लोगों से चुनावी मिजाज जानने के लिए बातचीत करने का प्रयास किया, लेकिन भाई-बहन की लड़ाई के बीच में कोई भी स्थानीय व्यक्ति कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं हुआ। यहां मतदाता खामोश है। जितनी बड़ी खामोशी है, उतना ही बड़ा सियासी संग्राम है। एक ही घर के नेता एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं।
कुछ देर वहां खड़ा रहा तो मेरी नजर पुताई का काम करने वाले वेंकटेश पर पड़ती है। वेंकटेश नाश्ते की दुकान पर कुर्सी पर बैठकर अखबार पढ़ रहे हैं, मैंने उनसे बातचीत शुरू कि इस बार चुनाव को लेकर लोगों में क्या चर्चा है। उन्होंने अपनी टूटी-फूटी हिंदी भाषा में समझाया कि यहां पर बहन-भाई आमने-सामने एमपी का चुनाव लड़ रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री वाइएस राजशेखर रेड्डी का यहां बहुत सम्मान है। ऐसे में आपको खुलकर कोई नहीं बताएगा, लेकिन यह बात मानकर चलो कि यहां से वाइएसआरसीपी के अविनाश रेड्डी को ही सफलता मिलने की उम्मीद है। वो वाइएस शर्मिला के चचेरे भाई हैं। शर्मिला जो कांग्रेस की प्रत्याशी है, उनके सगे भाई मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी भी शर्मिला के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं। कुछ लोग शर्मिला का भी समर्थन कर रहे हैं। झारखंड के मूल निवासी और कडपा में 3 साल से रह रहे राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के छात्र अंकित ने बताया कि इस चुनाव में घर की लड़ाई खुलकर नजर आ रही है। यहां जगन का प्रभाव ज्यादा है, लेकिन कुछ लोगों के मन में शर्मिला के प्रति भी सहानुभूति है।
कई लोगों से चर्चा करने के बाद यही बात सामने आई कि आंध्रप्रदेश में सबसे दिलचस्प चुनावी अखाड़ा अगर कोई है तो वह कडपा संसदीय क्षेत्र ही है। राज्य के पूर्व सीएम वाइएस राजशेखर रेड्डी का पैतृक जिला कडपा, अब उनके नाम पर वाइएसआर कडपा कहलाता है। यह कडपा उनके बेटे जगन और बेटी शर्मिला के बीच उनकी विरासत की लड़ाई का अखाड़ा बता हुआ है। भाई-बहन इस चुनाव में अलग-अलग सीटों से अलग-अलग सदन के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। शर्मिला जहां कांग्रेस के टिकट पर कडपा संसदीय सीट से चुनाव लड़ रही हैं तो दूसरी ओर उनके भाई जगनमोहन रेड्डी कडपा संसदीय क्षेत्र में आने वाली विधानसभा सीट पुलिवेंदुला से मुकाबले में हैं। कडपा की इस लड़ाई में सिर्फ ये दोनों भाई-बहन ही नहीं, बल्कि वाइएस परिवार दो खेमों में बंट गया है।
ऐसे में शर्मिला अपने दोनों भाइयों के खिलाफ जाकर पिता की विरासत अपने नाम करने के प्रयास में है। कडपा सीट चार दशक से वाइएस परिवार का गढ़ रही है। यहां से शर्मिला और जगन मोहन के पिता वाइएस राजशेखर रेड्डी चार बार सांसद रहे थे। वाइएसआर कांग्रेस पार्टी से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाली शर्मिला रेड्डी इसी साल जनवरी के महीने में कांग्रेस में शामिल हुई थीं और इसके बाद उन्हें आंध्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भी बनाया गया। इस सीट पर रेड्डी वोटर निर्णायक भूमिका में हैं। इसी वजह से सभी पार्टियां यहां रेड्डी समुदाय के प्रत्याशी को ही टिकट देती रही हैं।
तेलुगू देशम पार्टी ने चदिपिरल्ला भूपेश सुब्बरामी रेड्डी को मैदान में उतारा है। यहां भाजपा, जनसेना और टीडीपी का गठबंधन है। इस तरह इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला है। इनके अलावा बसपा और अन्ना वाइएस कांग्रेस के प्रत्याशी सहित कुल 17 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। जगन और शर्मिला की लड़ाई में वाइएसआरसीपी और कांग्रेस के मतों का बंटवारा होने की उम्मीद के साथ टीडीपी इस चुनाव में फायदा लेने के प्रयास में हैं।
कांग्रेस उम्मीदवार वाइएस शर्मिला रेड्डी पूर्व मुख्यमंत्री एवं अपने दिवंगत पिता वाइएस राजशेखर रेड्डी की राजनीतिक विरासत और लोकप्रियता का हवाला देकर मतदाताओं को लुभाने की कोशिश में जुटी है। वो यह कहती नजर आ रही कि उनके पिता जब मुख्यमंत्री थे तब किसान खुश थे और विकास हुआ। अब वैसा कुछ नहीं है। जगन पर गंभीर आरोप लगा रही हैं। आंध्र प्रदेश की कडपा लोकसभा सीट हाई प्रोफाइल रही है। यहां से वाइएस जगन मोहन रेड्डी भी चुनाव लड़ चुके हैं। इस लोकसभा सीट के अंतर्गत सात विधानसभा क्षेत्र आते हैं, जिसमें बडवेल, कडपा, पुलिवेंदला, कमलापुरम, जम्मलमदुग्गु, प्रोद्दातुर, मायदुकुर शामिल हैं। वाइएसआर कडपा जिले का जिला मुख्यालय भी है। कडपा शहर की अर्थव्यवस्था काफी हद तक खेती-किसानी पर आधारित है। यहां मुख्य रूप से मूंगफली, कपास, लाल चना, बंगाली चना जैसी फसलें उगाई जाती हैं। इसके अलावा आय का दूसरा सोर्स खनन भी है।
Published on:
11 May 2024 11:41 am
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