
भारी बारिश की वजह से गुरुग्राम में जलभराव (इमेज सोर्स: ilovegurgaon एक्स यूजर स्क्रीनशॉट)
Gurugram Infrastructure Failure: गुरुग्राम को देश का कॉर्पोरेट और टेक्नोलॉजी हब कहा जाता है। यहां बड़ी-बड़ी कंपनियां हैं। लाखों लोग काम करते हैं। महंगे ऑफिस और आलीशान सोसाइटी हैं। लेकिन बारिश की कुछ घंटों की मार इस चमकदार तस्वीर को बदल देती है। यहां सड़कें पानी में डूब जाती हैं। ट्रैफिक रेंगने लगता है। कई लोग घंटों जाम में फंस जाते हैं। कर्मचारी समय से ऑफिस नहीं पहुंच पाते। डिलीवरी और कारोबार प्रभावित होता है। सवाल सिर्फ जलभराव का नहीं है। सवाल यह है कि इतना बड़ा इकोनॉमी वाला सिटी हर मानसून में इसी समस्या से क्यों जूझता है?
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुग्राम ने इनकम टैक्स के रूप में करीब 48,000 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। यह हरियाणा के हिस्से का करीब 65 फीसदी बताया गया है। इसके बावजूद शहर की सड़कें और ड्रेनेज सिस्टम सवालों के घेरे में हैं।
गुरुग्राम की अर्थव्यवस्था बेहद मजबूत है। शहर हरियाणा में बड़े निवेश का केंद्र है। यहां देश-दुनिया की कंपनियां कारोबार करती हैं। रियल एस्टेट भी तेजी से बढ़ा है। लेकिन शहर की बुनियादी सुविधाएं उस रफ्तार से नहीं बढ़ीं। बारिश होते ही कई इलाकों में पानी भर जाता है। सड़कें खराब हो जाती हैं। ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा जाती है। लोगों को दो से चार घंटे तक जाम में फंसना पड़ता है। इसका असर सिर्फ लोगों की परेशानी तक सीमित नहीं है। कंपनियों के कामकाज पर भी इसका असर पड़ता है। मीटिंग छूटती हैं। डिलीवरी देर से होती है। कर्मचारियों के काम के घंटे प्रभावित होते हैं।
गुरुग्राम के विकास की एक बड़ी समस्या उसकी योजना में भी छिपी है। अलग-अलग प्राइवेट डेवलपर अपनी सोसाइटी और प्रोजेक्ट के अंदर शानदार सुविधाएं बना सकते हैं। लेकिन शहर सिर्फ इन प्राइवेट प्रोजेक्ट्स का समूह नहीं हो सकता। बारिश का पानी किसी सोसाइटी की सीमा नहीं मानता। एक इलाके का पानी दूसरे इलाके में पहुंचता है। इसलिए ड्रेनेज, सड़क, सीवेज और ट्रैफिक की योजना पूरे शहर को ध्यान में रखकर बनानी होगी।
गुरुग्राम की सबसे बड़ी जरूरत सिर्फ नए पंप या नालों की सफाई नहीं है। जरूरत ऐसी व्यवस्था की है, जिसमें किसी एक जिम्मेदार संस्था या अधिकारी के पास स्पष्ट जवाबदेही हो। हर बारिश के बाद सिर्फ बैठक और बयान नहीं होने चाहिए। यह भी देखा जाना चाहिए कि कितनी सड़कें डूबीं। कितने घंटे ट्रैफिक में बर्बाद हुए। किन इलाकों में बार-बार जलभराव हुआ। गुरुग्राम भारत के सबसे अहम आर्थिक शहरों में है। यहां पैसा है। कंपनियां हैं। टैलेंट है। निवेश है। ऐसे में गुरुग्राम को एक और नया शहर बनाने की जरूरत नहीं है। जरूरत उस गुरुग्राम को बेहतर तरीके से चलाने की है, जिसे देश ने पहले ही एक बड़े आर्थिक केंद्र के रूप में खड़ा कर दिया है।
Updated on:
07 Aug 2026 07:51 pm
Published on:
07 Aug 2026 07:51 pm
