
हरिद्वार (File Photo - IANS)
उत्तराखंड सरकार धार्मिक नगरी हरिद्वार के हर की पौड़ी की पवित्रता व सनातन प्रकृति की मर्यादा के लिए 105 घाटों पर गैर-हिंदू के प्रवेश पर प्रतिबंध की तैयारी कर रही है। साथ ही ऋषिकेश और हरिद्वार को 'सनातन पवित्र शहर' भी घोषित किया जा सकता है। इसकी शुरुआत अगले साल हरिद्वार में अर्ध कुंभ से हो सकती है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अनेक संतों और हर की पौड़ी का रखरखाव करने वाली प्राचीन संस्था गंगा सभा की मांग पर यह संकेत दिया। ]
उन्होंने कहा कि देवभूमि की अनूठी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगी। हिमालयी राज्य सनातन अनुयायियों का आस्था केंद्र हैं। दोनों स्थानों को सनातन शहर घोषित करने पर विचार किया जा रहा है।
जानकार सूत्रों के अनुसार गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित करने के लिए 110 साल पहले 1916 में तत्कालीन अंग्रेज सरकार और गंगा सभा के संस्थापक पं.मदनमोहन मालवीय के बीच हुए समझौते को आधार बनाया जा सकता है। राज्य सरकार ने इस समझौते की जानकारी व कागजात जुटाना शुरू कर दिया है।
अंग्रेजों व गंगा सभा के प्रथम अध्यक्ष मदन माेहन मालवीय में 1916 में हुए समझौते में गंगा के निर्बाध प्रवाह को बनाए रखना और तीर्थ नगर की पवित्रता को संरक्षित करना शामिल था। इसी समझौते में गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध शामिल था। इसमें यह भी कहा गया था कि गैर-हिंदुओं को दोनों धार्मिक नगरों (ऋषिकेश और हरिद्वार) में स्थायी निवास करने की अनुमति नहीं थी वे केवल काम के लिए आ सकते हैं और अपना काम पूरा करके वापस जा सकते हैं।
हरिद्वार-ऋषिकेश कुंभ क्षेत्र में यह पाबंदी लागू हुई तो हरिद्वार से ऋषिकेश तक लगभग 45-50 किलोमीटर गंगा नदी के किनारे यह पाबंदी रहेगी। साथ ही गंगा नदी के किनारे नगर निगम क्षेत्र और प्रमुख तीर्थ स्थलों, मठ, आश्रम, धर्मशाला व अखाड़े भी इस प्रतिबंध के दायरे में आएंगे।
Updated on:
07 Jan 2026 03:41 am
Published on:
07 Jan 2026 03:38 am
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