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भारत ने भीषण युद्ध के बीच ईरान की ऐसे की मदद! विदेश मंत्री एस जयशंकर का बड़ा बयान

US-Iran War Jaishankar Statement: अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि ईरान ने 28 फरवरी को 3 जहाजों के लिए डॉकिंग की इजाजत मांगी थी, हमने 1 मार्च को दे दी…

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भारत

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Saurabh Mall

Mar 09, 2026

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फोटो में ईरान युद्धपोत आईआरआईएस लवन और विदेश मंत्री एस जयशंकर (सोर्स: ANI)

US-Iran War Latest Update: भीषण अमेरिका–ईरान युद्ध के बीच पिछले दिनों भारत ने बड़ा कदम उठाया। सोमवार को भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्यसभा में बताया कि ईरान ने 28 फरवरी को अपने तीन जंगी जहाजों को भारतीय बंदरगाहों पर डॉक करने की अनुमति मांगी थी और भारत ने बिना देरी किए 1 मार्च को मंजूरी दे भी दी थी।

अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध की आग भड़क रही है, हालात हर घंटे बदल रहे हैं, ऐसे में भारत का यह फैसला दुनिया के लिए एक बड़ा संदेश माना जा रहा है। जयशंकर ने साफ कहा कि इस पूरे संकट में भारत की प्राथमिकता सिर्फ एक है… देश का राष्ट्रीय हित, ऊर्जा की लगातार आपूर्ति और पश्चिम एशिया में रह रहे 10 मिलियन भारतीयों की सुरक्षा। इसके साथ ही भारत शुरू से ही बातचीत, शांति और संयम की अपील करता रहा है, ताकि क्षेत्र में बिगड़ती स्थिति को रोका जा सके।

ईरान ने भारत का किया धन्यवाद

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्यसभा में आगे बताया कि ईरान ने अपने युद्धपोत आईआरआईएस लवन (IRIS Lavan) को कोच्चि बंदरगाह पर डॉक करने की भारत की अनुमति के लिए धन्यवाद दिया है। ईरान ने भारत के इस फैसले को मानवीय कदम बताया है।

जयशंकर ने कहा कि पश्चिम एशिया में लगातार बदलते हालात की वजह से ईरानी नेताओं के साथ सीधे उच्च-स्तरीय बातचीत करना अभी काफी मुश्किल हो गया है, लेकिन फिर भी दोनों देशों के बीच डिप्लोमैटिक संपर्क जारी हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने खुद 20 फरवरी 2026 और 5 मार्च 2026 को ईरान के विदेश मंत्री अराघची से बातचीत की है, और आने वाले दिनों में यह बातचीत जारी रहेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि कोच्चि में डॉक किए गए ईरानी नेवी जहाज को भारत ने किन परिस्थितियों में अनुमति दी थी, यह बात भी संसद में साफ की गई। मौजूदा तनावपूर्ण माहौल के बावजूद भारत ईरान से संपर्क बनाए रखने और ज़रूरी कदम उठाने की कोशिश कर रहा है।

क्यों मांगी थी मदद?

बता दें अमेरिका ने हिन्द महासागर में ईरानी युद्धपोत IRIS Dena पर जोरदार हमला किया था। नतीजा ये निकला कि IRIS Dena डूब गया, इस बात की पुष्टि खुद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने की थी।

ऐसे में श्रीलंका के पास (हिन्द महासागर) में IRIS Dena के डूबने के बाद हालात और गंभीर हो गए थे। इसी दौरान ईरान का एक और नौसैनिक जहाज तकनीकी खराबी के कारण मदद मांगते हुए भारत से संपर्क में आया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि ईरान ने 20 फरवरी, 2026 को तीन जहाजों को भारतीय बंदरगाहों पर डॉक करने की अनुमति मांगी थी, जिसे भारत ने 1 मार्च को मंजूर कर दिया। इनमें से IRIS Lavan 4 मार्च को कोच्चि पहुंचा और उसका क्रू अभी भारतीय नौसेना की सुविधाओं में है।

जयशंकर ने कहा कि यह कदम इंसानियत के नाते उठाया गया। उन्होंने अपनी बातों पर जोर देते हुए यह भी साफ किया कि पश्चिम एशिया के तनाव के बीच भारत के लिए शांति, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति सबसे बड़ी प्राथमिकताएं हैं।