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संगठित अपराध के खिलाफ भारत की अहम साझेदारी, रिपोर्ट में बड़े खुलासे

India Global Crime Fight: अंतरराष्ट्रीय अपराधों से निपटने में अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के सहयोग के लिए भारत ने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत प्रतिबद्धता जाहिर की है।
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ट्रांसनेशनल ऑर्गनाइज्ड क्राइम, photo- IANS

India Global Crime Fight: अंतरराष्ट्रीय अपराधों से निपटने में अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के सहयोग के लिए भारत ने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत प्रतिबद्धता जाहिर की है। 2011 में 'ट्रांसनेशनल ऑर्गनाइज्ड क्राइम' (UNTOC) के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन और इसके तीन प्रोटोकॉल को मंजूरी देने साथ ही भारत ने मानव तस्करी और हथियारों के अवैध निर्माण व तस्करी से निपटने की जिम्मेदारियों को लेकर रणनीति तैयार की है।

एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यह प्रतिबद्धता भारत की उस लगातार अपनाई जा रही नीति को दर्शाती है जिसके तहत मानव तस्करी, अवैध प्रवास नेटवर्क, नशीले पदार्थों की तस्करी, हथियारों की तस्करी, जाली दस्तावेज़ और नार्को-टेरर लिंक को अलग-अलग अपराधों के बजाय आपस में जुड़े सुरक्षा खतरों के तौर पर देखा जाता है।

संगठित अपराध के खिलाफ ठोस कार्रवाई

यूरोपियन टाइम्स की एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया, 7 जुलाई को घोषित अमेरिकी न्याय विभाग का 'ऑपरेशन हार्ड बॉल' इस बात का उदाहरण है कि संगठित अपराध के खिलाफ समन्वित कार्रवाई क्या हासिल कर सकती है। ऐसे अपराध जो किसी सीमा को नहीं मानते। अमेरिका, कनाडा और यूरोप में 24 गिरफ्तारियां, 50 से ज़्यादा सर्च वारंट, तीन अनसील किए गए आरोप-पत्र और सिंडिकेट से जुड़े 37 आरोपी जो कई महाद्वीपों में संगठित अपराध में लिप्त रहे हैं। यह आपराधिक संगठनों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी संयुक्त कार्रवाइयों में से एक है।

संगठित अपराधियों के जुड़े तार

रिपोर्ट के अनुसार, भारत के लिए इस मामले का महत्व गिरफ्तारियों की संख्या से कहीं ज्यादा है। जांच के दायरे में आए नेटवर्क के तार कथित तौर पर भारत से जुड़े थे। अपराधी भारतीयो को निशाना बनाते थे और जिन्हे भारत के सहयोग के बिना उन्हें पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है।

जेल से गिरोह का संचालन

आरोप-पत्रों में जेल में बंद पंजाब के गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया के साथ-साथ कनाडा स्थित रविंदर सिंह धांडा के नेटवर्क द्वारा चलाए जा रहे आपराधिक संगठनों का वर्णन किया गया है। ये संगठन कई महाद्वीपों में पैसे लेकर हत्या, जबरन वसूली, हथियारों की तस्करी और भारी मात्रा में नशीले पदार्थों की आवाजाही जैसे बड़े पैमाने पर काम करते हैं।

भगवानपुरिया गिरोह के दुनिया भर में एक हजार से ज्त्यादा सदस्य और सहयोगी बताए जाते हैं, जो एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग के ज़रिए जबरन वसूली का निर्देश देते हैं और जेल में तस्करी कर लाए गए प्रतिबंधित फोन से अपना कामकाज चलाते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने इन आपराधिक गिरोहों का सामना तब किया था, जब वे लॉस एंजिल्स और वैंकूवर जैसे शहरों में चिंता का विषय बनने से बहुत पहले ही सक्रिय हो चुके थे। इसमें यह भी कहा गया है कि इन गिरोहों ने भारत के विभिन्न हिस्सों में कई हाई-प्रोफाइल टारगेटेड हत्याओं को अंजाम दिया है।

कनाडा ने भारत के सहयोग को स्वीकारा

ओटावा में रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) ने जांच में भारत के सहयोग को स्वीकार किया है। साथ ही, सरकारी वकीलों ने संकेत दिया है कि जैसे-जैसे मामले आगे बढ़ेंगे, अमेरिका, कनाडा, स्पेन और भारत के अधिकारी आपस में करीबी तालमेल बनाए रखेंगे।