
ब्रह्मोस मिसाइल(फोटो-ANI)
India's Missile Policy: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंडोनेशिया दौरे पर बड़ा रक्षा सौदा हुआ है। इंडोनेशिया ने ब्रह्मोस के बाद अब अस्त्र मिसाइल खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है। इसके बाद रक्षा मंत्रालय ने फैसला किया है कि अब प्राइवेट कंपनियां भी लंबी दूरी की मिसाइलें बना सकेंगी। दरअसल, सरकार का मानना है कि डीआरडीओ और रक्षा उपकरण निर्माण से जुड़ी अन्य सरकारी कंपनियां सेना की बढ़ती ज़रूरतों और मित्र देशों को मिसाइल एक्सपोर्ट करने की मांग को पूरा नहीं कर पा रही है।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय जल्द ही 180 से 200 किलोमीटर तक मारक क्षमता वाली अस्त्र मार्क 2 मिसाइलों के निर्माण के लिए निजी कंपनियों ICOMM, अडानी, भारत फोर्ज, टाटा ग्रुप और महिंद्रा ग्रुप से रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल मंगाएगा। खास बात यह है कि इस मिसाइल का उपयोग भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के खिलाफ किया था। सैन्य संघर्ष में अस्त्र मिसाइल की सफलता के बाद इसकी डिमांड बढ़ी है। अस्त्र मार्क 2 को तेजस मार्क 1-A, मिग-29, Su-30 MKI और राफेल मरीन फाइटर जेट्स के साथ जोड़ा जाएगा।
इसके बाद 500 किलोमीटर दूरी वाली प्रलय बैलिस्टिक मिसाइल को भी प्राइवेट कंपनियों को सौंपा जाएगा। यह 6 गुना साउंड स्पीड से उड़ती है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत स्टैंड-ऑफ हथियारों पर जोर दे रहा है। सरकार मिसाइलों और रॉकेटों का स्टॉक तेजी से बढ़ाना चाहती है।
यही नहीं, भारत, ईरान-अमेरिका युद्ध से सीखते हुए एंटी-बैलिस्टिक मिसाइलों पर भी काम कर रहा है। भारत इजरायल के साथ मिलकर लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें भी बना रहा है। वहीं, भारत सरकार S-400 सिस्टम की पांच और यूनिट्स खरीदने की योजना पर भी काम कर रही है। S-400 सिस्टम को कामिकेज ड्रोन और रॉकेट से बचाने के लिए रूसी पैंटसिर (Pantsir) सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा।
पाकिस्तान द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सस्ते तुर्की ड्रोन और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के लंबी दूरी के रॉकेट व बैलिस्टिक मिसाइलों का मुकाबला करने के लिए एक मल्टी-लेयर एंटी-मिसाइल और एंटी-ड्रोन नेटवर्क भी बनाया जा रहा है।
Updated on:
12 Jul 2026 07:27 am
Published on:
12 Jul 2026 07:27 am
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