
India's ban on wheat exports wheat it means for world markets
Wheat Export Ban: भारत सरकार ने गेहूं के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। अब गेहूं के एक्सपोर्ट को प्रतिबंधित श्रेणी में डाल दिया गया है जिसके पीछे की बडी वजह अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में इसके दामों में आई तेजी है। इसकी जानकारी विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने शुक्रवार शाम को दी थी। भारत सरकार के इस फैसले के बाद वैश्विक बाजार में हाहाकार मच गया है और कई देशों ने इसपर नाराजगी भी जाहिर की है। पहले ही कोरोना और फिर रूस-यूक्रेन में जारी जंग के कारण कई देश आपूर्ति की कमी से जूझ रहे हैं।
भारत सरकार के फैसले की दुनियाभर में आलोचना हो रही है। G-7 देशों के समूह ने भी इस निर्णय पर अपनी नाराजगी व्यक्त की है। जर्मनी के कृषि मंत्री केम ओजडेमिर ने कहा कि भारत के गेहूं एक्सपोर्ट बैन के इस कदम से दुनियाभर में खाद्यान्न संकट बढ़ जाएगा।
भारत के बैन का दुनिया पर क्या पड़ सकता है असर ?
भारत चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं का उत्पादक है, लेकिन उच्च सरकारी सब्सिडी वाली घरेलू कीमतों और बड़े पैमाने पर घरेलू खाद्य जरूरतों के कारण शायद ही कभी ज्यादा अनाज निर्यात करता है। हालांकि, पिछले एक दशक में बेहतर बीज चयन और कृषि प्रबंधन ने देश को इस साल एक नई रिकॉर्ड फसल के लिए तैयार कर दिया था। इससे निर्यात के बढ़ने की उम्मीद थी क्योंकि वैश्विक फसल बाजारों को वास्तव में अतिरिक्त आपूर्ति की आवश्यकता थी। ये आपूर्ति भारत आसानी से पूरा कर सकता था।
निर्यात बढ़ने की थी उम्मीद
भारतीय गेहूं निर्यातकों को 2022-23 सीज़न में 12 मिलियन टन तक की बिक्री की उम्मीद की थी। यदि ये निर्यात होता तो भारत आठ सबसे बड़े निर्यातक में शामिल हो जाता है। यदि ये निर्यात हो जाता तो अनुमानित 15.5 मिलियन टन के साथ निर्यात के मामले में भारत कनाडा से ज्यादा पीछे नहीं रहता। भारत बांग्लादेश, इंडोनेशिया, नेपाल और तुर्की जैसे देशों को निर्यात करता है। वहीं, शीर्ष वैश्विक खरीदार मिस्र है जो हाल ही में काला सागर की बजाय भारतीय गेहूं की पहली खरीद करने के लिए सहमत हुआ है।
कौन से देश करते हैं गेहूं का निर्यात?
रूस, यूरोप, अमेरिका और कनाडा गेहूं के टॉप पारंपरिक निर्यातक हैं। इन देशों द्वारा किया जा रहा निर्यात 2015 से 2020 तक विश्व गेहूं निर्यात का लगभग 60% हिस्सा है। परंतु उत्तरी अमेरिका और यूरोप में सूखे के कारण गेहूं के प्रोडक्शन में भारी कमी आई है जिसका असर वैश्विक बाजार पर पड़ा है। ऐसे में कई बड़े देश भारत की ओर देख रहे थे लेकिन अब उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
Updated on:
16 May 2022 08:34 pm
Published on:
16 May 2022 08:33 pm

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