
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Photo - IANS)
देश की दलहन नीति अब दिल्ली से नहीं, खेतों से तय होगी। कोई नया बीज दिल्ली में रिलीज नहीं होगा। सीधे किसानों के बीच जाकर जारी किया जाएगा। इकार्डा के सहयोग से राज्यों में बीज ग्राम और बीज हब बनेंगे। इससे किसानों को उन्नत और रोग रहित बीज मिलेंगे। क्लस्टर मॉडल पर देश में 1000 दाल मिलें खुलेंगी। इसमें से 55 मप्र में लगेंगी। ये घोषणा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की। वे मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के अमलाहा स्थित खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र में राष्ट्रीय दलहन सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
शिवराज ने 'दलहन आत्मनिर्भरता मिशन' का रोडमैप जारी कर कहा, दालों का आयात करना देश के लिए आनंद नहीं, शर्म की बात है। सरकार भारत को दाल में आत्मनिर्भर बना निर्यातक के रूप में खड़ा करना चाहती है। मप्र दलहन उत्पादन में देश में शीर्ष पर है। अब फोकस उत्पादकता बढ़ाने व रोग-मुक्त किस्मों पर हैं।
वैज्ञानिक मसूर, चना और मूंग की जल्दी पकने वाली किस्मों पर शोध कर रहे हैं। सम्मेलन में केंद्रीय राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर, भागीरथ चौधरी, मध्यप्रदेश सीएम मोहन यादव, ओडिशा के डिप्टी सीएम केवी सिंहदेव समेत उत्तर प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के कृषि मंत्री, शीर्ष वैज्ञानिक और प्रगतिशील किसान शामिल हुए।
भारत-अमेरिका और अन्य अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर विपक्ष के दावों पर शिवराज ने कहा, किसानों के हित सुरक्षित हैं। मक्का, गेहूं, चावल, सोयाबीन, पोल्ट्री, दूध, पनीर और कई संवेदनशील सब्जियां अमेरिका से भारत नहीं आएंगी। भारतीय बासमती चावल, मसाले और टेक्सटाइल के लिए विदेशी बाजारों के द्वार खुलेंगे। इससे किसानों की आय में ऐतिहासिक वृद्धि होगी।
Updated on:
08 Feb 2026 09:31 am
Published on:
08 Feb 2026 09:25 am
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