
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Photo - Video screenshot)
Global Energy: भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों में खींचतान अब जगजाहिर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump Tarrif) की ओर से लगातार मिल रही टैरिफ की धमकियों (Trade War) और रूसी तेल पर लगाए गए 'जुर्माने' के बीच पूर्व राजनयिक अशोक सज्जनहार (Ashok Sajjanhar) ने भारत का रुख स्पष्ट कर दिया है। उनका कहना है कि भारत ने अपनी ओर से सबसे बेहतरीन (Best Offer) व्यापारिक प्रस्ताव दे दिया है, अब यह अमेरिका को तय करना है कि वह दोस्ती चाहता है या दबाव।
: भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों में खींचतान अब जगजाहिर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगातार मिल रही टैरिफ की धमकियों और रूसी तेल पर लगाए गए 'जुर्माने' के बीच पूर्व राजनयिक अशोक सज्जनहार ने भारत का रुख स्पष्ट कर दिया है। उनका कहना है कि भारत ने अपनी ओर से सबसे बेहतरीन (Best Offer) व्यापारिक प्रस्ताव दे दिया है, अब यह अमेरिका को तय करना है कि वह दोस्ती चाहता है या दबाव।
अशोक सज्जनहार के अनुसार, भारत ने जुलाई के शुरू में ही एक संतुलित व्यापार समझौते का मसौदा ट्रंप प्रशासन को सौंप दिया था। भारतीय वार्ताकारों और विशेषज्ञों को उम्मीद थी कि इस पर जल्द ही हस्ताक्षर हो जाएंगे, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से इस पर अब तक हरी झंडी नहीं मिली है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जहां अमेरिकी वार्ताकार इस समझौते से संतुष्ट थे, वहीं ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' की नीति ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह व्यापार के लिए अपनी संस्कृति और किसानों के हितों की बलि नहीं देगा। समझौते में कुछ ऐसे पेंच हैं, जहां भारत पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है:
डेयरी उत्पाद: भारत ने धार्मिक और सामाजिक कारणों से डेयरी क्षेत्र में अमेरिकी पहुंच पर अपनी शर्तें रखी हैं।
जीएमओ (GMO) और कृषि: आनुवंशिक रूप से संशोधित उत्पादों के मामले में भारत की नीति बहुत सख्त है, जिसे अमेरिका के लिए नहीं बदला जाएगा।
संतुलित व्यापार: भारत का लक्ष्य ऐसा व्यापार है, जहां दोनों पक्ष लाभ में हों, न कि ऐसा जहाँ अमेरिका को सब कुछ मिले और भारत के हाथ खाली रहें।
रूसी तेल पर 25% जुर्माना: 'बेहद अनुचित और दोहरा मापदंड'
सज्जनहार ने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत जुर्माने की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने इसे 'अतार्किक' बताते हुए कुछ महत्वपूर्ण बिंदु उठाए हैं:
चीन और तुर्की को छूट क्यों?: चीन और तुर्की जैसे देश भारत से कहीं अधिक रूसी तेल खरीद रहे हैं, लेकिन उन पर कोई टैरिफ नहीं है।
अमेरिका का दोहरा रवैया: खुद अमेरिका रूस से परमाणु सामग्री और उर्वरक खरीद रहा है।
ट्रंप-पुतिन व्यापार: राष्ट्रपति ट्रंप के सत्ता संभालने के बाद से रूस और अमेरिका के बीच खुद व्यापार में वृद्धि हुई है, फिर भारत पर प्रतिबंध क्यों लगाया?
इस बीच, राष्ट्रपति ट्रंप ने एयर फोर्स वन से भारत को सीधी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि "मोदी जानते हैं कि मैं खुश नहीं हूँ।" ट्रंप की यह नाराजगी भारत की ओर से रूस से तेल आयात जारी रखने पर है। वहीं, दूसरी ओर वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई ने वैश्विक तेल बाजार को गरमा दिया है। वेनेजुएला के पास दुनिया का 17% (303 अरब बैरल) तेल भंडार है, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों ने उसकी उत्पादन क्षमता को सीमित कर दिया है। यह भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा के नए विकल्प और चुनौतियां दोनों पैदा करता है।
अशोक सज्जनहार का बयान भारत की नई और मुखर विदेश नीति का प्रतिबिंब है। भारत अब केवल एक 'बाजार' नहीं है जो दबाव में झुक जाए, बल्कि एक ऐसी शक्ति है जो अपनी 'धार्मिक संवेदनशीलता' और 'खाद्य सुरक्षा' को व्यापार से ऊपर रखती है। अमेरिका का दोहरा मापदंड (रूस से खुद खरीदारी करना और भारत पर जुर्माना लगाना) अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी विश्वसनीयता को कमजोर कर सकता है।
क्या ट्रंप प्रशासन जुलाई वाले समझौते पर विचार करेगा या नए प्रतिबंध लगाएगा?
रूस से तेल आयात पर भारत के अगले कदम क्या होंगे? क्या भारत 'रुपया-रूबल' व्यापार को और मजबूत करेगा?
वेनेजुएला में अमेरिकी दखल के बाद क्या तेल की वैश्विक कीमतों में उछाल आएगा, जिससे भारत का 'इंपोर्ट बिल' प्रभावित हो?
इस विवाद का एक पहलू यह भी है कि अमेरिका के भीतर कई लॉबी (विशेषकर रक्षा और तकनीक क्षेत्र) भारत के साथ अच्छे संबंधों के पक्ष में हैं। यदि ट्रंप व्यापार और तेल पर अधिक कड़ाई करते हैं, तो भारत के साथ iCET (Critical and Emerging Technology) जैसे रक्षा और स्पेस समझौते भी प्रभावित हो सकते हैं, जो लंबी अवधि में अमेरिका के लिए रणनीतिक नुकसान साबित होगा। ( इनपुट: ANI)
Updated on:
07 Jan 2026 12:28 pm
Published on:
06 Jan 2026 05:28 pm
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