
अमेरिका-वेनेजुएला टकराव। ( प्रतीकात्मक फोटो: AI)
Global Supply: दुनिया के दो बड़े देशों, अमेरिका और वेनेजुएला के बीच गहराते भू-राजनीतिक तनाव (Venezuela US Tension) से वैश्विक तेल बाजार में हलचल मच गई है। जब भी इन दोनों देशों के बीच तल्खी बढ़ती है, तो सबसे पहला सवाल यह उठता है कि क्या इससे भारत की 'तेल सुरक्षा' (Oil Security) को कोई खतरा होगा? हालिया रिपोर्ट्स और आर्थिक आंकड़ों पर नजर डालें, तो तस्वीर काफी हद तक भारत के पक्ष में नजर आ रही है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि तनाव के बावजूद वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति (Supply) बढ़ने की संभावना है। इसी अटकलबाजी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का रुख देखा गया है। भारत अपनी जरूरत का बहुतायत में कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में वैश्विक कीमतों (Crude Oil Prices) में गिरावट भारत के लिए हमेशा एक सकारात्मक संकेत होती है।
अक्सर यह माना जाता है कि वेनेजुएला भारत के लिए तेल का एक अनिवार्य स्रोत है, लेकिन आंकड़े कुछ और ही कहानी कहते हैं। भारत और वेनेजुएला के बीच द्विपक्षीय व्यापार वर्तमान में लगभग 1.9 अरब अमेरिकी डॉलर के आसपास है। इसमें भारत का निर्यात महज 217 मिलियन डॉलर है, जबकि आयात 1.6 अरब डॉलर का है।
पिछले पांच वर्षों के रुझानों को देखें, तो वेनेजुएला को होने वाले भारतीय निर्यात में 8.8% (CAGR) की गिरावट आई है। हालांकि, वित्त वर्ष 2025 में वेनेजुएला से आयात बढ़ा जरूर है, लेकिन यह कोई 'स्ट्रक्चरल डिपेंडेंसी' यानी अनिवार्य निर्भरता नहीं है। सरल शब्दों में कहें, तो भारत वेनेजुएला से तेल इसलिए खरीदता है क्योंकि वह सस्ता पड़ता है, न कि इसलिए कि उसके बिना काम नहीं चल सकता।
| रैंक | देश | विशेषता / स्थिति | भारत के लिए महत्व |
| 1 | रूस | सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता | भारी डिस्काउंट और बड़ी मात्रा |
| 2 | इराक | पारंपरिक भरोसेमंद पार्टनर | स्थिर आपूर्ति और गुणवत्ता |
| 3 | सऊदी अरब | प्रीमियम ग्रेड ऑयल | दीर्घकालिक रणनीतिक संबंध |
| 4 | यूएई | प्रमुख खाड़ी सहयोगी | आसान लॉजिस्टिक्स और व्यापार |
| 5 | वेनेजुएला | सस्ता 'हैवी क्रूड' | कम प्रति इकाई लागत (किफायती) |
वेनेजुएला से आयात होने वाली वस्तुओं में कच्चा तेल सबसे प्रमुख है। वेनेजुएला भारत को अन्य देशों की तुलना में काफी प्रतिस्पर्धी कीमतों पर तेल उपलब्ध कराता है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत जिन देशों से पेट्रोलियम खरीदता है, उनमें वेनेजुएला से मिलने वाले तेल की 'प्रति इकाई लागत' काफी कम है। इससे भारत को अपना आयात बिल कम रखने में मदद मिलती है।
मौजूदा स्थिति का विश्लेषण करें तो अमेरिका-वेनेजुएला तनाव से भारत को तत्काल कोई बड़ा खतरा नजर नहीं आता। चूंकि वैश्विक बाजार में तेल की प्रचुरता रहने की उम्मीद है, इसलिए भारत के तेल आयात बिल (Import Bill) में अचानक उछाल आने की आशंका न के बराबर है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस, इराक और सऊदी अरब जैसे विकल्पों का बखूबी इस्तेमाल कर रहा है, जिससे वेनेजुएला का संकट भारत के लिए फिलहाल कोई बड़ी चुनौती नहीं है।
यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि भारत की विदेश नीति और व्यापारिक रणनीतियां अब इतनी परिपक्व हो चुकी हैं कि किसी एक देश के साथ तनाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा को हिला नहीं सकता। वेनेजुएला से 'सस्ता तेल' मिलना एक बोनस की तरह है, लेकिन यह भारत की मजबूरी नहीं है। बाजार की नरमी यह भी संकेत दे रही है कि वैश्विक निवेशक फिलहाल इस तनाव को तेल संकट के रूप में नहीं देख रहे हैं।
अमेरिकी प्रतिबंध: यदि अमेरिका वेनेजुएला पर नए कड़े प्रतिबंध लगाता है, तो भारतीय रिफाइनरीज को अपने पेमेंट गेटवे और शिपिंग रूट्स में बदलाव करना पड़ सकता है।
रूस का रुख: चूंकि भारत अभी रूस से भारी मात्रा में तेल ले रहा है, वेनेजुएला की आपूर्ति में किसी भी बाधा की भरपाई रूसी तेल से कैसे होगी, यह देखना दिलचस्प होगा।
बहरहाल,इस पूरे विवाद का एक 'लॉजिस्टिक्स' पहलू भी है। वेनेजुएला का तेल 'हैवी क्रूड' की श्रेणी में आता है, जिसे प्रोसेस करने के लिए विशेष रिफाइनरी क्षमता की जरूरत होती है। भारत की रिलायंस और नायरा जैसी निजी रिफाइनरीज इस तेल को प्रोसेस करने में सक्षम हैं। यदि वेनेजुएला से तेल कम होता है, तो इन रिफाइनरीज को अपने फीडस्टॉक में बदलाव करना होगा, जो उनके मार्जिन को थोड़ा प्रभावित कर सकता है, लेकिन आम जनता पर इसका सीधा असर होने की संभावना कम है। (इनपुट: ANI)
Updated on:
06 Jan 2026 05:00 pm
Published on:
06 Jan 2026 04:55 pm
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