
Indian Navy(AI Image-ChatGpt)
Indian Navy Strength: भारतीय नौसेना भविष्य की युद्धक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपने विमानवाहक पोतों के लिए स्वदेशी स्टील्थ मानवरहित लड़ाकू विमान (यूसीएवी) विकसित करने की तैयारी कर रही है। यह परियोजना डीआरडीओ के 'घातक' कार्यक्रम पर आधारित है। इसके तहत ऐसा ड्रोन विकसित किया जाएगा, जो विमानवाहक पोत से उड़ान भरने और वहीं उतरने में सक्षम होगा। इसकी मदद से नौसेना दुश्मन के इलाके में लंबी दूरी तक निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और जरूरत पड़ने पर सटीक हमले जैसे मिशन अंजाम दे सकेगी। मानवरहित होने के कारण इसे उन क्षेत्रों में भी भेजा जा सकेगा, जहां मानव चालित लड़ाकू विमानों की तैनाती जोखिम भरी होती है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार 'घातक' का नौसैनिक संस्करण नौसेना की समुद्री निगरानी, मारक क्षमता और तटीय सुरक्षा को नई मजबूती देगा।
भारत के स्वदेशी स्टील्थ ड्रोन 'घातक' की सबसे बड़ी खासियत इसकी लो-ऑब्जर्वेबल यानी स्टील्थ तकनीक है, जिसके कारण यह दुश्मन के रडार की पकड़ से काफी हद तक दूर रह सकता है। यह एक 'अनमैन्ड कॉम्बैट एरियल व्हीकल (UCAV)' है, यानी इसमें पायलट की जरूरत नहीं होगी और इसे दूर से संचालित किया जा सकेगा। यही वजह है कि उच्च जोखिम वाले सैन्य अभियानों में भी इसकी तैनाती अपेक्षाकृत सुरक्षित मानी जा रही है। 'घातक' रीयल टाइम निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और संवेदनशील इलाकों में मिशन संचालन के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। बिना पायलट के उड़ान भरने की क्षमता इसे दुश्मन के इलाके में गहराई तक भेजने का विकल्प देती है, जहां मानव जीवन को जोखिम में डाले बिना निगरानी और ऑपरेशन किए जा सकते हैं।
इसी बीच अमरीका ने भारत के लिए रक्षा सहयोग के तहत एक बड़ा रखरखाव पैकेज मंजूर किया है। अमरीकी प्रशासन ने 'लगभग 48.22 करोड़ डॉलर (करीब 4,000 करोड़ रुपए)' के पैकेज की औपचारिक अधिसूचना जारी की है। यह पैकेज भारत के 'अपाचे लड़ाकू हेलिकॉप्टरों' और 'M777A2 अल्ट्रा-लाइट हॉवित्जर तोपों' के रख-रखाव से जुड़ा है। भारत ने इन दोनों रक्षा प्रणालियों के लिए मेंटेनेंस सहायता का अनुरोध किया था। इस पैकेज के तहत स्पेयर पार्ट्स, मरम्मत सेवाएं, तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण और डिपो-स्तर की क्षमता निर्माण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे भारतीय सेना की मौजूदा युद्धक क्षमता को बनाए रखने, उपकरणों की ऑपरेशनल उपलब्धता बढ़ाने और दीर्घकालिक रखरखाव को मजबूती देने में मदद मिलेगी। 'घातक' जैसे स्वदेशी प्लेटफॉर्म और अपाचे-M777 जैसे आधुनिक रक्षा संसाधनों के रखरखाव सहयोग से भारत की सैन्य तैयारी को नया बल मिलने की उम्मीद है।
Updated on:
23 Jun 2026 03:36 am
Published on:
23 Jun 2026 03:07 am
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