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IPS Sadanand Date: बचपन में परिवार चलाने के लिए अखबार बेचा करते थे महाराष्ट्र के नए DGP, पहलगाम हमले की जांच में क्या रही भूमिका?

महाराष्ट्र सरकार ने सदानंद दाते को नया डीजीपी नियुक्त किया है। वे 3 जनवरी को पदभार ग्रहण करेंगे। अभी तक वे एनआईए के प्रमुख थे और दिल्ली में थे।

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मुंबई हमले के नायक सदानंद दाते बने महाराष्ट्र के नए DGP। (फोटो- X/SM_8009)

महाराष्ट्र सरकार ने वरिष्ठ आइपीएस अधिकारी सदानंद दाते को महाराष्ट्र पुलिस का महानिदेशक यानी डीजीपी नियुक्त किया है। तीन जनवरी को वह अपना पदभार ग्रहण करेंगे।

अभी तक वह प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली में थे और एनआइए के प्रमुख के तौर पर काम कर रहे थे। इस दौरान पहलगाम हमले की जांच के लेकर कई आंतक से जुड़े कई अहम मामलों की जांच एनआइए ने पास ही थी।

अभी भी शरीर में मौजूद लोहे के टुकड़े

2008 में हुए मुंबई हमले के दौरान सदानंद दाते की बहादुरी को याद किया जाता है। उन्होंने आतंकी अजमल कसाब को जिंदा पकड़ने में अहम भूमिका निभाई थी।

हमले के वक्त वह मुंबई के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त थे। दाते ने अजमल कसाब और उसके सहयोगी आतंकी अबू इस्माइल से मोर्चा लिया था। कई चोटें आने के बाद भी उन्होंने दोनों को रोके रखा। इसी वजह से कसाब जिंदा पकड़ा गया।

हमले के दौरान आतंकियों के फेंके ग्रेनेड से वह गंभीर रूप से घायल भी हुए थे। उनके शरीर में अभी भी मेटल के टुकड़े फंसे हैं। इस वीरता के लिए उन्हें राष्ट्रपति पदक से भी सम्मानित किया गया था।

आतंकवाद और संगठित अपराध से निपटने का लंबा अनुभव

1990 बैच के आइपीएस अफसर सदानंद दाते बेहद तेज तर्रार अधिकारी माने जाते रहे हैं। उनकी पहचान ग्राउंड जीरो पर रहते हुए नेतृत्व करने वाले पुलिस अफसर की रही है।

उन्हें आर्थिक अपराधों से लेकर संगठित अपराध और आतंकवाद से जुड़े मामलों का लंबा अनुभव रहा है। इसी कारण से यूपीएससी की ओर से सुझाए गए पैनल में उनका नाम सबसे आगे रहा।

साधारण परिवार से आकर बनाई पहचान

सदानंद दाते एक बेहद साधारण परिवार से आते हैं। बचपन में परिवार चलाने के लिए अखबार भी बांटे, उनकी मां घरेलू काम करती थीं। दाते पढ़ाई में बेहद तेज थे।

कॉमर्स से पोस्ट ग्रेजुएट होने के साथ ही उन्होंने आर्थिक अपराधों में पुणे यूनिवर्सिटी से पीएचडी भी किया है। वह इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया से भी क्वालीफाइड हैं। वह महाराष्ट्र एटीएस के मुखिया रहने के साथ मुंबई पुलिस के ज्वाइंट कमिश्रर भी रह चुके हैं।

दो साल का कार्यकाल, कई चुनौतियां

59 वर्षीय सदानंद दाते का बतौर महाराष्ट्र डीजीपी कार्यकाल दो वर्ष का होगा। इस दौरान उनके सामने साइबर अपराध, शहरी कानून व्यवस्था, ट्रैफिक व्यवस्था और आतंकवाद व संगठित अपराधों पर नियंत्रण जैसी कई चुनौतियां होगी।