
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे(Photo- IANS)
ईरान और US-इजरायल युद्ध (Iran and US-Israel war) की वजह से वैश्विक स्तर पैदा हुई ऊर्जा चुनौती के बीच भारत सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। सरकार ने वैश्विक ऊर्जा चुनौती के बीच पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी (Petrol-diesel Excise duty) में कटौती की है। सरकार के इस फैसले पर कांग्रेस ने कटाक्ष किया है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (Congress National President Mallikarjun Kharge) ने कहा- पहले ही उन्होंने दाम बढ़ा दिए थे और अब एक्साइज ड्यूटी में कटौती करके वे कहना चाहते हैं कि हमने दाम कम किए। सरकार ने पहले ही लाखों-करोड़ों रुपए लूट लिए। अब अपने पास पैसे जमा करने के बाद सरकार ने थोड़ी सी राहत दे दी। इस फैसले से जनता को कोई राहत नहीं है। ये ऐसा फैसला है कि उन्होंने अपनी जेब में 1000 रुपए जमा कर लिए हैं और अब 200 रुपए वापस दे रहे हैं।
केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाने के फैसले पर कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। एक्साइज ड्यूटी घटाने के फैसले के बाद मनीष तिवारी ने केंद्र सरकार पर हमला बोला था। कांग्रेस सांसद ने कहा- सरकार के पास जो राजस्व आता है, वह जनता की जेब से आता है। लोग टैक्स देते हैं उसी से सरकार के पास राजस्व आता है। अगर सरकार ने एक्साइज़ ड्यूटी कम की है तो सरकार अपने जेब से पैसा थोड़ी दे रही है। अगर एक्साइज़ ड्यूटी कम की है तो इसे जताने की क्या जरूरत है?
केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) में कटौती की है। सरकार द्वारा जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, एक्साइज ड्यूटी कम होने के बाद पेट्रोल पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क 13 रुपए प्रति लीटर से घटकर 3 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 10 रुपए प्रति लीटर से घटकर 0 हो गया है। एक्साइज ड्यूटी में कटौती के बाद पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने X पर इसकी जानकारी दी थी। हरदीप पुरी ने X पर लिखा- ग्लोबल मार्केट में पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतों के इस दौर में तेल कंपनियों के भारी नुकसान (पेट्रोल पर लगभग 24 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपए प्रति लीटर) कम करने के लिए सरकार ने अपने टैक्सेशन राजस्व पर बड़ा असर सहा है। इस कदम से तेल कंपनियों के घाटे को कम करने और घरेलू ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलेगी।
पेट्रोल-डीजल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) में कटौती का मतलब है कि केंद्र सरकार ने खुदरा बिक्री से होने वाले बड़े राजस्व को छोड़ दिया है, ताकि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को कुछ राहत मिल सके। अगर यह कदम नहीं उठाया जाता तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को खुदरा कीमतें बढ़ानी पड़तीं, जिससे अर्थव्यवस्था पर मुद्रास्फीति का असर पड़ता। इसके अतरिक्त तेल मार्केटिंग कंपनियों को ऊंची अंतरराष्ट्रीय कीमतों को खुद झेलता पड़ता। ऐसी स्थिति में मार्केटिंग कंपनियों की वित्तीय स्थिति बुरा असर पड़ता।
Updated on:
28 Mar 2026 08:08 pm
Published on:
28 Mar 2026 08:07 pm
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