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क्या चीन की तरफ मुड़ गया था भारत आ रहा था ईरान का तेल टैंकर? भारत सरकार ने बताई सच्चाई

Iranian oil tanker China route: पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा कि यह खबरें और सोशल मीडिया पोस्ट कि ईरान का कच्चा तेल...

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भारत

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Ashib Khan

Apr 04, 2026

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भारत सरकार ने ईरानी तेल टैंकर को लेकर दिया स्पष्टीकरण (Photo-IANS)

Iran Oil Shipment Diverted: ईरान से करीब 6 लाख बैरल तेल लेकर आ रहे जहाज ने अचानक अपना रास्ता चीन की तरफ कर लिया। इसको लेकर दावा किया गया था कि इसके पीछे पेमेंट से जुड़ी दिक्कतें और अमेरिकी प्रतिबंधों से जुड़े जोखिम बड़ी वजह हो सकते हैं, जो वैश्विक तेल व्यापार की बदलती तस्वीर को दिखाते हैं। अब इस पर भारत सरकार की ओर से स्पष्टीकरण आया है। 

भारत सरकार ने क्या कहा? 

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि यह खबरें और सोशल मीडिया पोस्ट कि ईरान का कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) वाला एक कार्गो भुगतान से जुड़ी समस्याओं के कारण भारत के वडीनार से चीन की ओर मोड़ दिया गया है-पूरी तरह तथ्यात्मक रूप से गलत हैं।

मंत्रालय ने आगे कहा कि मध्य पूर्व में आपूर्ति में आ रही बाधाओं के बावजूद, भारतीय रिफाइनरियों ने अपनी कच्चे तेल की जरूरतों को सुरक्षित कर लिया है, जिसमें ईरान से आपूर्ति भी शामिल है। साथ ही, ईरानी कच्चे तेल के आयात में भुगतान से जुड़ी कोई समस्या नहीं है, जैसा कि कुछ अफवाहों में कहा जा रहा है। यह दोहराया जाता है कि आने वाले महीनों के लिए भारत की कच्चे तेल की जरूरतें पूरी तरह सुरक्षित हैं।

क्या है पूरा मामला

दरअसल, शुक्रवार को जानकारी सामने आई कि ईरानी कच्चा तेल लेकर भारत आ रहा एक तेल टैंकर ने अचानक अपना तय रास्ता बदलकर चीन के एक बंदरगाह की ओर रुख कर लिया। बताया जा रहा है कि यह टैंकर गुजरात के काफी करीब पहुंच गया था। 

व्यापार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि भुगतान से जुड़ी समस्याएं इस रूट बदलने की बड़ी वजह हो सकती हैं। करीब 6 लाख बैरल ईरानी कच्चा तेल लेकर चल रहा यह टैंकर पहले वाडिनार की ओर बढ़ रहा था।

बता दें कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका ने 21 मार्च को एक महीने के लिए उन ईरानी कच्चे तेल पर लगे प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से हटा दिया। दरअसल, इसका उद्देश्य अधिक से अधिक तेल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में लाना, वैश्विक आपूर्ति सुधारना और बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करना था।

इसके अलावा, अमेरिका द्वारा दी गई छूट के बाद ईरानी तेल ले जाने वाले जहाजों को ऐसी रणनीति अपनाने की खास जरूरत नहीं थी। यह भी स्पष्ट नहीं है कि इस तेल का खरीदार भारत का कौन सा रिफाइनर था।