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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने ब्रह्मांड से अति उच्च वेग के साथ वायुमंडल में प्रवेश कर पृथ्वी से टकराने वाले अंतरग्रहीय धूलकणों का पता लगाने में सफलता हासिल की है। ये धूलकण हर एक हजार सेकेंड में पृथ्वी से टकराते हैं।
इसरो के अहमदाबाद स्थित भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) के वैज्ञानिकों के बनाए गए पहले स्वदेश उपकरण, डस्ट एक्सपेरिमेंट (डीईएक्स) ने यह अद्भुत खोज की है। इसरो ने कहा है कि यह कॉस्मिक डस्ट डिटेक्टर पृथ्वी के अलावा शुक्र, चंद्रमा और मंगल ग्रह के वातावरण में भी प्रवेश करने वाले अंतरग्रहीय धूलकणों का पता लगाने में सक्षम है। इससे उन ग्रहों पर भी उल्कापात या धूलकणों की बौछार का पता लगाया जा सकेगा, जहां वातावरण नहीं है या वातावरण अत्यंत घना है। यह उपलब्धि भविष्य के मानव युक्त चंद्र या मानव युक्त मंगल मिशनों के लिए काफी महत्वपूर्ण है।
इसरो ने कहा है कि अंतरग्रहीय धूल कण धूमकेतुओं और क्षुद्रग्रहों से निकले सूक्ष्म कण होते हैं, जो पृथ्वी के वायुमंडल की रहस्यमय उल्का परत का निर्माण करते हैं। रात के समय ये टूटते तारों (शूटिंग स्टार) के रूप में दिखाई देते हैं।
डस्ट एक्सपेरिमेंट (डीईएक्स) ऐसे उच्च-गति वाले अंतरग्रहीय धूलकणों के टकराव को सुनने के लिए बनाया गया एक उपकरण है। यह महत्वपूर्ण डेटा एकत्र करता है, जो ब्रह्मांड के प्रति हमारी समझ को नई परिभाषा देगा। यह उपकरण 3 किलोग्राम का है, जो अत्याधुनिक हाइपरवेलोसिटी के सिद्धांत पर आधारित है। यह केवल 4.5 वॉट ऊर्जा खपत के साथ उच्च-गति वाले अंतरिक्ष धूल के टकरावों को दर्ज करने के लिए डिजाइन किया गया है।
Published on:
07 Jan 2026 05:08 am
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