
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश (Photo-IANS)
ISRO Latest News: कांग्रेस ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर अंतरिक्ष कार्यक्रम के निजीकरण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि सरकार भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की भूमिका को सीमित करने की तैयारी कर रही है। साथ ही अंतरिक्ष क्षेत्र की कई जिम्मेदारियां निजी कंपनियों को सौंपने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश (Jairam Ramesh) ने कुछ मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर यह दावा किया। हालांकि, कांग्रेस के इन आरोपों पर केंद्र सरकार की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
रमेश ने दावा किया कि रॉकेट के विकास और निर्माण के क्षेत्र में इसरो की भूमिका को काफी सीमित करने की तैयारी है। इसके अलावा संगठन की उपग्रह संबंधी कुछ परिसंपत्तियां निजी कंपनियों को हस्तांतरित किए जाने की भी बात कही गई है। कांग्रेस नेता ने कहा कि यह कदम चिंता पैदा करने वाला है, क्योंकि इसरो ने पिछले 6 दशकों में लगातार मेहनत और व्यवस्थित तरीके से अपनी तकनीकी क्षमता, दक्षता और विशेषज्ञता विकसित की है।
कांग्रेस महासचिव ने अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों और स्टार्टअप को प्रोत्साहन देने की जरूरत को स्वीकार किया। हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि जब इसरो लंबे समय से निजी क्षेत्र के साथ सफलतापूर्वक साझेदारी करता रहा है, तो फिर संगठन की भूमिका को कमजोर करने की जरूरत क्यों पड़ रही है। उन्होंने कहा कि इसरो ने देश को गौरवान्वित किया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई मौकों पर संगठन की उपलब्धियों का उल्लेख करते रहे हैं।
रमेश ने यह भी दावा किया कि पिछले कुछ महीनों में इसरो के करीब 100 से 120 महत्वपूर्ण पेशेवर संगठन छोड़ चुके हैं। उनके मुताबिक, इन कर्मचारियों को संभवतः संगठन की भविष्य की दिशा का अंदाजा हो गया है। हालांकि, इस दावे को लेकर भी सरकार की ओर से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
कांग्रेस नेता ने तमिलनाडु में बन रहे दूसरे अंतरिक्ष केंद्र का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि करीब 1,000 करोड़ रुपये के निवेश से तैयार हो रहे इस केंद्र को भी एक निजी कंपनी को सौंपने की तैयारी की जा रही है। रमेश ने कहा कि ऐसी स्थिति में आंध्र प्रदेश स्थित देश के ऐतिहासिक श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र के भविष्य को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
रमेश ने आरोप लगाया कि परमाणु ऊर्जा क्षेत्र की तरह अंतरिक्ष कार्यक्रम में भी सरकार के कथित निजीकरण एजेंडे को प्रधानमंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय से प्रोत्साहन मिल रहा है। कांग्रेस महासचिव ने इसे अंतरिक्ष क्षेत्र की मौजूदा व्यवस्था और इसरो की भूमिका के संदर्भ में गंभीर मुद्दा बताया।
रमेश ने इसरो के पूर्व अध्यक्ष जी. माधवन नायर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री से प्रेरित होकर अक्टूबर 2018 में भाजपा में शामिल हुए पूर्व इसरो प्रमुख ने भी हाल में अंतरिक्ष क्षेत्र में निजीकरण की नई कवायद को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सवाल किया कि इसरो के 5 अन्य जीवित पूर्व अध्यक्ष इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर अपनी राय सार्वजनिक रूप से क्यों नहीं रखते।
कांग्रेस के आरोपों के बीच केंद्र सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। फिलहाल विवाद का केंद्र यह सवाल है कि अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी के साथ इसरो की पारंपरिक भूमिका किस तरह तय की जाएगी और क्या संगठन की जिम्मेदारियों में कोई बड़ा बदलाव प्रस्तावित है?
Updated on:
24 Aug 2026 01:34 pm
Published on:
24 Aug 2026 01:27 pm
