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ईरानी युद्धपोत IRIS डेना के डूबने और IRIS लावन की डॉकिंग पर जयशंकर ने तोड़ी चुप्पी

अमेरिका द्वारा हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत IRIS देना को हमला करके डुबोने और IRIS लावन की कोच्चि में डॉकिंग मामले पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपना पक्ष रखा है। विदेश मंत्री ने कहा कि हमने मानवता के दृष्टिकोण से स्थिति का सामना किया है।

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भारत

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Shaitan Prajapat

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Vinay Shakya

Mar 07, 2026

S Jaishankar

विदेश मंत्री एस.जयशंकर (Photo- IANS)

Jaishankar Expressed His Views on Irani Warship: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच तनाव जारी है। इस तनावपूर्ण माहौल के बीच हाल ही में अमेरिकी पनडुब्बी ने हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत IRIS डेना को टॉरपीडो से हमला करके डुबो दिया था। इस घटना से पहले कोच्चि में ईरानी जहाज की डॉकिंग की गई। इस मामले पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नई दिल्ली में 'रायसीना डायलॉग 2026' के तीसरे दिन बड़ी जानकारी दी है। जयशंकर ने कहा- मैं भी संयुक्त राष्ट्र सीमा समझौते (UNCLOS) और अंतरराष्ट्रीय कानून का समर्थन करता हूं। मानवीय आधार पर IRIS लावन को कोच्चि में डॉक करने की अनुमति दी गई थी। भारत में आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (International Fleet Review) 2026 में शामिल होने वाले IRIS लावन को तकनीकि खराबी के कारण इसे कोच्चि में डॉक किया गया था। श्रीलंका के दक्षिण में IRIS डेना की घटना से कुछ दिन पहले ईरान ने भारत से संपर्क किया था। भारत ने 1 मार्च को युद्धपोत को डॉकिंग की अनुमति दी थी।

28 तारीख को ईरान की तरफ से आया था जहाज की डाकिंग का संदेश

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा- हमें ईरान की तरफ से एक संदेश मिला कि एक जहाज, जो संभवतः उस समय हमारी सीमाओं के सबसे करीब था। हमारे बंदरगाह में आना चाहता था। ईरान की तरफ से बताया गया कि उन्हें कुछ समस्याएं आ रही हैं। मुझे याद है कि यह 28 तारीख की बात है और 1 तारीख को हमने कहा- ठीक है, आप आ सकते हैं। उन्हें आने में कुछ दिन लगे और फिर वे कोच्चि में डॉक हुए। वह जहाज अभी भी वहीं है। जाहिर है कि जहाज पर सवार लोगों में से कई युवा कैडेट थे। वे उतर चुके हैं, वे पास के ही एक सुविधा केंद्र में हैं।

जहाज के 183 चालक दल के सदस्य वर्तमान में कोच्चि में नौसेना सुविधाओं में रह रहे हैं। जब वे रवाना हुए और यहां आए तो स्थिति बिल्कुल अलग थी। वे बेड़े की समीक्षा के लिए आ रहे थे और वे एक तरह से घटनाओं के गलत पक्ष में फंस गए। जाहिर है कि श्रीलंका में भी ऐसी ही स्थिति थी। उन्होंने जो निर्णय लिया, उसमें से एक दुर्भाग्यवश बच नहीं पाया। हमने कानूनी मुद्दों से हटकर मानवता के दृष्टिकोण से स्थिति का सामना किया और मुझे लगता है कि हमने सही काम किया।

विदेश मंत्री की अपील- हिंद महासागर की वास्तविकता को समझें

ईरानी जहाज IRIS डेना और IRIS लावन के मामले पर बात करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि इस पर सोशल मीडिया में काफी बहस चल रही है। कृपया हिंद महासागर की वास्तविकता को समझें। डिएगो गार्सिया हिंद महासागर में रहा है। पिछले 5 दशकों में जिबूती में विदेशी सेनाओं की मौजूदगी, इस सदी के पहले दशक के शुरुआती दौर में स्थापित हुई थी। हंबनटोटा का अस्तित्व इसी दौरान सामने आया है। उन्होंने कहा कि व्यापारिक जहाजों पर काम करने वाले लोगों में भारतीयों की संख्या बहुत अधिक है। जब भी मालवाहक जहाज पर हमला होता है तो इस बात की पूरी संभावना रहती है कि जहाज के कुछ हिस्से में भारतीय कर्मचारी तैनात हों। हमें इस बात को गंभीरता से लेना चाहिए, क्योंकि पिछले कुछ दिनों में कई लोगों की जान गई है।

IRIS डेना के डूबने से कुल 87 लोगों की गई जान

एस जयशंकर ने बताया कि IRIS डेना के मामले में, कोलंबो स्थित समुद्री बचाव समन्वय केंद्र (MRCC) में पोत से संकटकालीन सूचना प्राप्त हुई। सूचना के बाद भारतीय नौसेना ने सर्चिंग और रेस्क्यू अभियान शुरू किया। नौसेना ने श्रीलंका के नेतृत्व में चल रहे सर्चिंग अभियान में सहयोग के लिए समुद्र में लबी दूरी का गश्ती विमान तैनात किया। युद्धपोत IRIS डेना के डूबने के समय उस पर भारी तोपें, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, जहाज रोधी मिसाइलें और लोड थे।