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क्या जम्मू कश्मीर से खत्म हो रही कांग्रेस? अब आजाद के समर्थन में NSUI के 36 नेताओं ने दिया इस्तीफा

Jammu Kashmir Mass Resignation: गुलाम नबी आजाद के सपोर्ट में जम्मू-कश्मीर के NSUI के नेताओं ने सामूहिक रूप से पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। NSUI के उपाध्यक्ष अनिरुद्ध रैना और प्रदेश महासचिव मनिक शर्मा भी इसमें शामिल हैं।

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Mahima Pandey

Sep 01, 2022

Jammu Kashmir: 36 NSUI leaders resign from Congress party in support of Azad

Jammu Kashmir: 36 NSUI leaders resign from Congress party in support of Azad

गुलाम नबी आजाद के कांग्रेस छोड़ देने के बाद से पार्टी के लिए मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। उनके कांग्रेस छोड़ने के बाद से पार्टी में इस्तीफों का दौर जारी है। इन इस्तीफों से ऐसा लगने लगा है कि अब पार्टी का अस्तित्व ही जम्मू कश्मीर में खतरे में आ गया है। आज़ाद के समर्थन में अब जम्मू कश्मीर के NSUI के 36 नेताओं ने इस्तीफा दिया है। आने वाले दिनों में और नेताओं के इस्तीफे की आशंका जताई जा रही है।

NSUI के 16 नेताओं ने दिया इस्तीफा
आज गुलाम नबी आजाद के समर्थन में NSUI ने सामूहिक रूप से इस्तीफा दिया है। इस्तीफा देने वालों में NSUI अध्यक्ष पीयूष शर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष अनिरुद्ध रैना और प्रदेश महासचिव माणिक शर्मा शामिल थे।

NSUI पीयूष शर्मा ने "पार्टी के कामकाज" का हवाला देते हुए कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को सामूहिक रूप से इस्तीफा सौंप है और उनके साथ अन्य कार्यकर्ताओं के पार्टी छोड़ने की जानकारी दी है।

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जम्मू-कश्मीर के 64 कांग्रेसी नेताओं ने नेतृत्व संकट का हवाला देते हुए दिया इस्तीफा
|इससे पहले केंद्र शासित प्रदेश में 64 वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी से इस्तीफा दिया था जिनमें जम्मू-कश्मीर के पूर्व उपमुख्यमंत्री तारा चंद भी शामिल थे। उन्होंने पार्टी में "नेतृत्व संकट" का हवाला देते हुए कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को सामूहिक रूप से इस्तीफा सौंपा था।

जम्मू कश्मीर में कांग्रेस का अस्तित्व खतरे में?
बता दें कि जम्मू कश्मीर में पार्टी का जो भी राजनीतिक उपस्थिति बची थी, वो गुलाम नबी आजाद के इस्तीफे के बाद से खतरे में आ गया है। उनके समर्थन में कई वफादार नेता और कार्यकर्ता पार्टी छोड़ रहे हैं और इससे पार्टी का अस्तित्व खतरे में आ गया है। कांग्रेस पहले ही नेतृत्व संकट से जूझ रही है और चुनावों से पूर्व ही बड़े नेता ही साथ छोड़ देंगे तो फिर चुनावों में कौन खड़ा होगा?

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कोई भी पार्टी अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं की निष्ठा लगन और काम से ही मजबूत होती है। खासकर चुनावों से पहले ये सभी जमीनी स्तर पर पार्टी की मजबूती के लिए काम करते हैं। अब जब पार्टी में कोई प्रमुख चेहरा ही नहीं बचेगा तो पार्टी किस आधार पर चुनावों में खड़ी होगी? मतदाता क्या नए चेहरे पर भरोसा जताएंगे?

इस बीच आजाद जल्द ही नई पार्टी का गठन करने वाले हैं और ये नई पार्टी कांग्रेस के वोट बैंक में बड़ा सेंध अवश्य लगाने वाली है। ऐसे में कांग्रेस के लिए इस परिस्थिति से खुद को निकालना कठिन सा होता जा रहा है।