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Jharkhand HC का बड़ा फैसला: रात में घर में घुसना और कपड़े उठाना गंभीर अपराध नहीं, जानिए कोर्ट ने क्या कहा

Jharkhand HC Criminal Case: करीब 27 साल पुराने मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले में बड़ा बदलाव किया। चार साल की सजा पाए आरोपी को राहत देते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ‘दुष्कर्म का प्रयास’ साबित करने के लिए घटना का आगे बढ़ना कानूनी रूप से निर्णायक है।
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भारत

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Manoj Vashisth

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Updated: 8 Sep 2026, 1:34 PM IST

Jharkhand High Court news

झारखंड हाईकोर्ट

Jharkhand High Court Latest Judgment: झारखंड हाई कोर्ट ने यौन अपराधों से जुड़े एक पुराने मामले में अहम कानूनी टिप्पणी करते हुए अपराध की दो अलग-अलग श्रेणियों के बीच स्पष्ट अंतर बताया है। अदालत ने कहा कि किसी महिला के घर में रात के समय घुसना और उसके कपड़े उठाने की कोशिश करना गंभीर आपराधिक कृत्य हो सकता है, लेकिन हर ऐसी हरकत को दुष्कर्म के प्रयास के रूप में नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने मामले के सबूतों की कसौटी पर आरोप की गंभीरता और लागू कानून के बीच अंतर को रेखांकित किया।

कोर्ट का फैसला और कानूनी कसौटी

जस्टिस प्रदीप श्रीवास्तव की एकल पीठ ने आरोपी की आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए अपराध की दो अलग-अलग श्रेणियों के बीच स्पष्ट अंतर बताया है। अदालत ने कहा कि किसी महिला के घर में रात के समय घुसना और उसके कपड़े उठाने की कोशिश करना गंभीर आपराधिक कृत्य हो सकता है, लेकिन हर ऐसी हरकत को दुष्कर्म के प्रयास के रूप में नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने मामले के सबूतों की कसौटी पर आरोप की गंभीरता और लागू कानून के बीच अंतर को रेखांकित किया।

आरोप में संशोधन और सजा में बदलाव

हाई कोर्ट ने आरोपी को महिला की के साथ ज्यादती करने के इरादे से आपराधिक बल प्रयोग के अपराध में दोषी माना, लेकिन यौन शोषण के प्रयास की धारा के तहत मिली सजा को बरकरार नहीं रखा। अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य आरोपी की हरकत को गंभीर आपराधिक व्यवहार तो साबित करते हैं, लेकिन उसे यौन शोषण के प्रयास तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

1999 के मामले का घटनाक्रम

मामला 26 दिसंबर 1999 की रात का है। घटना के अगले ही दिन आरोपी को गिरफ्तार किया गया था। बाद में पुलिस ने जांच पूरी कर आरोपपत्र दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान सत्र अदालत ने आरोपी को यौन शोषण के प्रयास का दोषी ठहराते हुए चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद आरोपी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

8 महीने की जेल को कोर्ट ने माना पर्याप्त

हाई कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश में संशोधन करते हुए सजा को उस अपराध तक सीमित कर दिया, जो उपलब्ध साक्ष्यों से साबित हुआ। अदालत ने आरोपी द्वारा पहले ही जेल में बिताए गए करीब आठ महीने को पर्याप्त माना और कहा कि न्याय के उद्देश्य की पूर्ति के लिए अब अतिरिक्त कारावास जरूरी नहीं है। इस आधार पर अपील को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया गया।

‘यौन शोषण के प्रयास’ की कानूनी परिभाषा

फैसले का सबसे अहम कानूनी पहलू यह है कि अदालत ने महिला के साथ ज्यादती और यौन शोषण के प्रयास के बीच अंतर स्पष्ट किया। कोर्ट के अनुसार, किसी कृत्य को यौन शोषण का प्रयास तभी माना जा सकता है जब आरोपी की कार्रवाई अपराध को अंजाम देने के पर्याप्त रूप से करीब पहुंच चुकी हो। केवल आपत्तिजनक या यौन प्रकृति की हरकत को स्वतः उसी श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

यह फैसला आपराधिक मामलों में ‘Attempt’ यानी प्रयास की कानूनी सीमा को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। अदालत ने मूल घटना की गंभीरता को नकारे बिना यह देखा कि आरोप को साबित करने के लिए कानून में निर्धारित स्तर के साक्ष्य मौजूद हैं या नहीं। यही अंतर इस करीब ढाई दशक पुराने मामले में आरोपी की सजा बदलने का आधार बना।

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