24 अक्टूबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

55 गज का प्लॉट, 7 लाख का रेंट, हादसों के बीच अब मनमाने पीजी कारोबार पर कसेगा सरकारी शिकंजा

Building Collapse Satya Niketan: दिल्ली के सत्य निकेतन में 55 गज के मकान में चल रहे पीजी में हादसे के बाद उठा बड़ा सवाल। क्या दिल्ली में पीजी के लिए कोई कानून है? जानिए कैसे 7 लाख रुपये किराया वसूलने वाले इन पीजी पर कसने जा रहा है नया शिकंजा। पढ़ें पूरी खबर...
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

नई दिल्ली

•

image

Pratiksha Gupta

•

Updated: 8 Sep 2026, 12:47 PM IST

delhi pg rent capping, satya niketan building collapse

दिल्ली में 55 गज के मकान से हर महीने वसूला जा रहा था 7 लाख से ज्यादा किराया (फोटो सोर्स- IANS)

Delhi Building Collapse: दिल्ली में पढ़ाई और कोचिंग के लिए आने वाले लाखों छात्रों के लिए रहने की व्यवस्था अब एक कारोबार बन चुकी है। हाल ही में दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक पांच मंजिला इमारत के ढहने से हुए हादसे ने पीजी और हॉस्टल के नाम पर चल रही इस व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। सिर्फ 55 गज के छोटे से प्लॉट पर बनी 6 मंजिला इमारत में 20 कमरों के अंदर 60 बेड ठूंस दिए गए थे, जिससे हर महीने करीब 7 से 7.5 लाख रुपये का मोटा किराया वसूला जा रहा था। इस हादसे के बाद अब यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या दिल्ली में छात्रों की सुरक्षा और मनमाने किराए को रोकने के लिए कोई कानून मौजूद है।

कागजों में पुराना नियम, जमीन पर बन गए दर्जनों बेड वाले हॉस्टल

दिल्ली में फिलहाल ऐसा कोई अलग या सख्त कानून नहीं है जिसके तहत हर पीजी का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य हो या किसी सरकारी एजेंसी द्वारा नियमित जांच की जाती हो। साल 1993 में केंद्र सरकार ने पेयिंग गेस्ट योजना शुरू की थी, जिसे 2000 में दिल्ली की शीला दीक्षित सरकार ने लागू किया था। उस समय नियम यह था कि मकान मालिक खुद उसी घर में रहे और अधिकतम 4 कमरों में केवल 8 बेड तक की ही इजाजत दी जाए। लेकिन आज दिल्ली विश्वविद्यालय, मुखर्जी नगर, राजेंद्र नगर और करोल बाग जैसे इलाकों में पूरे के पूरे मकान और बहुमंजिला इमारतें बिना किसी स्पष्ट निगरानी के हॉस्टल में तब्दील हो चुकी हैं।

बिना सेफ्टी गारंटी 25 हजार तक मंथली किराया

राजधानी में पीजी के किराए पर कोई सरकारी नियंत्रण नहीं होने के कारण संचालक मनमर्जी से रेट तय करते हैं। कोचिंग हब और यूनिवर्सिटी एरिया में एक बेड का किराया 20 से 25 हजार रुपये प्रति माह तक वसूला जाता है। इसके अलावा बिजली, पानी और खाने का चार्ज अलग से लिया जाता है। सुविधाओं और बुनियादी सुरक्षा इंतजामों के अभाव के बावजूद मजबूरी में छात्रों को भारी-भरकम किराया देना पड़ता है।

नए कानून से तय होगी जवाबदेही और किराए की सीमा

लगातार सामने आ रहे हादसों के बाद अब सरकार एक नई नीति पर काम कर रही है। प्रस्तावित नियमों के तहत पीजी के लिए किराए की सीमा यानी 'रेंट बैंड' तय करने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा इमारतों की मजबूती, फायर सेफ्टी और रहने के न्यूनतम मानकों का पालन अनिवार्य किया जाएगा। अगर यह नई व्यवस्था लागू होती है तो बिना तय पैमानों के पीजी चलाना संभव नहीं होगा और मनमाने किराए से छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी।

बड़ी खबरें

View All

नई दिल्ली

दिल्ली न्यूज़

ट्रेंडिंग