
फाइल फोटो
मुंबई के अतिरिक्त सत्र न्यायालय के जज मनोज बी ओझा ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) के नौ छात्रों को कड़ी चेतावनी दी कि उनकी जीएन साईबाबा की मौत की पहली बरसी पर आयोजित कार्यक्रम में भागीदारी के कारण उनका करियर बर्बाद हो गया है। यह टिप्पणी छात्रों की अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान आई, जहां जज ने कहा, आपने करियर शुरू होने से पहले ही बड़ी भूल कर दी। आपका करियर बर्बाद हो गया है।
पूर्व दिल्ली यूनिवर्सिटी प्रोफेसर और मानवाधिकार कार्यकर्ता जीएन साईबाबा का निधन 12 अक्टूबर 2024 को हैदराबाद में ऑपरेशन के बाद जटिलताओं से हुआ था। साईबाबा को माओवादी लिंक के आरोप में लंबे समय तक जेल में रखा गया था और उनकी 90% से अधिक विकलांगता थी। उनकी मौत की पहली बरसी 12 अक्टूबर 2025 को TISS के देonar कैंपस में छात्रों ने मोमबत्तियां जलाईं, साईबाबा के पोस्टर लगाए और श्रद्धांजलि सभा आयोजित की। कुछ छात्रों ने उमर खालिद और शरजील इमाम के समर्थन में नारे भी लगाए, जो जेल में बंद कार्यकर्ता हैं। कार्यक्रम के दौरान डेमोक्रेटिक सेक्युलर स्टूडेंट्स फोरम से जुड़े कुछ लोगों ने बाधा डाली, पोस्टर फाड़े और तस्वीरें लीं।
ट्रॉम्बे पुलिस ने TISS प्रशासन की शिकायत पर FIR दर्ज की, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) और महाराष्ट्र पुलिस एक्ट के तहत अवैध सभा, राष्ट्र को नुकसान पहुंचाना और विभिन्न समूहों में शत्रुता फैलाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए। नौ छात्र, जो सोशल वर्क में मास्टर्स कर रहे हैं, इस FIR में नामित हैं।
सुनवाई के दौरान जज ओझा ने छात्रों से पूछा, आप महाराष्ट्र पढ़ने आए थे सब ये करने? आपके पिता जानते हैं? कितने पिता सरकारी नौकरी में हैं? उन्होंने कहा, आपके पास आपराधिक रिकॉर्ड है, जो पुलिस के पास है—न सिर्फ यहां बल्कि पूरे देश में। सरकारी नौकरी भूल जाओ। प्राइवेट जॉब में भी लंबित केस का खुलासा करना पड़ेगा। जज ने आगे कहा, आप सोचते हैं आप वैज्ञानिक या इंजीनियर हैं? यहां तक कि इंजीनियरों को नौकरी नहीं मिल रही।
कोर्ट ने छात्रों को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की और मामले को इस महीने के अंत में सुनवाई के लिए स्थगित कर दिया। छात्रों को फिलहाल राहत मिली है, लेकिन जज की टिप्पणियां उनके भविष्य पर गहरा असर डाल सकती हैं।
Updated on:
21 Jan 2026 07:07 pm
Published on:
21 Jan 2026 06:47 pm
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