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जस्टिस यशवंत वर्मा की बढ़ीं मुश्किलें, पद से हटाने के लिए शीतकालीन सत्र में लाया जा सकता है महाभियोग प्रस्ताव

पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा के खिलाफ जांच रिपोर्ट संसद में पेश होने के बाद अब आगामी शीतकालीन सत्र में उन्हें पद से हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव लाया जा सकता है।
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भारत

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Rahul Yadav

•

Updated: 12 Aug 2026, 6:05 PM IST

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पूर्व जज यशवंत वर्मा (फोटो - ChatGPT)

Justice Yashwant Varma Impeachment Motion Winter Session: जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ कार्रवाई का मामला एक बार फिर चर्चा में है। उनके घर से मिली बड़ी मात्रा में नकदी की जांच करने वाली तीन सदस्यीय समिति ने सभी आरोपों को सही पाया है। समिति की रिपोर्ट बुधवार को संसद के दोनों सदनों में पेश की गई। अब सरकारी सूत्रों के हवाले से खबर है कि जस्टिस वर्मा को पद से हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव शीतकालीन सत्र में लाया जा सकता है।

हालांकि, इस मामले में एक कानूनी सवाल भी है। जस्टिस वर्मा अप्रैल 2026 में इस्तीफा दे चुके हैं। उनका इस्तीफा अभी तक कानून मंत्रालय की तरफ से अधिसूचित नहीं हुआ है। इसी वजह से संसद में उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति अहम हो गई है।

तीनों आरोपों को समिति ने सही पाया

जस्टिस वर्मा के खिलाफ जांच के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने तीन सदस्यीय समिति बनाई थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट मई में सौंप दी थी। रिपोर्ट बुधवार को लोकसभा और राज्यसभा में रखी गई। इसके साथ जांच के दौरान दर्ज किए गए मौखिक और दस्तावेजी सबूत भी सदन के सामने रखे गए।

रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास के स्टोर रूम में बड़ी मात्रा में 500 रुपये के नोट मिले थे। समिति ने कहा कि जस्टिस वर्मा नकदी की मौजूदगी, उसके स्रोत और मालिकाना हक को लेकर संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।

आग लगने के बाद मिला था कैश

मामला 14 मार्च 2025 की रात सामने आया था। उस समय जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास में आग लग गई थी। आग बुझाने पहुंचे दमकलकर्मियों को स्टोर रूम में जली हुई नकदी मिली थी। इसके बाद मामले की जांच शुरू हुई। जस्टिस वर्मा उस समय दिल्ली हाईकोर्ट के जज थे। विवाद के बाद उन्हें उनके मूल हाईकोर्ट यानी इलाहाबाद हाईकोर्ट भेज दिया गया था।

महाभियोग प्रस्ताव आया तो क्या होगा?

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, प्रस्ताव शीतकालीन सत्र में लाया जा सकता है। इस प्रक्रिया के दौरान जस्टिस वर्मा को अपना पक्ष रखने का मौका भी मिल सकता है।

लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल उनके इस्तीफे की स्थिति को लेकर है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने बुधवार को पूछा कि अगर किसी जज ने इस्तीफा दे दिया है लेकिन उसका इस्तीफा स्वीकार या अधिसूचित नहीं हुआ है तो क्या संसद उसके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है। उन्होंने सरकार से इस स्थिति को स्पष्ट करने की मांग की है।

इस्तीफा दे चुके हैं जस्टिस वर्मा

जस्टिस वर्मा अप्रैल 2026 में इस्तीफा दे चुके हैं। हालांकि, उनका इस्तीफा अभी तक कानून मंत्रालय से अधिसूचित नहीं हुआ है। इसी कारण वह अभी भी इलाहाबाद हाईकोर्ट की न्यायाधीशों की सूची में दिखाई दे रहे हैं। अब जांच रिपोर्ट संसद के सामने आ चुकी है। ऐसे में शीतकालीन सत्र में संभावित महाभियोग प्रस्ताव और जस्टिस वर्मा के इस्तीफे की कानूनी स्थिति पर सबकी नजर रहेगी।