
मद्रास हाईकोर्ट (Photo Credit - IANS)
AIADMK MLAs Resignation: तमिलनाडु विधानसभा में विधायकों के इस्तीफे और दल-बदल से जुड़ा कानूनी विवाद मद्रास हाई कोर्ट पहुंच चुका है। ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) ने विधानसभा स्पीकर जे.सी.डी. प्रभाकर के पार्टी विधायकों के इस्तीफा स्वीकार करने के फैसले को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की थी, जिस पर बुधवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान, AIADMK ने तर्क दिया कि स्पीकर को इस मामले में कोई विशेष विशेषाधिकार या संवैधानिक छूट नहीं मिलनी चाहिए और उन्हें अपना पक्ष स्पष्ट करने के लिए अदालत में पेश होना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश एस. धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त के लिए तय की है।
कोर्ट में सुनवाई के दौरान AIADMK के मुख्य व्हिप एग्री एस.एस. कृष्णमूर्ति की ओर से पेश वकील ने तर्क दिया कि विधानसभा स्पीकर ने संविधान के अनुच्छेद 190(3)(b) में तय प्रक्रियाओं और प्रावधानों की अनदेखी की है। AIADMK का कहना है कि जिन विधायकों के खिलाफ दलबदल विरोधी कानून (10वीं अनुसूची) के तहत अयोग्यता की याचिकाएं पहले से लंबित थीं, उनका इस्तीफा बिना किसी जांच के स्वीकार कर लिया गया।
AIADMK के वकीलों ने बेंच के सामने कहा कि इन विधायकों का इस्तीफा असल में अयोग्यता की कार्रवाई से बचने की एक चाल थी। जो पूरी तरह से लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादा के खिलाफ है। इसलिए, इस्तीफा स्वीकार करने वाले स्पीकर को कोर्ट में पेश होने से कोई विशेष छूट नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर संवैधानिक प्रक्रियाओं के दुरुपयोग से जुड़ा है।
यह पूरा मामला TVK में विधायकों के शामिल होने और संभावित फ्लोर टेस्ट से जुड़ा है। TVK ने विधानसभा चुनाव तो जीत लिया था, लेकिन सदन में बहुमत साबित करने के लिए उसे और विधायकों के समर्थन की ज़रूरत थी। तब AIADMK के कुछ विधायकों ने पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया, पाला बदला और TVK को अपना समर्थन दिया। इसके बाद, C. विजयभास्कर और M.R. विजयभास्कर जैसे प्रमुख नेताओं ने अपने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया और TVK में शामिल हो गए।
AIADMK का आरोप है कि विधायकों के इस्तीफा सौंपने के तुरंत बाद, स्पीकर ने बिना कोई कारण बताओ नोटिस जारी किए या यह जांचे बिना कि इस्तीफा स्वेच्छा से और असली थे या नहीं, उन्हें स्वीकार कर लिया और सीटों को खाली घोषित कर दिया। अब हाई कोर्ट 17 अगस्त को इस बात पर आगे विचार करेगा कि क्या विधानसभा स्पीकर का फैसला न्यायिक समीक्षा के दायरे में आता है और क्या उन्हें कोर्ट के सामने जवाबदेह ठहराया जा सकता है।
Updated on:
12 Aug 2026 07:27 pm
Published on:
12 Aug 2026 07:24 pm
