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‘मैं भी CM पद की रेस में’, इस राज्य में अब क्या करेगी कांग्रेस? एक और कद्दावर नेता के बयान ने पार्टी को सोचने पर कर दिया मजबूर

कर्नाटक में सियासी हलचल तेज है। इस बीच, एक और कद्दावर नेता ने बड़ा बयान दे दिया है, जिससे पार्टी की मुश्किलें बढ़ गईं हैं।

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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे। (फोटो- ANI)

कर्नाटक में सियासी तनाव चरम पर है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच सीएम पद को लेकर जबरदस्त खींचतान चल रही है। इस बीच, एक और कद्दावर नेता के बयान ने कांग्रेस को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

अब कर्नाटक के होम मिनिस्टर डॉ जी परमेश्वर ने कहा है कि वह हमेशा से मुख्यमंत्री पद की रेस में रहे हैं। रविवार को मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा- मैं 2013 में कर्नाटक कांग्रेस का अध्यक्ष था और मेरे समय में कांग्रेस जीती और पावर में आई। लेकिन मैंने यह नहीं कहा कि पार्टी मेरी वजह से सत्ता में आई।

सब साथ हुए तब ही जीत मिली- कांग्रेस नेता

उन्होंने कहा- सब साथ हुए तब ही जीत मिली थी। मैं चुनाव हार गया। अगर मैं उस बार जीत जाता, तो हमें नहीं पता कि क्या होता? कभी-कभी, पार्टी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को मौका देती है, लेकिन कभी-कभी नहीं देती।

परमेश्वर ने कहा- दलित लीडर लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि एक दलित को प्रदेश में सीएम बनना चाहिए। उन्होंने कहा- क्या यह तब होगा जब हम सब साथ बैठकर खाना खाएंगे? हम सब एक जैसी सोच वाले लोग हैं। हमने अंदरूनी रिजर्वेशन के लिए लड़ाई लड़ी। क्या हमें अपने मुद्दों पर बात नहीं करनी चाहिए?

सीएम बदलने को लेकर क्या बोले कांग्रेस नेता

जब उनसे पूछा गया कि अगर सीएम में बदलाव होता है तो क्या उनके नाम पर विचार किया जा सकता है, तो उन्होंने कहा- पहले वह स्थिति आने दीजिये। जो अभी तक नहीं आई है। मैं इस बारे में खुद जाकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से नहीं मिलूंगा। जब भी जरूरत होगी, मैं उनके पास जाऊंगा।

वहीं, सीएम सिद्धारमैया की खरगे से मुलाकात के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा- पार्टी या सरकार में कोई परेशानी नहीं है। आप सीएम के किसी के घर जाने को खबर क्यों बनाते हैं?

ढाई-ढाई साल का फार्मूला

बता दें कि कर्नाटक कांग्रेस के अंदर खेमे से अक्सर यह खबर सामने आती है कि 2023 में कर्नाटक चुनाव के बाद तय हुआ था कि सिद्धारमैया पहले 2.5 साल, इसके बाद शिवकुमार सीएम रहेंगे, लेकिन अब सिद्धारमैया पांचों साल पूरा करने पर अड़े हैं।

इस मुद्दे पर जवाब देते हुए गृह मंत्री ने कहा- सिद्धारमैया ने कभी नहीं कहा कि वह सिर्फ ढाई साल के लिए सीएम रहेंगे। बीच में कोई बदलाव होगा या नहीं, यह हाईकमान पर छोड़ दिया गया है। क्या हम खुद बदलाव ला सकते हैं? अगर ऐसी कोई सिचुएशन आती है, तो हाईकमान तय करेगा।