
कर्नाटक: कैसे एक कॉरीडोर बना कांग्रेस सरकार के खिलाफ हथियार? फोटो-ai
BMICP Project: कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के खिलाफ बीजेपी एक बड़े मुद्दे की तलाश में थी, जिसे हथियार बनाकर सरकार पर वार किया जा सके। बीजेपी की इस तलाश को उसके सहयोगी एच.डी. कुमारस्वामी ने खत्म कर दिया है। जनता दल (सेक्युलर) प्रमुख और केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर प्रोजेक्ट (BMICP) को लेकर सरकार पर हमलावर हैं। रविवार को प्रमुख राष्ट्रीय अखबारों के पहले पन्ने पर विज्ञापन देकर उन्होंने यह साफ कर दिया है कि वो कॉरिडोर के मुद्दे पर मुख्यमंत्री शिवकुमार की सरकार को चैन से नहीं बैठने देंगे और इससे बीजेपी का खुश होना लाजमी है।
इन विज्ञापनों में कर्नाटक हाई कोर्ट की हालिया टिप्पणियों का हवाला देते हुए राज्य सरकार से मांग की गई कि वह लंबे समय से अटके बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर प्रोजेक्ट (BMICP) को प्राइवेट कॉन्ट्रैक्टर से अपने हाथ में ले। पूरे पन्ने के इस विज्ञापन में मोटे अक्षरों में लिखा था, 'कर्नाटक राज्य के सबसे बड़े घोटालों में से एक'। साथ ही इसमें हाई कोर्ट की सभी टिप्पणियों और प्रोजेक्ट की मुख्य जानकारियों को भी शामिल किया गया। कुमारस्वामी का यह भी कहना है कि डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार, नंदी इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर एंटरप्राइज (NICE) द्वारा की जा रही गैर-कानूनी टोल वसूली को तुरंत रोके। बता दें कि NICE को ही इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का काम सौंपा गया था।
कुमारस्वामी का कहना है कि मैं सिर्फ JD(S) कार्यकर्ताओं से ही NICE के खिलाफ आवाज उठाने के लिए नहीं कह रहा हूं। कर्नाटक के टैक्सपेयर्स और आम जनता को भी इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। इतने बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ है। लोगों ने हमें गलत कामकाज पर सवाल उठाने के लिए ही चुना है। दरअसल, कुमारस्वामी चाहते हैं कि जनता भी इस विषय पर आवाज उठाए, विरोध-प्रदर्शन हों, ताकि सरकार के खिलाफ के व्यापक माहौल तैयार किया जा सके। यहां एक गौर करने वाली बात ये भी है कि NICE के प्रमुख और पूर्व विधायक अशोक खेनी का JD(S) के वरिष्ठ नेता एच.डी. देवेगौड़ा के साथ लंबे समय से विवाद रहा है। अब देवेगौड़ा के बेटे कुमारस्वामी एक तरह से उस विवाद की कीमत NICE प्रमुख से वसूलना चाहते हैं।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल में देवेगौड़ा ने बेंगलुरु और मैसूरु के दो सबसे बड़े शहरी केंद्रों को जोड़ने वाली सड़क के साथ ही एक नया बिज़नेस कॉरिडोर बनाने की योजना तैयार की थी। मौजूदा हाईवे (SH-17 और SH-86) संकरे थे और बड़े कस्बों से होकर गुज़रते थे। 20 नवंबर 1995 को, गौड़ा सरकार ने कॉरिडोर बनाने का आदेश पारित किया और इसके लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए 8,175 हेक्टेयर, यानी लगभग 20,193 एकड़ ज़मीन की ज़रूरत थी। इसके अलावा, 41 किलोमीटर लंबी पेरिफेरल रिंग रोड बनाने की भी योजना थी। यह अब बेंगलुरु के चारों ओर बनी एक ऑपरेशनल टोल रोड है। कॉरिडोर के साथ आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए 5 टाउनशिप विकसित बनाए जाने थे। इसमें कुल 70,100.96 हेक्टेयर का लोकल प्लानिंग एरिया शामिल था।
41 किलोमीटर लंबी ऑपरेशनल रिंग रोड या NICE रोड के अलावा, BMICP प्रोजेक्ट राजनीतिक विवादों और कानूनी पेचीदगियों में फंसा हुआ है, जिससे कामकाज लगभग ठप पड़ गया है। कुमारस्वामी का आरोप है कि BMICP के लिए MoU में मंज़ूर किए गए कुल 111 किलोमीटर में से अब तक केवल 5 किलोमीटर सड़क ही बनी है, जबकि इसके लिए जरूरी ज्यादातर जमीन का अधिग्रहण किया जा चुका है। इस प्रोजेक्ट में मंज़ूरशुदा सड़क को छह लेन तक बढ़ाने का भी प्रावधान था, जिसके तहत सड़क के दोनों तरफ 90 मीटर जमीन का अधिग्रहण किया जा सकता था। हालांकि, आरोप है कि अशोक खेनी ने मंज़ूरशुदा चौड़ाई से दोगुनी से अधिक भूमि हथिया ली और किसानों से उपजाऊ जमीन छीन ली, लेकिन उन्हें कोई मुआवज़ा नहीं दिया गया। JD(S) का यह आरोप भी है कि 554 एकड़ अतिरिक्त भूमि NICE को सौंपी गई है।
दो बार मुख्यमंत्री रह चुके कुमारस्वामी ने कहा कि 20 सालों से NICE रोड प्रोजेक्ट के लिए किसानों की जमीन बिना मुआवज़ा दिए ली जा रही है। जो लोग टेप से जमीन नापते हैं, उसे हड़पते हैं और किसानों को धोखा देते हैं, वे अब विकास की बात कर रहे हैं। विकास के नाम पर किसानों से जमीन ली गई, जबकि दो दशकों से गैर-कानूनी तौर पर टोल वसूला जा रहा है। यह कर्नाटक के इतिहास के सबसे बड़े घोटालों में से एक है।
साल 2000 की शुरुआत में इस प्रोजेक्ट के शुरू होने के बाद से ही, ऐसे आरोप लगते रहे हैं कि अशोक खेनी ने मंज़ूरी से ज्यादा जमीन हासिल की। बिदादी से मैसूर तक के इलाके को 'वोक्कालिगा बेल्ट' (Vokkaliga belt) कहा जाता है। वोक्कालिगा और किसान समुदाय वे दो मुख्य समूह हैं जिनसे JD(S) को अपनी अधिकांश राजनीतिक ताकत मिलती है। गौड़ा और खेनी के बीच रिश्ते काफी समय से खराब रहे और मामला एक ज़बरदस्त राजनीतिक लड़ाई में बदल गया, जिसे अब कुमारस्वामी आगे बढ़ा रहे हैं। JD(S) ने इस प्रोजेक्ट के खिलाफ अपने हमले तेज़ कर दिए हैं। यह हमला प्रस्तावित बिदादी टाउनशिप प्रोजेक्ट के विरुद्ध चल रहे संघर्ष का ही एक हिस्सा है, जो मुख्यमंत्री शिवकुमार का एक पसंदीदा प्रोजेक्ट है। इस तरह, कुमारस्वामी राज्य की कांग्रेस सरकार को बैकफुट पर धकेलना चाहते हैं।
यह आंदोलन कुमारस्वामी के लिए कमज़ोर पड़ती JD(S) को फिर से मज़बूत करने का एक मौका भी है, क्योंकि पार्टी की पहचान धुंधली पड़ती दिख रही है और उसकी सहयोगी पार्टी BJP उस पर हावी हो रही है। इस मामले में हाई कोर्ट ने भी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर प्रोजेक्ट (BMICP) को राज्य के सबसे बड़े घोटालों में से एक बताया है. इसके अलावा, कोर्ट ने NICE और कर्नाटक इंडस्ट्रियल एरियाज डेवलपमेंट (KIADB) की उन अपीलों को भी खारिज कर दिया है जिनमें किसानों के मुआवज़ा तय करने में हुई लंबी देरी के कारण ज़मीन अधिग्रहण रद्द करने के आदेश को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने साफ कहा है कि पहला आदेश सही था।
Updated on:
24 Aug 2026 04:22 pm
Published on:
24 Aug 2026 04:22 pm
