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कर्नाटक अब ‘बसवनाडु’ होगा! कौन थे बसवन्ना जिनके नाम पर राज्य का नाम रखने की उठी मांग?

karnataka will be Basavanadu: कर्नाटक का नाम बदलकर बसवनाडु करने की मांग उठने लगी है। बसवन्ना के नाम पर नया नाम रखा जा सकता है। बसवन्ना का कर्नाटक समाज में बहुत आदर का भाव है।

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M B Patil Minister Karnataka

भारत में पिछले कुछ सालों में शहर, जिले और सड़कों आदि के नाम बदले गए। इसे लेकर पक्ष और विपक्ष की पार्टियों के बीच घमासान भी मच जाती है। ऐसा ही एक नया मामला कर्नाटक का नाम बदलने को लेकर सामने आया। कर्नाटक का नाम बदलकर बसवनाडु किया जाएगा। कर्नाटक के मंत्री एम. बी. पाटिल ने शुक्रवार को कहा कि विजयपुरा जिले का नाम बदलकर 12वीं सदी के समाज सुधारक बसवेश्वर रखने की बात हो रही है। उन्होंने कहा कि मुझे इसमें कुछ भी गलत नहीं लग रहा है। अगर विजयपुरा जिले की बजाय पूरे राज्य कर्नाटक का नाम ही बदल दिया जाए और बसवनाडु कर दिया जाए तो कोई गलत बात नहीं होगी। गौरतलब है कि बसवनाडु का मतलब बसवों की भूमि होता है। पिछले दिनों राज्य के उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने रामनगर जिले का नाम बदलकर ‘बेंगलुरु दक्षिण’ करने का प्रस्ताव रखा था।

बसवन्ना ने ही दुनिया में पहले संसद की स्थापना की थी

केंद्र सरकार ने 2014 में कर्नाटक की राजधानी बेंगलोर का नाम बेंगलुरु करने समेत कर्नाटक के 12 शहरों के नाम बदलने की मंजूरी दी थी। इसी बदलाव के दौरान बीजापुर का नाम विजयपुरा कर दिया गया था। मंत्री ने कहा कि बसवन्ना ने ही दुनिया की पहली संसद ‘अनुभव मंतपा’ की स्थापना की थी और उन्होंने संसद की अवधारणा दी थी इसलिए हम कहते रहते हैं कि हमारी भूमि ‘बसव नाडु’ बननी चाहिए और हमें ‘बसव संस्कृति’ को अपनाना चाहिए। बसवन्ना 12वीं सदी के संत और कवि थे और उनका कन्नड़ समाज में बहुत आदर है।

बीजापुर अब होगा बसवेश्वर

मंत्री एम. बी. पाटिल विजयपुरा जिले की बबलेश्वर सीट से विधायक हैं। उन्होंने विस्तार से इस बारे में चर्चा करते हुए कहा कि दरअसल होयसल काल के दौरान इस क्षेत्र को विजयपुरा के नाम से जाना जाता था और फिर आदिल शाही वंश के शासन में यह बीजापुर बन गया। इसके बाद दोबारा इसका नाम बदलकर विजयपुरा कर दिया गया था। गौरतलब है कि होयसल प्राचीन दक्षिण भारत का एक राजवंश था। इसने दसवीं से चौदहवीं शताब्दी तक राज किया। अब एक बार फिर इसका नाम बदलने की मांग हो रही है। मुझे लगता है कि जिले का नाम बसवेश्वर कर दिया जाना चाहिए क्योंकि यह समाज सुधारक बसवन्ना की जन्मस्थली है। उन्होंने आगे यह कहा कि नाम बदलने से कुछ असुविधाएं होती हैं और जाहिर सी बात है कि यहां भी वो दिक्कते पेश आएंगी और कई जगहों पर नाम बदलने की प्रक्रिया चलानी होगी। मैं इस बारे में राज्य के मुख्यमंत्री से चर्चा करूंगा और सहमति बनने पर ही कुछ संभव हो पाएगा।

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