
कार्ति चिदंबरम(फोटो-IANS)
Karti Chidambaram On Delimitation: कांग्रेस सांसद कार्ति पी. चिदंबरम ने प्रस्तावित परिसीमन के तहत लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर मौजूदा सीटों में समान अनुपात में बढ़ोतरी की जाती है, तो दक्षिणी राज्यों और अधिक आबादी वाले उत्तरी राज्यों के बीच संसद में सीटों का संख्यात्मक अंतर और बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि संसद में केवल सीटों का अनुपात ही नहीं, बल्कि कुल संख्या भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
कार्ति चिदंबरम ने कहा कि 543 सदस्यों वाली मौजूदा लोकसभा में ही सांसदों को बहस में बोलने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। ऐसे में सदन की सदस्य संख्या बढ़ाने से संसदीय कामकाज अधिक प्रभावी होगा, यह जरूरी नहीं है।
कार्ति चिदंबरम ने अपनी बात समझाने के लिए तमिलनाडु, पुडुचेरी और उत्तर प्रदेश की मौजूदा लोकसभा सीटों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु और पुडुचेरी को मिलाकर लोकसभा में फिलहाल 40 सीटें हैं, जबकि उत्तर प्रदेश के पास 80 सीटें हैं।
उन्होंने कहा कि अगर लोकसभा सीटों में समान रूप से 50 फीसदी की बढ़ोतरी की जाए तो तमिलनाडु और पुडुचेरी की सीटें बढ़कर करीब 60 हो जाएंगी, जबकि उत्तर प्रदेश की सीटें 80 से बढ़कर 120 हो सकती हैं। इस स्थिति में दोनों के बीच सीटों का अनुपात भले ही समान रहे, लेकिन मौजूदा 40 सीटों का अंतर बढ़कर 60 हो जाएगा। कार्ति चिदंबरम ने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में यह संख्यात्मक अंतर भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई फैसलों में सदस्यों की कुल संख्या मायने रखती है।
कार्ति चिदंबरम की यह टिप्पणी तमिलनाडु में परिसीमन को लेकर चल रही राजनीतिक चर्चा के बीच आई है। शनिवार को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने चेन्नई में सांसदों की बैठक बुलाई थी। बैठक में प्रस्तावित परिसीमन के संभावित प्रभावों पर चर्चा की गई और राज्य के संसदीय प्रतिनिधित्व की रक्षा के लिए साझा रुख तैयार करने पर विचार हुआ।
तमिलनाडु में राजनीतिक दलों की चिंता है कि अगर लोकसभा सीटों का फिर से बंटवारा मुख्य रूप से आबादी के आधार पर किया गया, तो अधिक आबादी वाले उत्तरी राज्यों की संसद में हिस्सेदारी काफी बढ़ सकती है। इससे तमिलनाडु जैसे राज्यों का मौजूदा सापेक्ष राजनीतिक प्रभाव कम होने की आशंका जताई जा रही है।
दक्षिणी राज्यों का तर्क रहा है कि उन्होंने दशकों में जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं। ऐसे में जनसंख्या नियंत्रण में सफलता को संसद में भविष्य के सीट आवंटन का आधार बनाते समय ध्यान में रखा जाना चाहिए।
कार्ति चिदंबरम ने कहा कि केवल मौजूदा अनुपात को बनाए रखना इस चिंता का पूरा समाधान नहीं है। उनके मुताबिक, अगर अधिक आबादी वाले राज्यों की सीटों की संख्या ज्यादा बढ़ती है, तो संसद में उनके पास कुल सांसदों की संख्या का फायदा और बढ़ जाएगा।
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि मौजूदा 543 सदस्यीय लोकसभा में सांसदों को बोलने के लिए पहले से सीमित समय मिलता है। ऐसे में सदन का आकार बढ़ाने से सांसदों की भागीदारी और संसदीय बहस की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठ सकते हैं।
Updated on:
09 Aug 2026 09:59 pm
Published on:
09 Aug 2026 09:59 pm
