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CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए केरल विधानसभा में आज पेश होगा प्रस्ताव, चयन समिति में CJI को वापस लाने की भी मांग

SIR Controversy: केरल विधानसभा में सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग वाला प्रस्ताव पेश किया जाएगा। मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन इस प्रस्ताव को सदन में रखेंगे। प्रस्ताव में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाली समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल करने की मांग भी की गई है।
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gyanesh kumar

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Photo: IANS)

Kerala Assembly Resolution for CEC: केरल की 16वीं विधानसभा के दूसरे सत्र के पहले दिन सोमवार को राज्य सरकार केंद्र से मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने का आग्रह करने वाला प्रस्ताव पेश करेगी। इसके साथ ही, केरल विधानसभा देश की पहली ऐसी विधानसभा बन जाएगी जो मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग वाला औपचारिक प्रस्ताव पारित करेगी। विधानसभा बुलेटिन के अनुसार यह प्रस्ताव सदन में मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन द्वारा पेश किया जाएगा।

प्रस्ताव में क्या मांगें शामिल होंगी?

केरल विधानसभा में पेश किए जाने वाले प्रस्ताव में केवल मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की ही मांग नहीं है, बल्कि इसमें चुनावी प्रणाली की पारदर्शिता से जुड़ी दो अन्य महत्वपूर्ण मांगें भी रखी गई हैं। इसमें स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रोसेस में गड़बड़ियों को ठीक करने और उन सभी योग्य मतदाताओं के मताधिकार बहाल करने की बात कही गई है, जिनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे।

इसके अलावा, प्रस्ताव में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए जिम्मेदार उच्चस्तरीय चयन समिति के पुनर्गठन की मांग की गई है, जिसमें प्रधानमंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता के साथ-साथ भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को फिर से शामिल करने की वकालत की गई है।

निष्पक्षता और लोकतांत्रिक अधिकारों के उल्लंघन के आरोप

प्रस्ताव के मसौदे में कहा गया है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर गंभीर संदेह पैदा हुए हैं, जिससे संस्थान की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया शुरू करना आवश्यक हो गया है। प्रस्ताव में आरोप लगाया गया है कि तकनीकी हेरफेर और प्रशासनिक अनियमितताओं के माध्यम से अल्पसंख्यकों, प्रवासियों, हाशिए पर रहने वाले वर्गों और युवा मतदाताओं के मताधिकार को छीनना लोकतांत्रिक सिद्धांतों का उल्लंघन है।

प्रस्ताव में देश भर में लाखों पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने का उल्लेख किया गया है, लेकिन इसमें केरल के संबंध में ऐसा कोई आरोप नहीं लगाया गया है, जहां हाल ही में इसी प्रक्रिया के बाद चुनाव हुए थे।

विधानसभा में प्रस्ताव पास होना तय, विपक्ष का भी मिल सकता है समर्थन

140 सदस्यों वाली केरल विधानसभा में, सत्ताधारी कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के पास 102 सीटें हैं, जबकि मुख्य विपक्षी दल CPI(M) के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) के पास 35 विधायक हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सदन में तीन सदस्य हैं। चूंकि कांग्रेस और CPI(M) दोनों ही चुनाव आयोग के खिलाफ देशव्यापी अभियानों और विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से शामिल हैं, इसलिए उम्मीद है कि यह प्रस्ताव सदन में भारी बहुमत से पारित हो जाएगा।

गौरतलब है कि इससे पहले सितंबर 2025 में, तत्कालीन पिनाराई विजयन सरकार ने भी विधानसभा में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया था जिसमें देश भर में SIR को लागू करने का विरोध किया गया था।