
केरल के दिग्गज कांग्रेस नेता के. मुरलीधरन। ( फोटो: ANI )
Government Formation : केरल में सरकार के गठन को लेकर केरल में विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद अब नई सरकार के गठन की सुगबुगाहट सबसे तेज हो गई है। राज्य की जनता को अपने नए मुख्यमंत्री का बेसब्री से इंतजार है। इसी बीच, मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर कांग्रेस पार्टी में बैठकों और मंथन का लंबा दौर चल रहा है। इस पूरी सियासी गहमागहमी के बीच केरल के दिग्गज कांग्रेस नेता के. मुरलीधरन का एक बहुत अहम और बड़ा बयान सामने आया है, जिसने राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने साफ किया है कि अगले 48 घंटों के अंदर केरल के नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लग जाएगी।
के. मुरलीधरन ने तिरुअनंतपुरम में मीडिया से मुखातिब होते हुए इस पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी और लोकतांत्रिक बताया। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस एक पूर्ण रूप से लोकतांत्रिक पार्टी है। हम सरकार गठन और मुख्यमंत्री चयन में सभी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन कर रहे हैं। पार्टी का शीर्ष नेतृत्व न केवल नवनिर्वाचित विधायकों के साथ गहन विचार-विमर्श कर रहा है, बल्कि हमारे सभी गठबंधन सहयोगियों की राय भी उतनी ही तवज्जो के साथ सुनी जा रही है।' इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्षों के साथ भी जल्द एक अहम बैठक होनी है ताकि बिना किसी मनमुटाव के एक सर्वसम्मत और मजबूत फैसला लिया जा सके।
इस बयान का सबसे रोचक और अहम हिस्सा 'नई पीढ़ी' से जुड़ा हुआ था। मुरलीधरन ने खुद यह स्वीकार किया है कि केरल कांग्रेस में अब एक नई पीढ़ी कमान संभालने के लिए आगे आ रही है। जब भी सत्ता हस्तांतरण या मुख्यमंत्री पद के लिए नए और युवा चेहरे मैदान में आते हैं, तो पार्टी के भीतर स्वस्थ चर्चाएं, बहस और हल्के विवाद होना एक बेहद स्वाभाविक प्रक्रिया है। इसे पार्टी के भीतर की गुटबाजी नहीं, बल्कि विचारों का लोकतांत्रिक आदान-प्रदान माना जाना चाहिए।
राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो कांग्रेस इस बार केरल में कोई बड़ा प्रयोग कर सकती है। यदि किसी युवा चेहरे को राज्य की बागडोर सौंपी जाती है, तो यह पार्टी के भविष्य के लिए एक बड़ा संदेश होगा। फिलहाल, आलाकमान की नजरें सभी समीकरणों को साधने पर हैं। अगले 48 घंटे केरल की राजनीति के लिए बेहद रोमांचक होने वाले हैं, क्योंकि इन्हीं घंटों में यह तय होगा कि राज्य का ताज किसी अनुभवी दिग्गज के सिर सजेगा या फिर कांग्रेस की नई पीढ़ी इस जिम्मेदारी को अपने कंधों पर उठाएगी।
मुरलीधरन के इस बयान के बाद यूडीएफ के घटक दलों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया आ रही है, उनका कहना है कि कांग्रेस जितनी जल्दी स्थिति साफ करेगी, सरकार उतनी ही तेजी से काम शुरू कर पाएगी। वहीं, विपक्षी खेमे ने तंज कसते हुए कहा है कि सीएम की कुर्सी के लिए 'नई पीढ़ी' और 'वरिष्ठ नेताओं' के बीच कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है।
इस पूरी खबर का सबसे बड़ा पहलू 'पीढ़ियों का टकराव' है। क्या पार्टी के पुराने दिग्गज और अनुभवी नेता आसानी से किसी युवा नेता के नेतृत्व में काम करने को तैयार होंगे? यदि मुख्यमंत्री पद नई पीढ़ी को जाता है, तो पार्टी को संतुलन बनाए रखने के लिए पुराने और कद्दावर नेताओं को कैबिनेट में मलाईदार और अहम मंत्रालय देकर संतुष्ट करना होगा।
Published on:
11 May 2026 07:20 pm
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