
केरल में PM SHRI स्कीम के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान तनाव (इमेज सोर्स: अरीना इंडिया एक्स पोस्ट स्क्रीनशॉट)
PM Shri Protest Latest Update: केरल में PM SHRI योजना को लेकर सियासी विवाद गहरा गया है। केरल विधानसभा के बाहर इस योजना के विरोध में सीपीआई के छात्र और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन की अगुवाई CPI नेता और पूर्व मंत्री के राजन कर रहे थे। उनकी मांग थी कि राज्य सरकार, PM SHRI स्कीम को बाहर हटा दे। लागू न करे। विधानसभा के बाहर जोर-शोर से नारेबाजी भी हो रही थी। देखते ही देखते प्रदर्शन के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया। ऐसे में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया।
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बन गई। घटना के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई। CPI नेता और पूर्व मंत्री के राजन ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर गंदा पानी छोड़ा गया। सरकार को बताना चाहिए कि जब केरल में फैलने वाली बीमारियां फैल रही हैं तो पुलिस को इसकी इजाजत किसने दी?
केरल में PM SHRI योजना को लेकर बीते दिनों राज्य सरकार ने एक अहम फैसला लिया। पिछले हफ्ते यानी कि बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने कहा कि सरकार इस योजना पर आगे का रास्ता तलाश रही है। उन्होंने कहा कि राज्य अपनी शिक्षा नीति से समझौता नहीं करना चाहता।
मुख्यमंत्री के अनुसार, पिछली वामपंथी सरकार ने PM SHRI योजना के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसी कारण केरल इस योजना का हिस्सा बना। राज्य को केंद्र सरकार से आर्थिक सहायता भी मिल चुकी है। उन्होंने बताया कि अब तक करीब 99 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके अलावा केंद्र ने 106 करोड़ रुपये और मंजूर किए हैं।
सीएम सतीशन ने आगे कहा कि स्कूलों का चयन और पाठ्यक्रम तय करने का अधिकार राज्य सरकार के पास होना चाहिए। उनका मानना है कि केंद्र सरकार को इन मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। इस पूरे मामले का अध्ययन करने के लिए सरकार ने चार सदस्यीय मंत्रिस्तरीय उपसमिति बनाई है। यह समिति आगे की रणनीति तय करेगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि इस विषय पर गैर-भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से चर्चा की गई है। उद्देश्य एक साझा रुख तैयार करना है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने सार्वजनिक रूप से समझौते का विरोध किया था। लेकिन बाद में तत्कालीन मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री ने इस पर हस्ताक्षर कर दिए। उनका दावा है कि यह फैसला कैबिनेट को बताए बिना लिया गया था। सतीशन ने कहा कि चूंकि केरल पहले ही फंड ले चुका है, इसलिए राज्य अब योजना का हिस्सा है। अब चुनौती यह है कि बिना अपने अधिकारों से समझौता किए आगे कैसे बढ़ा जाए।
इसके अलावा सरकार ने प्रशासनिक सुधारों पर भी चर्चा की। वित्त विभाग में लंबित फाइलों को तेजी से निपटाने के लिए नए कदम उठाए जाएंगे। सरकार का पहला 100-दिवसीय कार्यक्रम 1 जुलाई से शुरू होगा।
Updated on:
22 Jun 2026 04:17 pm
Published on:
22 Jun 2026 03:29 pm
बड़ी खबरें
View Allराष्ट्रीय
ट्रेंडिंग
