अकाली दल के शीर्ष सूत्रों के अनुसार, सहमति बनने के बाद गुरुवार देर रात लगभग 11 बजे सुखबीर बादल को सीधे पीएमओ से फोन आया और उन्हें शुक्रवार को दिल्ली बुलाया गया। जिसके बाद सुखबीर बादल और पीएम मोदी के बीच बंद कमरे में अहम बातचीत हुई। सियासी जानकारों का मानना है कि यदि यह गठबंधन सिरे चढ़ता है, तो पंजाब में न केवल अकाली दल को संजीवनी मिलेगी, बल्कि भाजपा को भी सिख बहुल ग्रामीण इलाकों में अपनी पैठ दोबारा मजबूत करने का मौका मिलेगा।