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कोलकाता में डगमगाई ‘मेस्सी’ की 44 फुट प्रतिमा, सुरक्षा खतरे के बीच हटाने की तैयारी

kolkata Messi Statue: लियोनेल मेस्सी से प्रेरित कोलकाता के झील टाउन चौराहे पर लगी 44 फुट ऊंची प्रतिमा तेज हवाओं में हिलने लगी, जिससे सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई।
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कोलकाता

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Devika Chatraj

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Updated: 28 May 2026, 1:04 PM IST

kolkata messi statue

कोलकाता में लियोनेल मेस्सी की प्रतिमा डगमगाई (X)

Kolkata Messi Statue: कोलकाता के झील टाउन चौराहे पर स्थापित फुटबॉल खिलाड़ी लियोनेल मेस्सी (Lionel Messi) से प्रेरित विशाल प्रतिमा को संरचना में अस्थिरता की चिंताओं के बाद हटाया जा रहा है। निवासियों ने आरोप लगाया था कि प्रतिमा हाल ही तेज हवाओं में डगमगाने लगी थी, जिससे व्यस्त सड़क किनारे दुर्घटना का भय बढ़ गया। मंगलवार रात, अधिकारियों ने इसे हटाने की तैयारियां शुरू कीं और क्षेत्र में अस्थायी सुरक्षा उपाय किए।

प्रतिमा के हिलने का दावा

स्थानीय निवासियों के अनुसार, संरचना के नीचे की मिट्टी ढीली होने से अस्थिरता आ गई। कई लोगों ने दावा किया कि प्रतिमा अक्सर हिलती थी और निर्माण में उचित सुरक्षा उपाय नहीं अपनाए गए। सोमवार को हल्की हवा में भी संरचना डगमगाती दिखी, जिससे चिंताएं बढ़ीं। बाद में, मुख्य फ्रेम के कुछ ढीले पेंच लोक निर्माण विभाग के कर्मचारियों द्वारा ठीक किए गए।

रस्सियों से बांधी प्रतिमा

सुरक्षा चिंताओं के बाद, लोक निर्माण विभाग ने 44 फुट ऊंची प्रतिमा को अस्थायी एहतियाती उपाय के तौर पर मोटी नायलॉन की रस्सियों से बांध दिया। सड़क पर बैरिकेड्स और बांस की बैरिकेडिंग भी की गई। अधिकारियों द्वारा संरचना को स्थानांतरित किया जाएगा या पूरी तरह से हटाया जाएगा, इस संबंध में अंतिम निर्णय करने से पहले तकनीकी निरीक्षण करने की अपेक्षा है। अधिकारियों का मानना है कि इसे नुकसान पहुंचाए बिना हटाना चुनौतीपूर्ण होगा, जिसके लिए बड़ी क्रेन की आवश्यकता हो सकती है। प्रतिमा के आसपास का क्षेत्र भीड़भाड़ वाला होने के कारण सुरक्षित परिवहन और हटाने में लॉजिस्टिक चिंताएं हैं।

TMC को लेकर कही बड़ी बात

स्थानीय लोगों के मुताबिक, तेज हवा चलने पर मूर्ति हिलती है। कुछ लोगों का मानना है कि मेसी की मूर्ति टीएमसी सरकार के दौरान बनी थी। अब मूर्ति का हिलना टीएमसी सरकार के पतन को दिखा रहा है। इस पूरे मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के लंबे शासन को समाप्त करने के बाद इस मुद्दे को सरकार की कार्यशैली से जोड़ना शुरू कर दिया।

आलोचकों का कहना है कि यह मूर्ति दिखावे की राजनीति का एक प्रतीक है, जिसमें बड़े-बड़े प्रोजेक्ट तो शुरू होते हैं लेकिन उनकी बुनियादी मजबूती पर ध्यान नहीं दिया जाता। मेसी के भारत दौरे के दौरान भी अव्यवस्था की खबरें सामने आई थीं। साल्ट लेक स्टेडियम में भारी भीड़ उमड़ी थी, लेकिन खराब प्रबंधन और अत्यधिक वीआईपी संस्कृति के कारण आम फैंस अपने पसंदीदा खिलाड़ी की ठीक से झलक तक नहीं देख पाए। इससे नाराज होकर कई लोगों ने तोड़फोड़ की और स्टेडियम में अफरा-तफरी मच गई।