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अन्न के तत्वों का विशद ज्ञान था, ऐसे थे कुलिश जी: डॉ. विनय सोनी

सीनियर डॉक्टर विनय सोनी ने कुलिश जी की जन्मशती वर्ष पर उन्हें याद करते हुए पुरानी स्मृतियों को साझा किया है। डॉक्टर विनय सोनी ने बताया कि...

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जयपुर

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Vinay Shakya

Mar 21, 2026

Karpoor Chandra Kulish ji

File Photo- श्रद्धेय कर्पूर चन्द्र कुलिश जी

कर्पूर चंद्र कुलिश जन्मशती वर्ष: पत्रिका समूह के संस्थापक और पत्रकारिता के शिखर पुरुष कर्पूर चंद्र कुलिश की जन्मशती वर्ष की शुरुआत 20 मार्च 2025 से हो गई है। जन्मशती वर्ष पर निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी विशेष पहचान बनाने वाले कुलिश जी को याद किया जा रहा है।

टेबलेट को निगलने की बजाय चबा गए कुलिश जी

सीनियर डॉक्टर विनय सोनी ने कुलिश जी की जन्मशती वर्ष पर उन्हें याद करते हुए पुरानी स्मृतियों को साझा किया है। डॉक्टर विनय सोनी ने बताया कि कर्पूर चंद्र कुलिश ने मुझे अपने पारिवारिक चिकित्सक का सम्मान दिया। डॉक्टर ने कहा कि आज भी उनके परिवार से मेरा वैसा ही जुड़ाव है। चिकित्सक के नाते हमारी प्राथमिकता मरीज को दवाइयों से ठीक करने की होती है। कुलिश जी की सोच इसके ठीक विपरीत थी। एक समय जब मैंने उन्हें कोई टेबलेट खाने के लिए दी तो वे उसे निगलने के बजाय चबा गए। ऐसा करने की वजह यह थी कि इसके पहले उन्होंने कभी टेबलेट नहीं खाई थी। वह अस्पताल से दूरी बनाए रखते थे। स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत होने पर वह देसी उपचार को प्राथमिकता देते थे। अन्न के तात्विक स्वरूपों का उन्हें काफी अधिक ज्ञान था। डॉक्टर सोनी ने बताया की खान-पान के बारे में उनकी कुलिश जी से अक्सर चर्चा होती थी।

स्वास्थ्य खराब होने पर अस्पताल से दूर रहते, देसी उपचार को प्राथमिकता देते

सीनियर डॉक्टर विनय सोनी ने खान-पान के बारे में कुलिश जी से हुई चर्चा को याद किया। डॉक्टर सोनी ने कहा- कुलिश जी कहते थे कि अन्न से केवल हमारा शरीर नहीं बनता है, बल्कि बुद्धि और मन भी अन्न से बनते हैं। इसीलिए कहते हैं- जैसा खावें अन्न, वैसा बने मन। वे कहा करते थे कि खान-पान की वस्तुओं को कृत्रिम रूप देकर उनकी ताजगी खत्म करने का जो दौर चलने लगा है, उसी का नतीजा है कि मनुष्य कई रोगों से ग्रस्त होने लगा है। कुलिश जी की दृष्टि में सबसे मोटा सिद्धांत यही है कि जो पैदावार जिस स्थान पर हो, वहीं के भोजन के योग्य है और जिस ऋतु में जो पैदावार होती हो, वही भोजन के योग्य है। जो भोजन अच्छी तरह से पच जाए, वही भोजन है और जो न पचे, वह विष के समान है। डॉक्टर विनय सोनी ने बताया कि तमाम एहतियात के बावजूद सेहत को लेकर उन्हें कोई समस्या होती थी तो वह मुझे बुलावा भेज देते थे।

देसी उपचार पर भरोसा, मेडिकल जांच से किया इनकार

डॉक्टर विनय सोनी ने पत्रिका को बताया कि एक बार कुलिश जी को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत हुई तो मैंने उन्हें कुछ मेडिकल जांच कराने की सलाह दी। उन्होंने मेरी मेडिकल जांच की सलाह को नकार दिया और साफ कह दिया कि वे कोई इलाज नहीं लेने वाले हैं। इसके बाद वे अपने मित्र और तत्कालीन उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत के समझाने पर घर ही जांच कराने के लिए तैयार हो गए। मेडिकल जांच के बाद वे दवाई लेने के लिए तभी राजी हुए, जब उन्हें आश्वत किया गया कि उन्हें अस्पताल नहीं ले जाएंगे। उनका कहना था कि घर का माहौल मरीज को स्वास्थ्य लाभ देने में ज्यादा कारगर होता है। इसके अलावा देसी उपचार के प्रति उनका रुझान बहुत अधिक था।

डॉक्टर विनय सोनी ने बताया मजेदार किस्सा

सीनियर डॉक्टर विनय सोनी ने कुलिश जी के साथ पुरानी यादों के पिटारे से एक मजेदार बाकया शेयर किया है। डॉक्टर ने बताया कि वह पत्रिका में पाठकों की सेहत संबंधी समस्याओं से जुड़े सवालों का जवाब दिया करते थे। एक बार बालों में रूसी के उपचार के लिए पूछे गए सवाल का डॉक्टर ने अपने तरीके से जवाब दिया। इसके बाद कुलिश जी से मुलाकात हुई तो उन्होंने कहा- यह कोई बात हुई क्या? हम तो मुल्तानी मिट्टी लगाकर ही रूसी ठीक कर लिया करते थे। वे कहते भी थे कि मरीज को यथासंभव सस्ता और घरेलू उपचार बताना चाहिए। डॉ. विनय सोनी ने कहा कि मैं चिकित्सक के तौर पर शहर में लगने वाले रक्तदान एवं निःशुल्क चिकित्सा शिविरों में सेवाएं दिया करता था। कुलिश जी को जानकारी हुई तो खुश हुए और इस काम को जारी रखने की नसीहत देने के साथ-साथ शिविरों में होने वाले खर्च वहन करने की पेशकश भी की।

बच्चों से प्रेम और खुद उनके जैसा रहने की कला के धनी थे बाबूसा.

डॉक्टर सोनी ने बताया कि एक बार वह कुलिश जी को देखने उनके निवास पर गए तो उनके साथ 6 साल का बेटा भी था। डॉ. सोनी ने सोचा कि चेकअप करके जल्दी घर लौट जाऊंगा, इसलिए 6 साल के बेटे को कार के अंदर ही बिठा दिया। थोड़ी हुई तो बेटा अंदर ड्राइंग रूम में बैठा मिला। उसने बाबूसा. के फोटो की तरफ संकेत करते हुए कहा कि ये तो मेरे बाबा दोस्त हैं। वह जिद करने लगा कि बाबूसा. से मिलना है। बच्चे को जिद करता देख कुलिश जी खुद वहां आ गए और बेटे को खूब दुलारा। मैं समझ नहीं पाया कि मेरे बेटे की कुलिश जी से ऐसी पहचान कैसे हुई? बाद में पता चला कि दोनों की मुलाकात जय क्लब में होती थी। बड़ों में बड़े और बच्चों में बच्चा बनना ही उनका स्वभाव था। कुलिश जी बच्चों में बच्चा बनकर ही रहते थे।