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केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, लद्दाख में 5 नए जिलों को मंजूरी, जानिए क्या होगा बदलाव

Ladakh में प्रशासनिक सुधार के तहत 5 नए जिलों के गठन को मंजूरी दी गई है। इससे अब क्षेत्र में जिलों की संख्या बढ़कर 7 हो गई है और प्रशासन और मजबूत होगा।
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लेह

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Ankit Sai

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Updated: 27 Apr 2026, 7:22 PM IST

Ladakh new districts

लद्दाख में अब 5 नए जिले बनेगें फाइल फोटो-पत्रिका

Ladakh New Districts: लद्दाख में प्रशासनिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल ने पांच नए जिलों (New District) के गठन को मंजूरी दे दी है। लंबे समय से उठ रही मांग के बाद अब लद्दाख में नए जिले बनाए जाएगे। इस फैसले के बाद लद्दाख में कुल जिलों की संख्या बढ़कर 7 हो जाएगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे प्रशासनिक कामकाज आसान होगा और सरकारी योजनाओं का लाभ दूर-दराज के इलाकों तक बेहतर तरीके से पहुंच सकेगी। एलजी ने इसे जनता की जरूरत और भावनाओं के अनुरूप ऐतिहासिक निर्णय बताया है।

जानिए कौन-कौन से नए जिले बने

नए फैसले के तहत लद्दाख में जिन पांच जिलों का गठन किया जाएगा, उनमें नुब्रा, शाम, चांगथांग, जांस्कर और द्रास शामिल हैं। अब तक लद्दाख में केवल दो ही जिले थे, लेह और कारगिल। इस बदलाव के बाद प्रशासनिक नक्शा पूरी तरह बदल जाएगा और क्षेत्र को अधिक व्यवस्थित तरीके से चलाने में मदद मिलेगी।

लंबे समय से उठ रही मांग को मिली मंजूरी

लद्दाख के लोगों की यह मांग कई सालों से उठ रही थी कि क्षेत्र को छोटे-छोटे जिलों में बांटा जाए ताकि प्रशासन लोगों के करीब पहुंचे। अब इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए एलजी ने कहा कि यह लोगों की भावनाओं और जरूरतों के अनुरूप है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि पांच नए जिलों के गठन की अधिसूचना को मंजूरी दे दी गई है और यह जनता की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करता है।

भौगोलिक रूप से बड़ा लेकिन आबादी कम इलाका

लद्दाख भारत का सबसे बड़ा केंद्र शासित प्रदेश है, लेकिन यहां आबादी बहुत कम है। 2011 की जनगणना के अनुसार यहां लगभग 2.74 लाख लोग रहते हैं। यह इलाका 86,904 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और चीन तथा पाकिस्तान की सीमाओं से सटा हुआ है। ऐसे में प्रशासनिक चुनौतियां हमेशा से बड़ी रही हैं।

गांवों तक पहुंचेगी सरकार, बढ़ेगा विकास

एलजी सक्सेना ने कहा कि इस फैसले का मकसद शासन को गांवों और दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ प्रशासन आसान होगा, बल्कि लोगों को सरकारी सेवाएं भी तेजी से मिल सकेंगी। उनका कहना है कि नए जिलों के बनने से स्थानीय स्तर पर विकास की रफ्तार बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा फायदा

प्रशासन का मानना है कि जब जिले छोटे होंगे तो स्थानीय स्तर पर फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे। इससे छोटे व्यापार, पर्यटन और स्वरोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। विशेषकर लद्दाख जैसे दुर्गम इलाके में यह बदलाव लोगों के जीवन में बड़ा असर डाल सकता है। यह कदम केंद्र सरकार की उस बड़ी योजना का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें प्रशासन को ज्यादा प्रभावी और लोगों के करीब लाने की बात कही गई है। 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के बाद लद्दाख सीधे गृह मंत्रालय के प्रशासन में आ गया था। अब यह नया फैसला उसी प्रशासनिक ढांचे को और मजबूत करेगा।