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Red Fort Attack: लाल किला हमले के पीछे था अल-कायदा? UN की रिपोर्ट में बड़ा दावा, सामने आया कनेक्शन

UN Report on Red Fort Blast: लाल किले के पास नवंबर 2025 में हुए कार धमाके की परतें खुलने के साथ आतंक के बदलते नेटवर्क की तस्वीर सामने आ रही है। UN की निगरानी रिपोर्ट में दक्षिण एशिया में AQIS की गतिविधियों, बांग्लादेश में संभावित सेल और आतंकियों द्वारा नई तकनीक के इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई गई है।
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Red Fort Attack UN Report

Red Fort Attack UN Report :लाल किला हमले के पीछे था अल-कायदा? (फोटो सोर्स: ANI)

Lal Qila Blast Al Qaeda AQIS: दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के पास हुए भीषण कार धमाके की जांच अब एक नए और अहम मोड़ पर पहुंच गई है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ताजा निगरानी रिपोर्ट में इस हमले को अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) से जोड़ने की बात सामने आई है। खास बात यह है कि भारत की जांच एजेंसी NIA भी पहले ही हमले की कड़ियां AQIS के ऑफशूट अंसार गजवत-उल-हिंद (Ansar Ghazwat-ul-Hind) से जोड़ चुकी है। इससे मामले की अंतरराष्ट्रीय तस्वीर और गंभीर हो गई है।

UN रिपोर्ट ने क्या कहा?

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अल-कायदा और ISIS से जुड़े मामलों की निगरानी करने वाली टीम की ताजा रिपोर्ट ने दिल्ली के लाल किला क्षेत्र में हुए हमले को लेकर अहम टिप्पणी की है। 13 अगस्त 2026 को सामने आई रिपोर्ट की मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, नवंबर 2025 के हमले को AQIS से जोड़ा गया है।

यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि फरवरी 2026 में सामने आई पिछली UN रिपोर्ट में एक सदस्य देश की ओर से लाल किला हमले का संबंध जैश-ए-मोहम्मद से बताए जाने का जिक्र था। उसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि एक अन्य सदस्य देश जैश-ए-मोहम्मद को निष्क्रिय मानता है। यानी शुरुआती अंतरराष्ट्रीय आकलनों में हमले को लेकर तस्वीर पूरी तरह एक जैसी नहीं थी।

अब नई रिपोर्ट में AQIS का नाम सामने आने से जांच का वह पहलू और मजबूत हुआ है, जिसकी ओर भारतीय एजेंसियां पहले ही इशारा कर चुकी थीं।

Red Fort Attack: NIA की चार्जशीट से भी जुड़ता है AQIS कनेक्शन

भारत में इस मामले की जांच NIA कर रही है। एजेंसी ने 14 मई 2026 को लाल किला क्षेत्र कार बम विस्फोट मामले में 10 आरोपियों के खिलाफ करीब 7,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। NIA के अनुसार, सभी आरोपी अंसार गजवत-उल-हिंद यानी AGuH से जुड़े थे, जिसे AQIS का ऑफशूट बताया गया है।

NIA के मुताबिक, 10 नवंबर 2025 को हुए हाई-इंटेंसिटी वाहन-जनित IED विस्फोट में 11 लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे। जांच में देश के कई राज्यों और दिल्ली-NCR से जुड़े सबूत जुटाए गए। चार्जशीट में 588 गवाहों के बयान, 395 से अधिक दस्तावेज और 200 से ज्यादा जब्त सामग्री को जांच का हिस्सा बताया गया।

इसके बाद जून 2026 में NIA ने तीन और आरोपियों के खिलाफ पूरक चार्जशीट दाखिल की। इससे मामले में चार्जशीट किए गए आरोपियों की संख्या 13 हो गई। एजेंसी के अनुसार, इनमें से एक आरोपी Ansar Ghazwat-ul-Hind Interim के शुरुआती सदस्यों में शामिल था और कथित साजिश में अहम भूमिका निभाता था।

डॉक्टरों से लेकर तकनीकी नेटवर्क तक, जांच में क्या सामने आया?

इस केस की सबसे चौंकाने वाली कड़ी यह रही कि जांच में कई ऐसे लोगों के नाम सामने आए, जिनका पेशेवर बैकग्राउंड मेडिकल क्षेत्र से जुड़ा था। NIA ने आरोप लगाया कि कुछ आरोपी AQIS/Ansar Ghazwat-ul-Hind की विचारधारा से प्रभावित होकर कथित आतंकी साजिश में शामिल हुए।

जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया कि 2022 में श्रीनगर में एक गुप्त बैठक के दौरान Ansar Ghazwat-ul-Hind को दोबारा संगठित कर “AGuH Interim” बनाया गया था। NIA के मुताबिक, इसके बाद कथित तौर पर “Operation Heavenly Hind” नाम से गतिविधियां आगे बढ़ाई गईं।

यानी जांच सिर्फ एक धमाके तक सीमित नहीं रही, बल्कि एजेंसियों को एक ऐसे नेटवर्क के संकेत मिले जिसमें विचारधारा, भर्ती, तकनीकी सहायता, विस्फोटक तैयार करने और लॉजिस्टिक सपोर्ट जैसी अलग-अलग भूमिकाएं होने का आरोप है।

आतंक का नया चेहरा: छोटे सेल और बिखरे नेटवर्क

UN की ताजा रिपोर्ट का एक बड़ा संदेश सिर्फ लाल किला हमले तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट में AQIS के बदलते तौर-तरीकों को लेकर भी चिंता जताई गई है।

बड़े और आसानी से पहचाने जा सकने वाले आतंकी संगठनों की जगह छोटे-छोटे सेल और बिखरे नेटवर्क का इस्तेमाल सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती बन सकता है। ऐसे नेटवर्क में आदेश, फंडिंग और ऑपरेशनल गतिविधियां अलग-अलग स्तरों पर रखी जा सकती हैं, जिससे पूरे ढांचे को पहचानना मुश्किल हो जाता है।

रिपोर्ट में बांग्लादेश में AQIS के संभावित ऑपरेशनल सेल स्थापित करने की कोशिशों को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई है। दक्षिण एशिया में सीमापार आवाजाही और कमजोर कड़ियों के कारण किसी एक देश में मौजूद नेटवर्क का असर दूसरे देशों तक पहुंचने का खतरा बना रहता है।

पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा भी चिंता का केंद्र

UN की निगरानी रिपोर्ट में पाकिस्तान-अफगानिस्तान क्षेत्र में सक्रिय आतंकी नेटवर्कों और वहां बदलते सुरक्षा समीकरणों पर भी नजर रखने की जरूरत बताई गई है।