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‘क्या अब प्रेस कॉन्फ्रेंस की तरह चलेगा सदन?’ लिखित सवालों की शर्त पर अमित शाह पर भड़के रामगोपाल यादव

सपा सांसद रामगोपाल यादव ने गृह मंत्री अमित शाह के लिखित सवालों के सुझाव पर सवाल उठाते हुए कहा कि संसद को प्रेस कॉन्फ्रेंस की तरह नहीं चलाया जा सकता। उन्होंने इसे स्थापित संसदीय परंपराओं के खिलाफ बताया।
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भारत

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kamlesh sharma

Aug 13, 2026

ram gopal yadav

Ram Gopal Yadav (Photo ANI)

नई दिल्ली। संसद में जारी गतिरोध के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 'लिखित सवालों' वाले सुझाव पर राजनीति गरमा गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद रामगोपाल यादव ने गृह मंत्री के इस प्रस्ताव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब देश की संसद को भी प्रेस कॉन्फ्रेंस की तर्ज पर चलाने की तैयारी की जा रही है?

मीडिया से बातचीत करते हुए रामगोपाल यादव ने कहा कि गृह मंत्री का यह कहना कि सवाल पहले स्पीकर को लिखित में दिए जाएं और फिर वह जवाब देंगे, पूरी तरह से स्थापित परंपराओं के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि संसद में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। स्थापित परंपरा और नियम यह रहे हैं कि मंत्री वक्तव्य देते हैं और सभी दलों के सांसद एक तय समय सीमा के भीतर उस पर स्पष्टीकरण मांगते हैं। सवाल पहले से लिखकर देने की व्यवस्था प्रेस कॉन्फ्रेंस में होती है, संसद में नहीं।

असंवैधानिक तरीके से पास कराए जा रहे बिल

रामगोपाल यादव ने कहा कि विपक्ष ऐसी किसी भी नई शर्त को स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने चालू मॉनसून सत्र का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार की हठधर्मिता के चलते भारी हंगामे के बीच कई अहम विधेयकों को जबरन पास कराया गया है। नियमों के मुताबिक इस तरह से पास किए गए बिल संवैधानिक नहीं माने जा सकते।

शिवपाल सिंह यादव द्वारा आजम खान से मुलाकात और उन्हें भविष्य की सरकार में जेल मंत्री बनाने के सुझाव पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए रामगोपाल ने कहा कि यह उनके लिए बहुत छोटा पद है। वह हमेशा इससे काफी बड़े और महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री रहे हैं।

अमित शाह ने दिया था चर्चा का प्रस्ताव

दरअसल, गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि सरकार संसद में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। शाह ने विपक्ष से कहा था कि वे दोपहर तक स्पीकर को पत्र सौंपें, ताकि सदन में बिना किसी रुकावट के लगातार चर्चा कराई जा सके और वे खुद देर रात तक बैठकर सभी सवालों का जवाब देने को तैयार हैं। हालांकि, विपक्ष इसे संसदीय नियमों से इतर अपनी शर्त थोपने का प्रयास बता रहा है।