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Lok Sabha Election 2024 : विकास की बाट जोह रहा आदिवासियों के भगवान का गांव

Lok Sabha Election 2024 : झारखंड आवा यानी धरती के भगवान बिरसा मुंडा की भूमि है। विपुल खनिज संपदा वाले इस प्रदेश में उद्योग-धंधे भी कम नहीं हैं। फिर भी स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिल पाता।

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Lok Sabha Election 2024

Lok Sabha Election 2024

- देवेंद्र गोस्‍वामी
Lok Sabha Election 2024 : झारखंड की आबादी का आधा हिस्सा आदिवासियों का है। इसीलिए इस प्रदेश की सियासत आदिवासियों से जुड़े मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमती रहती है। झारखंड में अब तक रघुवर दास को छोड़कर सभी मुख्यमंत्री आदिवासी वर्ग से ही हुए हैं। विपुल खनिज संपदा वाले इस प्रदेश में उद्योग-धंधे भी कम नहीं हैं। फिर भी स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिल पाता। राजनीति अस्थिरता का आलम यह है कि प्रदेश में 23 साल में ही दस मुख्यमंत्री रह चुके और दो बार यहां राष्ट्रपति शासन लगाने की नौबत आ गई। झारखंड आवा यानी धरती के भगवान बिरसा मुंडा की भूमि है। आदिवासियों की स्थिति और झारखंड के ताजा राजनीतिक हालात जानने के लिए मैं रांची से 40 किलोमीटर दूर खूंटी पहुंचा। यहां से 30 किलोमीटर दूर उलिहातू गांव है, जहां बिरसा मुंडा का जन्म हुआ था। पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी यहां आए थे। राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु का भी दो बार दौरा हो चुका है। गांव में एक सुंदर परिसर आया, जहां बोर्ड पर लिखा था- भगवान बिरसा मुंडा की जन्म स्थली। गेट पर ताला लगा था। स्थानीय लोग मेरी मंशा भांपकर सुखराम मुंडा के घर ले गए। अस्सी वर्षीय सुखराम बिरसा मुंडा परिवार की चौथी पीढ़ी के सदस्य हैं। उन्होंने बताया कि दो बेटों को चतुर्थ श्रेणी की नौकरी मिली है। यहीं लाइब्रेरी के बाहर गौरा पूर्ति बताने लगी, राशन के अलावा सरकार से कुछ नहीं मिलता। पति नहीं रहे। उन्हें सरकारी स्तर पर कोई पेंशन नहीं मिल रही। पक्का मकान तो दूर की बात है। इलाज की सुविधा नहीं है। वहां से गुजर रहे उमूलन पूर्ति कहने लगे कि यहां सबसे अधिक समस्या पानी की है। सरकारी नौकरियों में अवसरों के बारे में उनका कहना था कि गांव में आज तक बिरसा मुंडा के परिवार के दो सदस्यों को छोड़कर कोई अन्य सरकारी सेवा में नहीं हैं।

पलायन कर रहे युवा

सरकारी नौकरी पाना यहां के आदिवासी युवाओं के लिए टेढ़ी खीर है। बड़ी संख्या में यहां के युवा रोजगार की तलाश में चेन्नई, बेंगलूरु, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, गुजरात व दिल्ली तक जाते हैं। सरकारी नियुक्तियों में भ्रष्टाचार के आरोप भी लगते रहे हैं। लोक सेवा आयोग तक में भर्ती के मामलों में भ्रष्टाचार के कई मामले कोर्ट में चल रहे हैं। ऐसे में यहां के युवाओं में आक्रोश नजर आता है।

समस्याओं की भरमार, जिम्मेदारों की अनदेखी

गांव के प्रधान से विकास कार्यों को लेकर बात की तो वे मायूसी से बताने लगे- पहले गांव की स्थिति देखकर अंदाजा लगा लीजिए। घरों के सामने नल है, लेकिन उनमें पानी नहीं आता है। जब वीवीआइपी मूवमेंट होता है, तब ही नलों में पानी आता है। ज्यादातर मुख्यमंत्री आदिवासी समुदाय से होने के बावजूद बिरसा मुंडा के गांव के हालत देखकर ऐसा नहीं लगता कि आदिवासियों के लिए कोई बेहतर काम यहां हुआ हो।

सरना कोड व डी-लिस्टिंग अहम मुद्दा

झारखंड में लोकसभा की 14 सीटें हैं, जिनमें से 5 आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित हैं। इन पांच के अलावा भी अन्य सीटों पर आदिवासी चुनाव नतीजों को प्रभावित करते हैं। खूंटी में राजेश्वर गुप्ता ने बताया कि आदिवासी लगातार सरना कोड लागू करने की मांग कर रहे हैं। दूसरा मुद्दा है डी-लिस्टिंग का। इन दोनों मुद्दों को समझने के लिए मैं झारखंड उलगुलान संघ के संयोजक एलेस्टर बोदरा से मिला। उन्होंने बताया कि राज्य की आधी आबादी आदिवासी वर्ग की है। जनगणना में हर धर्म का कोड है, उसी तरह आदिवासी वर्ग के लिए सरना कोड का प्रावधान होना चाहिए। इससे धार्मिक पलायन नहीं होगा। अपने धर्म के अनुसार आदिवासी काम कर पाएंगे। वहीं डी-लिस्टिंग का मतलब समझाते हुए कहा, कोई आदिवासी दूसरे धर्म में चला जाए तो उसे आदिवासी वर्ग से बाहर कर दिया जाए।

भ्रष्टाचार को मुद्दा बना रही भाजपा

खूंटी के लव चौधरी का कहना है कि प्रदेश में कोई विशेष मुद्दा नहीं है। भाजपा पीएम नरेंद्र मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ रही है। वह झारखंड मुक्ति मोर्चा गठबंधन सरकार के भ्रष्टाचार और परिवारवाद को मुद्दा बनाने में जुटी है। पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को फरवरी माह में ईडी ने गिरफ्तार किया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा इसे मुद्दा बनाकर आदिवासियों के बीच जा रहा है। यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि राज्य सरकार को केन्द्र के इशारे पर बेबुनियाद आरोप लगाकर अस्थिर करने की साजिश रची जा रही है। पार्टी का मानना है कि उसे लोकसभा चुनाव में आदिवासी वर्ग की सहानुभूति मिल सकती है।

कांग्रेस की एकमात्र सांसद भाजपा में

भाजपा ने 14 सीटों में से 11 के लिए प्रत्याशी की घोषणा कर दी है। इनमें से एक सीट गिरीडीह आजसू के खाते में है। पिछले महीने कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुई पार्टी की इकलौती सांसद गीता कोड़ा को भाजपा ने सिंहभूमि से उम्मीदवार घोषित किया है। वह पूर्व सीएम मधु कोड़ा की पत्नी हैं।

लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजे
कुल सीटें 14
बीजेपी - 11 सीट
आजसू - 1 सीट
झारखंड मुक्ति मोर्चा - 1 सीट
- झारखंड में 23 साल में 10 मुख्‍यमंत्री और दो बार राष्‍ट्रपति शासन
- राज्‍य में अभी भी सबसे बड़ी समस्‍या पानी की


विधानसभा चुनाव 2019 की स्थिति
कुल सीटें 81
झामुमो - 30 सीट
कांग्रेस - 16 सीट
राजद - 1 सीट
बीजेपी - 25 सीट
झाविमो - 3 सीट
आजसू - 2 सीट
सीपीआई - 0 सीट
एनसीपी - 1 सीट
निर्देलीय - 2 सीट

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