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सौरमंडल का जादू: इस हफ्ते एक कतार में दिखेंगे बुध, मंगल, शनि और नेपच्यून

इस हफ्ते सौरमंडल के चार प्रमुख ग्रह एक कतार में दिखाई देंगे। कब दिखाई देगा यह दुर्लभ नज़ारा? आइए जानते हैं।

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भारत

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Tanay Mishra

Apr 14, 2026

Planets

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आसमान में इस हफ्ते बहुत सुंदर खगोलीय घटना होगी। सौरमंडल के चार प्रमुख ग्रह बुध (मरकरी), मंगल (मार्स), शनि (सैटर्न) और नेपच्यून एक कतार में नज़र आएंगे, जिसे खगोलविद 'प्लैनेटरी अलाइनमेंट' कहते हैं। 16 से 23 अप्रैल के बीच ब्रह्मांड में यह दुर्लभ नज़ारा दिखाई देगा, जिसे भारत से भी देखा जा सकेगा। सबसे खास दिन 20 अप्रैल होगा, जब शनि, मंगल और बुध इतने करीब होंगे कि आप अपनी तीन अंगुलियों से इन तीनों को एक साथ ढक सकेंगे। दक्षिण भारत के शहर भूमध्य रेखा के करीब होने के कारण यह खगोलीय चमत्कार ज़्यादा अच्छी तरह देख पाएंगे। वहीं 18 अप्रैल की शाम सूर्यास्त के ठीक बाद शाम लगभग 7:30 बजे पश्चिम दिशा में चमकीले शुक्र (वीनस) ग्रह के बिलकुल बगल में सुंदर अर्धचंद्राकार चंद्रमा दिखेगा।

भारत में कब और कहाँ दिखेगा?

प्रकृति के इस अजूबे को पूर्व दिशा में देखने का सबसे अच्छा समय स्थानीय सूर्योदय से लगभग 30 मिनट पहले, यानी सुबह 5:00 से 5:50 बजे के बीच होगा। ग्रहों की यह परेड बेंगलूरु, हैदराबाद, चेन्नई और कोच्चि जैसे शहरों में दिल्ली, लखनऊ या चंडीगढ़ जैसे उत्तरी शहरों की तुलना में ज़्यादा अच्छी दिखेगी।

क्या होता है 'प्लैनेटरी अलाइनमेंट'?

वास्तव में ग्रह एक-दूसरे से करोड़ों किलोमीटर दूर होते हैं, लेकिन पृथ्वी से देखने पर वो आसमान के एक ही हिस्से में गुच्छे की तरह दिखाई देते हैं। सौरमंडल के सभी ग्रह सूर्य के चारों ओर एक ही समतल पर चक्कर लगाते हैं। जब कई ग्रह सूर्य की एक ही दिशा में आ जाते हैं, तो धरती से वे पास-पास नजर आते हैं और एक कतार में दिखते हैं। इसे ही 'प्लैनेटरी अलाइनमेंट' कहा जाता है।

कैसे दिखेंगे ग्रह?

बुध, मंगल और शनि को नग्न आंखों से साफ तौर पर देखा जा सकेगा। हालांकि नेपच्यून काफी धुंधला होने के कारण सिर्फ दूरबीन से ही दिखाई देगा। ग्रहों को देखते समय ध्यान रखें कि वो तारों की तरह टिमटिमाते नहीं हैं बल्कि उनकी रोशनी स्थिर रहती है। बुध सबसे चमकीला दिखेगा, सूरज के पास होने के कारण इसे देखने में मशक्कत करनी पड़ सकती है। पीले रंग वाला शनि क्षितिज के पास सुबह की रोशनी में जल्दी ओझल हो सकता है। मंगल हल्का लाल दिखेगा जबकि नेप्यून के लिए दूरबीन या टेलीस्कोप जरूरी है।