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वेदासंदूर: ‘किंगमेकर’ नहीं, तमिलनाडु के सत्ता के रुझान का सटीक बैरोमीटर

Tamilnadu Elections: वेदासंदूर सीट एक बार फिर चर्चा में है। यहां जीतने वाली पार्टी अक्सर सरकार भी बनाती रही है।

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स्टालिन सरकार vs AIADMK

Tamilnadu Elections 2026: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में वेदासंदूर सीट एक बार फिर चर्चा में है। इस सीट को ‘किंगमेकर’ कहना पूरी तरह तथ्यात्मक नहीं है, हालांकि उपलब्ध चुनावी रिकॉर्ड के अनुसार, 1971 के बाद से यह सीट राज्य के सत्ता रुझान का एक मजबूत संकेतक जरूर रही है, जहां जीतने वाली पार्टी अक्सर सरकार भी बनाती रही है।

1971 के बाद बना स्पष्ट ट्रेंड

1971 में डीएमके के पी. मुथुसामी की जीत के साथ यह पैटर्न उभरना शुरू हुआ। 1977 से 1984 के बीच एआइएडीएमके के एस.एम. वासन और वी.पी. बालासुब्रमण्यम की जीत उस दौर में पार्टी की सत्ता के साथ मेल खाती है, जब एम.जी. रामचंद्रन मुख्यमंत्री थे। 1989 में डीएमके की वापसी के साथ मुथुसामी ने फिर सीट जीती। 1991 से 2001 के बीच यह सीट डीएमके और एआइएडीएमके के बीच बदलती रही, लेकिन हर बार वही दल सत्ता में आया जिसने यहां जीत दर्ज की।

2006: अपवाद, पर ट्रेंड कायम

2006 में कांग्रेस के एम. धनदापानी जीते, जबकि डीएमके ने सहयोगियों के साथ सरकार बनाई। यह एक अपवाद था, लेकिन व्यापक गठबंधन समीकरणों के कारण सत्ता का रुझान उसी खेमे में रहा।

हाल के चुनावों में भी पैटर्न बरकरार

2011 और 2016 में एआइएडीएमके के एस. पलानीचामी और वीपीबी परमासिवम की जीत पार्टी की सरकार से मेल खाती है। 2021 में डीएमके के एस. गांधिराजन की जीत के साथ पार्टी की सत्ता में वापसी हुई।

‘तटस्थ मतदाता’ अहम कारक

पूर्व विधायक वीपीबी परमासिवम के अनुसार, वेदासंदूर का मतदाता अपेक्षाकृत तटस्थ और राजनीतिक रूप से जागरूक है, जो राज्य के व्यापक जनमत को प्रतिबिंबित करता है।

2026 में क्या संकेत?

इस बार मुकाबला डीएमके और एआइएडीएमके के बीच सीधा है। डीएमके सरकार अपने कामकाज और कल्याणकारी योजनाओं पर भरोसा जता रही है, जबकि एआइएडीएमके एंटी-इंकंबेंसी और स्थानीय मुद्दों को उठा रही है।

स्पष्ट है कि वेदासंदूर कोई ‘किंगमेकर’ नहीं, बल्कि तमिलनाडु की सत्ता की दिशा का एक विश्वसनीय संकेतक है — और 2026 में भी इसका परिणाम व्यापक जनादेश का रुख बताने में अहम भूमिका निभा सकता है।