
मानसून में सामान्य से कम होगी बारिश (Photo-IANS)
IMD Monsoon Update: पिछले दो वर्ष से सामान्य से ज्यादा भिगोना वाला दक्षिणी पश्चिमी मानसून इस बार सामान्य से कमजोर रह सकता है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आइएमडी) के अनुसार इस बार देश में करीब 80 सेंटीमीटर वर्षा हो सकती है, जबकि 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर देश में औसत बारिश 87 सेंटीमीटर मानी जाती है।
आइएमडी प्रमुख मृत्युंजय मोहपात्रा ने पूर्वानुमान जारी करते हुए कहा, जून से सितंबर के बीच होने वाली कुल मानसूनी बारिश दीर्घकालीन औसत (एलपीए) का करीब 92 प्रतिशत यानी सामान्य से कम रहने का अनुमान है। एलपीए के 90-95 प्रतिशत के बीच वर्षा को सामान्य से कम माना जाता है। चिंताजनक बात ये है कि 2018 के बाद यह सबसे कम है। 2018 में सामान्य के मुकाबले 91 प्रतिशत बारिश हुई थी। इससे पहले निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट ने भी 94 फीसदी बारिश का पूर्वानुमान बताया था।
आइएमडी ने इसके लिए अल नीनो इफेक्ट को जिम्मेदार माना है। जिसके कारण न केवल प्रचंड गर्मी पड़ेगी बल्कि बारिश भी कम होगी। विभाग ने बताया कि अप्रैल से जून 2026 के बीच अल नीनो की तटस्थ स्थितियां रहने की सबसे संभावना है। इसके बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान अल नीनो की मजबूत स्थितियों के आसार हैं। इसी के कारण कमजोर मानसून की आशंका ज्यादा हैं।
मोहपात्रा का कहना है कि अप्रैल से जून तक स्थिति सामान्य रहेगी, लेकिन इसके बाद मानसून के दौरान अल नीनो का प्रभाव इसे कमजोर करेगा। कम वर्षा कृषि और अर्थव्यव्यवस्था के लिए चिंता पैदा करने वाली है। हालांकि मौसम विभाग मई के आखिरी सप्ताह में मानसून की वर्षा के वितरण का अपडेट पूर्वानुमान जारी करता है।
पिछले साल मानसून तय समय से 8 दिन पहले यानी 24 मई को ही केरल पहुंच गया था। मानसून केरल से आगे बढ़ते हुए महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में आमतौर पर मध्य जून तक पहुंचता है। 11 जून तक मुंबई और 8 जुलाई तक पूरे देश में फैल जाता है। इसकी वापसी उत्तर-पश्चिम भारत से 17 सितंबर को शुरू होती है और यह पूरी तरह 15 अक्टूबर तक लौट जाता है। पिछली बार पूर्वानुमान 105 प्रतिशत वर्षा का था, जबकि 108 प्रतिशत हुई।
देश में कुल बारिश का करीब 75 फीसदी हिस्सा मानसून में में पूरा होता है। कम बारिश से न केवल खरीफ की फसलों का रकबा कम होगा, बल्कि जलाशयों में पानी की कम उपलब्धता के कारण रबी की फसल का भी रकबा प्रभावित होता है। जिससे खद्यान्न उत्पादन प्रभावित होता है। चूंकि देश की अर्थव्यवस्था मुख्यत: कृषि पर आधारित है, इसलिए अर्थव्यवस्था पर प्रभाव दिखेगा।
ज्यादा बारिश वाले क्षेत्र: पूर्वोत्तर भारत, उत्तर-पश्चिम के कुछ हिस्से और दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से अधिक वर्षा हो सकती है।
कम बारिश वाले क्षेत्र: देश के अधिकांश हिस्सों, खासकर मध्य भारत और मैदानी इलाकों में बारिश सामान्य से कम रहने की आशंका है।
आठ साल में सिर्फ दो बार अनुमान से कम हुई बारिश
| साल | अनुमान | कितने प्रतिशत बारिश हुई |
| 2018 | 97 प्रतिशत (सामान्य) | 91 प्रतिशत |
| 2019 | 96 प्रतिशत (सामान्य) | 110 प्रतिशत |
| 2020 | 100 प्रतिशत (सामान्य) | 109 प्रतिशत |
| 2021 | 98 प्रतिशत (सामान्य) | 99 प्रतिशत |
| 2022 | 99 प्रतिशत (सामान्य) | 106 प्रतिशत |
| 2023 | 96 प्रतिशत (सामान्य) | 94.4 प्रतिशत |
| 2024 | 106 प्रतिशत (सामान्य से ज्यादा) | 108 प्रतिशत |
| 2025 | 105 प्रतिशत (सामान्य से ज्यादा) | 108 प्रतिशत |
Published on:
14 Apr 2026 06:34 am
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