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महिलाओं में बेरोजगारी दर बढ़ी, 58 फीसदी श्रमिकों का वेतन 20,000 रुपए से कम, पढ़िए पूरी रिपोर्ट

hiring platform WorkIndia: भारत के कारखानों या अन्य श्रम प्रधान नौकरियों काम कर रहे ज्यादातर ब्लू-कॉलर वर्कर्स का वेतन 20,000 रुपए प्रति माह या इससे कम है।

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Report by hiring platform WorkIndia: भारत के कारखानों या अन्य श्रम प्रधान नौकरियों काम कर रहे ज्यादातर ब्लू-कॉलर वर्कर्स का वेतन 20,000 रुपए प्रति माह या इससे कम है। हायरिंग प्लेटफॉर्म वर्कइंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, 57.63 प्रतिशत श्रमिकों का मासिक वेतन 20,000 रुपए है। ये श्रमिक वित्तीय तनाव, आवास, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वहीं 29.34 प्रतिशत ब्लू-कॉलर वर्कर्स का वेतन 20,000-40,000 रुपए प्रति माह है। वहीं वुमन एंड मैन इन इंडिया, 2023 रिपोर्ट के मुताबिक, देश की अधिकतर महिलाएं एग्रीकल्चर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में काम करती हैं, जहां उन्हें पुरुषों के मुकाबले कम वेतन मिलता है।

वित्त वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही (अप्रेल-जून) में शहरी इलाकों में नियमित वेतन पर काम करने वाली महिलाओं की संख्या 203-24 की मार्च तिमाही के मुकाबले बढ़ी है। पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (पीएलएफएस) के जून तिमाही के आंकड़ों के मुताबिक, कुल कामकाजी महिलाओं में नियमित वेतन पर काम करने वाली महिलाओं की हिस्सेदारी मार्च तिमाही के 52.3 प्रतिशत से बढक़र 54 प्रतिशत हो गई। हालांकि, कामकाजी के साथ नौकरियों की तलाश करने वाली महिलाओं की संख्या मार्च तिमाही के मुकाबले घटी है।

केवल 23 प्रतिशत महिलाएं कामकाजी

मार्च तिमाही में महिलाओं की श्रम बल में हिस्सेदारी दर (एलएफपीआर) बढक़र 25.6 प्रतिशत पर पहुंच गई थी जो जून तिमाही में घटकर 25.2 प्रतिशत पर आ गई। देश के शहरी क्षेत्रों में 15 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों में बेरोजगारी दर जून तिमाही में घटकर 6.6 प्रतिशत रही, हालांकि महिलाओं के बीच बेरोजगारी दर 8.5 प्रतिशत से बढक़र 9 प्रतिशत हो गई और पुरुषों की बेरोजगारी दर 6.1 प्रतिशत से घटकर 5.8 प्रतिशत पर आ गई। कामकाजी जनसंख्या अनुपात में भी महिलाओं की हिस्सेदारी घटी है। महिलाओं की कुल आबादी में केवल 23 प्रतिशत कामकाजी हैं, जिनकी संख्या मार्च तिमाही में 23.4 प्रतिशत थी। वहीं पुरुषों की संख्या 69.8 प्रतिशत से बढक़र 70.4 प्रतिशत हो गई है।

दिहाड़ी मजदूरों की सैलरी में अंतर
क्षेत्र महिलाएं पुरुष
ग्रामीण 287 रुपए 416 रुपए
शहरी 333 रुपए 515 रुपए
(प्रति दिन मिलने वाली औसत मजदूरी)

ब्लू-कॉलर जॉब्स में सैलरी
मासिक वेतन(रुपए) कर्मियों की संख्या
20 हजार तक ५७.६३ प्रतिशत
20 से 40 हजार २९.३४ प्रतिशत
40 हजार से ज्यादा १३.०३ प्रतिशत

जेंडर गैप: कहां मिला है रोजगार
सेक्टर ग्रामीण इलाके शहरी क्षेत्र
पुरुष महिलाएं पुरुष महिलाएं
एग्रीकल्चर 49.1 76.2 4.7 11.7
कंस्ट्रक्शन 19.0 4.2 12.6 3.1
ट्रेड-होटल 10.5 4.1 26.5 15.2
ट्रांसपोर्ट-स्टोरेज 5.3 0.2 13.2 5.5
मैन्युफैक्चरिंग 8.2 8.3 20.5 23.9
अन्य सेवाएं 7.9 7.0 22.5 40.6
(सभी आंकड़े फीसदी में)

पुरुषों में घटी, महिलाओं में बढ़ी बेरोजगारी
तिमाही पुरुष महिला
जून, 2024 5.9 प्रतिशत 9.1 प्रतिशत
सितंबर तिमाही 6.0 प्रतिशत 8.6 प्रतिशत
दिसंबर तिमाही 5.8 प्रतिशत 8.6 प्रतिशत
मार्च, 2024 6.1 प्रतिशत 8.5 प्रतिशत
जून तिमाही 5.8 प्रतिशत 9.0 प्रतिशत
(बेरोजगारी की दर)

श्रमबल में भी घटी महिलाएं, पुरुष बढ़े
तिमाही पुरुष महिला
जून, 2024 73.5 प्रतिशत 23.2 प्रतिशत
सितंबर तिमाही 73.8 प्रतिशत 24 प्रतिशत
दिसंबर तिमाही 74.1 प्रतिशत 25 प्रतिशत
मार्च, 2024 74.4 प्रतिशत 25.6 प्रतिशत
जून तिमाही 74.7 प्रतिशत 25.2 प्रतिशत
(एलपीएफआर: लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट यानी काम कर रहे या काम तलाश रहे लोगों की संख्या)

कुल आबादी में इतने लोग कामकाजी
तिमाही पुरुष महिला
जून, 2024 69.2 प्रतिशत 21.1 प्रतिशत
सितंबर तिमाही 69.4 प्रतिशत 21.9 प्रतिशत
दिसंबर तिमाही 69.8 प्रतिशत 22.9 प्रतिशत
मार्च, 2024 69.8 प्रतिशत 23.4 प्रतिशत
जून तिमाही 70.4 प्रतिशत 23 प्रतिशत

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