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क्या कश्मीर में खत्म हो रही अलगाववादी राजनीति? मीरवाइज उमर फार्रूक ने X एक्स हैंडल से हटाया ‘हुर्रियत चेयरमैन’ पदनाम

मीरवाइज उमर फारूक ने अपने X हैंडल से हुर्रियत कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष पदनाम हटा दिया है। क्या है हुर्रियत जानिए...

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मीरवाइज उमर फारूक, हुर्रियत नेता (फोटोःX)

कश्मीर घाटी के प्रमुख धर्मगुरु और अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक ने अपने X हैंडल से 'अध्यक्ष सर्वदलीय हुर्रियत सम्मेलन' का पदनाम हटा दिया। मीरवाइज के बायो में अब उनका नाम और लोकेशन कश्मीर की जानकाीर है। मीरवाइज को X पर 2 लाख लोग फोलो करते हैं। एक्स हैंडल से 'हुर्रियत चेयरमैन' का हटना अब चर्चा की वजह बन गई है।

क्या है हुर्रियत कॉन्फ्रेंस?

साल 1993 में गठित सर्वदलीय हुर्रियत सम्मेलन जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी समूहों का एक समूह था। इसके व्यापक प्रभाव थे। जो बड़े पैमाने पर बंद और राजनीतिक लामबंदी का काम करता था। इसका मुख्य उद्देश्य कश्मीर विवाद में स्वतंत्रता या आत्मनिर्णय की मांग को राजनीतिक रूप से उठाना था। यह संगठन कश्मीर को विवादित क्षेत्र मानता है और भारत के नियंत्रण को अस्वीकार करता है।हुर्रियत ने बंद, प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर मुद्दे को उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2003 में आंतरिक मतभेदों के कारण यह दो धड़ों में बंट गया। मीरवाइज उमर फारूक के नेतृत्व वाला नरमपंथी और सैयद अली शाह गिलानी का कट्टरपंथी धड़ा।

साल 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के बाद केंद्र सरकार ने हुर्रियत के अधिकांश घटक संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया है। तब से हुर्रियत के कई नेताओं ने सार्वजनिक गतिविधियों से पूरी तरह किनारा कर लिया है।

मीरवाइज ने की नई दिल्ली के साथ रिश्ते सुधारने की बात

बीते कुछ समय में हुर्रियत नेता मीरवाइज उमर फारूक ने नई दिल्ली के साथ अपने रिश्ते सुधारने की कोशिश की है। अगस्त महीने में उन्होंने कहा कि नई दिल्ली को कश्मीर के साथ बातचीत करके दिलों के बीच की दूरी खत्म करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य की समस्याओं का समाधान हिंसा के जरिए नहीं किया जा सकता।