29 अगस्त 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

MMDR Bill विवाद: धर्मेंद्र प्रधान ने नवीन पटनायक को लिखा जवाब, DMF और माइनिंग राजस्व का दिया हिसाब

MMDR Bill विवाद में धर्मेंद्र प्रधान ने नवीन पटनायक के पत्र का जवाब दिया है। प्रधान ने ओडिशा के माइनिंग राजस्व, DMF और नए कानून से राज्य को होने वाले फायदे का हिसाब दिया।
3 min read
Google source verification

भारत

image

Rahul Yadav

Aug 29, 2026

MMDR Amendment Bill 2026, Dharmendra Pradhan, Naveen Patnaik, Odisha mining revenue, MMDR Bill Odisha, Odisha mining news, BJP Odisha, BJD Odisha, Odisha politics, Mines and Minerals Amendment Bill,

धर्मेंद्र प्रधान (फोटो - आईएएनएस)

Dharmendra Pradhan on MMDR Amendment Bill 2026: बीजेपी सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने ओडिशा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और बीजू जनता दल (BJD) अध्यक्ष नवीन पटनायक के पत्र का जवाब दिया है। पटनायक ने ओडिशा के बीजेपी सांसदों से हाल ही में संसद से पारित माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026 का विरोध करने और इसे वापस लेने की मांग करने का आग्रह किया था।

प्रधान ने अपने जवाब में पटनायक के उन दावों को खारिज किया है जिनमें नए कानून से ओडिशा को राजस्व का बड़ा नुकसान होने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि यह दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है। प्रधान ने अपने पत्र में ओडिशा को माइनिंग से होने वाली आय और डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन के जरिए राज्य में हो रहे कामों का भी जिक्र किया।

माइनिंग सेक्टर की 90 फीसदी आय राज्यों को मिलेगी

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि नए कानून के तहत माइनिंग सेक्टर से होने वाली कुल आय का करीब 90 फीसदी हिस्सा सीधे राज्यों को मिलता रहेगा। उन्होंने कहा कि ओडिशा को नीलामी प्रीमियम, रॉयल्टी और DMF से मिलने वाला राजस्व भी मिलता रहेगा।

प्रधान के मुताबिक, ओडिशा को नीलामी प्रीमियम के रूप में 110 फीसदी, रॉयल्टी के रूप में 15 फीसदी और DMF कलेक्शन से भी राजस्व मिलता है। उन्होंने कहा कि इसलिए यह कहना सही नहीं है कि नए कानून से ओडिशा के राजस्व को बड़ा नुकसान होगा।

मोदी सरकार के दौरान माइनिंग राजस्व बढ़ने का दावा

प्रधान ने अपने पत्र में ओडिशा के माइनिंग राजस्व का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले राज्य का सालाना माइनिंग राजस्व करीब 5,000 करोड़ रुपये था।

प्रधान के मुताबिक, 2015 में एमएमडीआर एक्ट में किए गए बदलावों के बाद अनिवार्य और पारदर्शी ई-नीलामी शुरू हुई। एड-वेलोरम रॉयल्टी को भी 10 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी किया गया। उन्होंने दावा किया कि इन बदलावों के बाद ओडिशा का माइनिंग राजस्व करीब पांच गुना बढ़कर लगभग 50,000 करोड़ रुपये सालाना हो गया।

DMF के जरिए 37,000 करोड़ रुपये से ज्यादा जुटाने का दावा

प्रधान ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से 2015 में बनाए गए DMF फ्रेमवर्क के तहत ओडिशा के खनन प्रभावित जिलों में स्थानीय विकास के लिए 37,000 करोड़ रुपये से ज्यादा जुटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस रकम का इस्तेमाल स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण सड़कों जैसी सुविधाओं के लिए किया जा रहा है।

अतिरिक्त टैक्स को लेकर भी पटनायक के दावे पर जवाब

प्रधान ने कहा कि मिनरल-बेयरिंग जमीन पर कई स्तर के अतिरिक्त टैक्स लगाने से ओडिशा के औद्योगिक ढांचे पर असर पड़ सकता था। उन्होंने कहा कि इसका प्रभाव स्टील, सीमेंट, बिजली और कोयला जैसे क्षेत्रों पर पड़ता। प्रधान के मुताबिक, एमएमडीआर अमेंडमेंट एक्ट की धारा 9D बहुस्तरीय टैक्सेशन पर सीमा तय करती है। इससे राज्य के मूल राजस्व को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

CAG रिपोर्ट का हवाला देकर पटनायक सरकार पर निशाना

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पत्र में CAG रिपोर्ट का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि नवीन पटनायक सरकार के कार्यकाल में DMF फंड के इस्तेमाल को लेकर कई अनियमितताएं सामने आई थीं। प्रधान के मुताबिक, 976 गैर-प्रभावित गांवों में 983 करोड़ रुपये खर्च किए गए। वहीं 584 सीधे प्रभावित गांवों में किसी परियोजना के लिए फंड नहीं मिला। उन्होंने यह भी दावा किया कि 1,730 परियोजनाएं ग्राम सभाओं को दरकिनार कर लागू की गईं।

पटनायक के 24 साल के शासन का भी जिक्र

प्रधान ने अपने पत्र में नवीन पटनायक के 24 साल के शासन का जिक्र करते हुए ओडिशा ग्रामीण बुनियादी ढांचा और सामाजिक-आर्थिक विकास अधिनियम, 2004 का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि उड़ीसा हाई कोर्ट ने 2005 में इस कानून को रद्द कर दिया था। इसके बावजूद पटनायक सरकार ने करीब 18 साल तक इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में जारी रखा। प्रधान ने आरोप लगाया कि इस दौरान कानून की खामियों को दूर करने के लिए विधानसभा में कोई वैध कानून नहीं लाया गया।

पटनायक ने बताया था ‘ओडिशा के लिए काला दिन’

इससे पहले नवीन पटनायक ने 29 अगस्त को ओडिशा के बीजेपी सांसदों को पत्र लिखा था। उन्होंने संसद से 13 अगस्त को पारित एमएमडीआर अमेंडमेंट बिल को ओडिशा के लिए ‘काला दिन’ बताया था। पटनायक ने दावा किया था कि कानून से राज्य को हर साल 12,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो सकता है। उन्होंने बीजेपी सांसदों से संशोधनों को चुनौती देने और उन्हें वापस लेने की मांग की थी।

पटनायक ने यह भी कहा था कि ओडिशा देश की करीब 44 फीसदी खनिज संपदा रखता है। राज्य ने दशकों से अपनी खनिज संपदा के जरिए देश के स्टील, बिजली, माइनिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के विकास में योगदान दिया है।

इसके जवाब में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि ओडिशा के बीजेपी सांसदों ने राज्य और जनता के हित में एमएमडीआर अमेंडमेंट बिल का समर्थन किया है। उन्होंने पटनायक से पार्टी की राजनीति से ऊपर उठकर कानून के प्रावधानों को देखने की अपील की है।

बड़ी खबरें

View All

राष्ट्रीय

ट्रेंडिंग