
RSS Mohan Bhagwat (Photo: IANS)
Mohan Bhagwat Speech: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर मुंबई के नेहरू सेंटर ऑडिटोरियम, वर्ली में दो दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला ‘संघ की 100 साल की यात्रा: नए क्षितिज’ का भव्य शुभारंभ शनिवार को हुआ। आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने पहले दिन आमंत्रित श्रोताओं को संबोधित किया, जिसमें संगठन की विचारधारा, समाज एकीकरण और भारत के भविष्य पर गहन विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम में बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की उपस्थिति ने विशेष ध्यान आकर्षित किया। सलमान खान ब्लू शर्ट और ब्लैक गॉगल्स में पहुंचे और डॉ. भागवत के भाषण को बड़े ध्यान से सुना। उनके साथ फिल्मकार सुभाष घई और गीतकार प्रसून जोशी भी मौजूद थे। डॉ. भागवत ने सलमान का उदाहरण देते हुए कहा कि सिनेमा में सलमान जो पहनते हैं, कॉलेज के छात्र वही कॉपी करते हैं, लेकिन बिना किसी तर्क के। समाज फैशन से प्रभावित होता है, इसलिए फैशन बनाने वाले श्रेष्ठ और विश्वसनीय माने जाते हैं।
डॉ. भागवत ने कहा, फिर से गुलामी नहीं आएगी, इसकी गारंटी हमारी एकता से ही है। उन्होंने आरएसएस के उद्देश्य को स्पष्ट किया कि संघ का काम संपूर्ण समाज को संगठित करना है, न कि कोई अलग संगठन खड़ा करना। उन्होंने जोर दिया कि यह काम समय लेने वाला है और कार्यकर्ताओं के पास अन्य कामों की फुर्सत नहीं रहती। हमारे कार्यकर्ताओं के घर जाकर पूछें तो माताएं-बहनें कहेंगी कि इन्हें घर के काम के लिए भी समय नहीं मिलता।
भागवत ने कहा कि बहुत लोग कहते हैं नरेंद्र मोदी आरएसएस के हैं। वे प्रधानमंत्री हैं, उनकी पार्टी भाजपा है, जो अलग है। उसमें कई स्वयंसेवक हैं और प्रभावी भी, लेकिन संघ की नहीं है। संघ ने तय किया है कि पूरे समाज को संगठित करने के अलावा कोई अन्य काम नहीं करेगा।
उन्होंने हिंदू समाज को परिभाषित करते हुए कहा, भारत में हिंदू ही हैं। हिंदू कोई विशिष्ट समुदाय या धर्म नहीं, बल्कि जीवन पद्धति है। देश में चार प्रकार के हिंदू हैं- जो गर्व से कहते हैं 'हम हिंदू हैं', जो स्वीकार करते हैं, जो धीरे से बोलते हैं और जो भूल गए हैं।
डॉ. भागवत ने कहा कि संघ उद्धार करने के लिए नहीं, बल्कि स्वयं उद्धार का संदेश देने के लिए है। धर्मनिरपेक्षता गलत शब्द है, पंथनिरपेक्षता सही है। भारत का सनातन स्वभाव नहीं बदलता। उन्होंने गुरु नानक देव का उल्लेख कर हिंदू शब्द की उत्पत्ति पर भी प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में सुभाष घई, हेमा मालिनी, अनुराधा पौडवाल, कुमार मंगलम बिड़ला, आशीष चौहान, नीलेश शाह, विपुल शाह, रमेश तौरानी, प्रसाद ओक, भाऊ कदम, सुनील बर्वे और पारसी धर्मगुरु दस्तूर खुर्शीद दस्तूर सहित कई हस्तियां शामिल हुईं। सभी ने डॉ. भागवत के विचारों की सराहना की और आरएसएस को राष्ट्रहित में समाज जोड़ने वाला संगठन बताया।
Updated on:
07 Feb 2026 09:01 pm
Published on:
07 Feb 2026 08:55 pm
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