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मानसून की तबाही: हिमाचल में 49 लोगों की तलाश के लिए बचाव अभियान फिर से शुरू हुआ

Monsoon mayhem: हिमाचल प्रदेश में बादल फटने और भारी बारिश के कारण बड़े पैमाने पर भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ के बाद लापता हुए 49 लोगों की तलाश के दूसरे दिन फिर से शुरू हो गई है।

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Monsoon mayhem: हिमाचल प्रदेश में बादल फटने और भारी बारिश के कारण बड़े पैमाने पर भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ के बाद लापता हुए 49 लोगों की तलाश के लिए बचावकर्मियों ने शुक्रवार को दूसरे दिन तलाशी अभियान फिर से शुरू कर दिया। मूसलाधार बारिश के कारण भीषण बाढ़ आई है, जिसमें छह पुल, 20 घर और छह दुकानें बह गईं, जिसके कारण अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है। 36 घंटे से अधिक समय से जारी आपदा के बाद लापता लोगों के बचने की संभावना कम होती जा रही है, इसलिए मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।

सबसे ज्यादा शिमला में हुआ नुकसान

सबसे अधिक नुकसान शिमला जिले में हुआ, जहां रामपुर तहसील के झाकरी में एक जलविद्युत परियोजना के पास स्थित समेज गांव में अचानक आई बाढ़ में 33 लोग और 20 घर बह गए, जिससे पूरा इलाका पूरी तरह तबाह हो गया। यह गांव कुल्लू जिले की सीमा पर स्थित है। राज्य सरकार के एक प्रवक्ता के अनुसार, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू बादल फटने से हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए सड़क मार्ग से रामपुर क्षेत्र का दौरा करेंगे।

सीएम सुखविंदर सिंह करेंगे प्रभावित क्षेत्रों का दौरा

सरकारी प्रवक्ता का कहना है कि खराब मौसम के कारण मुख्यमंत्री गुरुवार को आपदा प्रभावित क्षेत्रों में नहीं जा सके। उन्होंने कहा कि आज सुबह भी मौसम ने मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर को शिमला से उड़ान भरने की अनुमति नहीं दी। इसलिए उन्होंने सड़क मार्ग से रामपुर जाने का फैसला किया है। घटनास्थल पर बचाव अभियान की निगरानी कर रहे शिमला के उपायुक्त अनुपम कश्यप ने फोन पर बताया कि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), आईटीबीपी और होमगार्ड की टीमें तलाशी अभियान में शामिल हैं।

एक साल में दूसरी बड़ी तबाही

बचाव दल गुरुवार को दो घंटे की चढ़ाई के बाद आपदा प्रभावित गांव पहुंचे, क्योंकि संपर्क मार्ग बह गया था। घरों के अलावा एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बहुमंजिला इमारत और एक प्राथमिक विद्यालय की इमारत भी बह गई है। राज्य के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, शिमला के अलावा कुल्लू और मंडी जिलों में भी भारी बारिश के कारण नुकसान हुआ है। एक साल से भी कम समय में हिमालयी राज्य में बादल फटने से यह दूसरी बड़ी तबाही है। पुलिस टीम ने एनडीआरएफ, अग्निशमन एवं बचाव तथा स्थानीय लोगों की सहायता से गुरुवार को कुल्लू जिले के मलाणा बांध स्थल पर फंसे 22 लोगों को रस्सी के सहारे बचाया, क्योंकि जलस्तर कम हो गया था। अचानक आई बाढ़ में बांध भी क्षतिग्रस्त हो गया।

लापता लोगों के लिए तलाशी अभियान जारी

कुल्लू में निरमंड तहसील के जौन गांव में एक और बादल फटने की घटना हुई, जहां नौ लोग अभी भी लापता हैं और बचाव अभियान जारी है। इस आपदा में एक व्यक्ति की मौत हो गई। 14 एनडीआरएफ की एक टीम ने घटनास्थल से 10 किलोमीटर दूर सड़क अवरोध के कारण ट्रेकिंग के बाद कुल्लू के मणिकरण के जरी में बचाव अभियान शुरू किया। एक अन्य आपदा प्रभावित मंडी जिले के पधर तहसील का टिक्कर थालू कोट गांव है, जहां तीन लोगों की मौत की खबर है।

पीएम मोदी और अमित शाह ने सीएम सुखू से की बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने गुरुवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू को फोन कर राज्य के हालात की जानकारी ली। गुरुवार को स्थिति की समीक्षा के लिए यहां आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करने के बाद सीएम सुखू ने मीडिया से कहा, राहत और बचाव कार्यों के लिए केंद्र द्वारा राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की दो अतिरिक्त बटालियनें तैनात की गई हैं। सीएम ने कहा कि भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए हाई अलर्ट पर रहने का अनुरोध किया गया है।

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