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नरवणे इफेक्ट के बाद रिटायर्ड अधिकारियों पर सख्ती के संकेत, जानें क्यों नहीं प्रकाशित हुई पूर्व सेना प्रमुख की किताब?

पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' पर मचे विवाद के बाद केंद्र सरकार सख्त। रिटायर्ड अधिकारियों के लिए किताब लिखने से पहले 20 साल के 'कूलिंग-ऑफ' पीरियड और कड़े नियमों पर विचार कर रही है कैबिनेट।
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भारत

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Satya Brat Tripathi

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Updated: 14 Feb 2026, 11:57 AM IST

Manoj Mukund Naravane

Former Army Chief General MM Naravane ((File Photo/ANI)

सरकार वरिष्ठ पदों पर रहे अधिकारियों की सेवानिवृत्ति (रिटायर्ड) के बाद किताबें लिखने के लिए कड़े नियम लागू करने पर विचार कर रही है। यह विचार संसद में पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवाने की अप्रकाशित किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ (Four Stars of Destiny) के विवाद के बाद आया है।

मामले पर शीर्ष अधिकारियों ने शुक्रवार को कहा कि केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में कई मंत्रियों ने कहा कि जो लोग सत्ता में बड़े पद पर रहे हैं, उन्हें किताब लिखने से पहले इंतजार करना चाहिए। कई मंत्रियों का मानना था कि ऐसे लोगों के लिए, जिन्होंने उच्च पद संभाले हैं, किताब लिखने से पहले सेवानिवृत्ति के बाद 20 साल की कूलिंग-ऑफ अवधि होना आवश्यक है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस संबंध में जल्द ही आधिकारिक आदेश जारी किया जा सकता है। खास बात यह है कि यह मुद्दा आधिकारिक तौर पर 27-बिंदु एजेंडा में शामिल नहीं था, बल्कि सामान्य चर्चा के दौरान उठा।

केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में एक और मुद्दा हाल ही में अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से जारी विवादित जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी फाइलों को लेकर भी चर्चा में आया। मंत्रियों ने इस मामले में सरकार के रुख को बनाए रखने और विपक्ष द्वारा लगातार लगाए जा रहे आरोपों पर प्रतिक्रिया न देने की राय दी।

क्यों नहीं प्रकाशित हुई नरवणे की किताब?

नरवणे की किताब के प्रकाशित नहीं होने के पीछे आर्मी रूल्स 1954 और ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट 1923 है। 72 साल पुराना ये कानून सेवानिवृत्त अधिकारियों पर सीधे तौर पर लागू नहीं होते, लेकिन 2021 के पेंशन नियम संशोधन और ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट 1923 पाबंदिया लगाता है।

यानी सेवानिवृत्त कर्मचारी संस्था से जुड़े विषय पर कुछ भी प्रकाशित करना चाहता है तो उसे पहले आवश्यक अनुमति लेनी होती है। इसे नहीं मानने पर सेवानिवृत्त कर्मचारी की पेशंन रोकी जा सकता है। पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की किताब में रणनीतिक फैसलों का जिक्र है। इसकी वजह से रक्षा मंत्रालय ने इसे समीक्षा के अधीन रखा गया है।

'अप्रकाशित किताब' पर संसद में हंगामा

पूर्व सेना प्रमुख नरवाने की अप्रकाशित किताब पर विवाद तब शुरू हुआ, जब राहुल गांधी ने संसद में इसे दिखाने की कोशिश की। बाद में उन्होंने संसद में किताब की एक प्रति भी लाकर यह साबित करने की कोशिश की कि किताब अस्तित्व में है। इसके तुरंत बाद किताब की PDF सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गई।

संसद में सियासी हंगामे के बाद, दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। इसके बाद Penguin Random House India ने कहा कि किताब की कोई भी अवैध प्रति फैलाना कानून का उल्लंघन है।

संसद के बजट सत्र के दौरान सियासी विवाद के बीच पूर्व सेना प्रमुख नरवाने ने अपनी चुप्पी तोड़ी और कहा कि किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है और कोई भी प्रतियां जनता के लिए उपलब्ध नहीं कराई गई हैं।