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PM नरेंद्र मोदी के उद्घाटन के हफ्तों बाद टूटी सड़क, NHAI का नया फरमान, अब IIT-NIT से होंगी ऑडिट

एक्सप्रेसवे में गड्ढे आने के बाद NHAI ने नई गाइडलाइन जारी की। अब बड़ी सड़कों का IIT-NIT से ऑडिट, जानें पूरी डिटेल।
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Delhi Dehradun Expressway details

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का शुभारंभ (Photo: IANS/File)

NHAI audit norms: कुछ समय से मोदी सरकार एकसाथ कई मुद्दों पर घिरती हुई नजर आ रही है। उन्हीं में से एक है उद्घाटन होने के कुछ ही दिन बाद एक्सप्रेस-वे व हाईवे का जर्जर हो जाना। पहले दिल्ली-देहरादून और अब लखनऊ कानपुर एक्सप्रेस वे की जर्जर तस्वीर सामने आने से मोदी सरकार की किरकिरी हुई। इसके बाद नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने बड़ा फैसला लिया है।

शर्मिंदगी से सबक लेते हुए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने शुक्रवार को एक नई पॉलिसी सर्कुलर जारी की है, जिसमें सड़कों की गुणवत्ता जांचने और उद्घाटन कार्यक्रमों के इंतजाम को लेकर कड़े नियम बनाए गए हैं।

अब हर बड़ी सड़क का होगा थर्ड पार्टी ऑडिट

नए नियमों के मुताबिक, ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, हाई-स्पीड कॉरिडोर और 2,500 करोड़ रुपये से ज्यादा लागत वाले प्रोजेक्ट अब किसी स्वतंत्र संस्था से ऑडिट कराए जा सकते हैं। इसके लिए IIT और NIT जैसे संस्थानों को शामिल किया जा सकता है। ये ऑडिट टीमें सड़क खुलने के बाद ट्रैफिक पर पड़ने वाले असर, पानी की निकासी और इससे जुड़ी दूसरी दिक्कतों की जांच करेंगी।

छह महीने तक चलेगी हफ्तावार निगरानी

नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने यह भी तय किया है कि नई खुली सड़कों की जांच सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहेगी, ब्लकि जमीन प होगी। NHAI ने बताया कि ठेकेदार और सुपरविजन कंसल्टेंट की टीम को शुरुआती तीन महीने हर हफ्ते और अगले तीन महीने पंद्रह दिन में एक बार सड़क का निरीक्षण करना होगा। इसमें सड़क की सतह, पानी निकासी, सुरक्षा उपकरण और किनारों की ढलान जैसी चीजें देखी जाएंगी। इसके अलावा गश्ती वाहन भी लगातार पूरे रूट पर चक्कर लगाएंगे और अगर कहीं खराबी दिखे तो उसकी जीपीएस लोकेशन के साथ तुरंत रिपोर्ट प्रोजेक्ट डायरेक्टर तक भेजी जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स पर भी रहेगी पैनी नजर

दिलचस्प बात यह है कि NHAI ने अपनी मीडिया टीमों को भी सतर्क कर दिया है। सर्कुलर में साफ कहा गया है कि उद्घाटन जैसे कार्यक्रमों के बाद अखबारों और डिजिटल मीडिया में छपी खबरों पर नजर रखी जाए। अगर कोई रिपोर्ट विभाग को गलत या राजनीति से प्रेरित लगती है, तो क्षेत्रीय दफ्तरों के साथ मिलकर तुरंत जवाब या काउंटर नैरेटिव तैयार किया जाए। यह नया आदेश अक्टूबर 2025 में जारी हुए पुराने सर्कुलर की जगह लेगा।

बड़े कार्यक्रमों के लिए भी सख्ती

प्रधानमंत्री जिन बड़े कार्यक्रमों में शामिल होते हैं, वहां 25 हजार से लेकर एक लाख तक लोग जुट सकते हैं। ऐसे में नई गाइडलाइन में वेन्यू की क्षमता, पार्किंग, कनेक्टिविटी, सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और खराब मौसम से निपटने के इंतजाम पहले से पुख्ता रखने को कहा गया है। सर्कुलर में यह भी लिखा है कि कार्यक्रम में अधिकारियों की संख्या ज्यादा से ज्यादा 500 तक सीमित रखी जाए और सारी तैयारियां कार्यक्रम से कम से कम 24 घंटे पहले पूरी कर ली जाएं।