
NIA Disclosure on Yasin Malik (Image: ANI)
NIA Disclosure on Yasin Malik: कश्मीर को भारत से अलग करने के कथित एजेंडे और टेरर फंडिंग मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने दिल्ली हाईकोर्ट में बड़ा दावा किया है। एजेंसी के अनुसार, अलगाववादी नेता यासीन मलिक पाकिस्तान के शीर्ष नेताओं के संपर्क में था और इन संबंधों का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए करता था। NIA ने अदालत से उसकी सजा बढ़ाकर मौत की सजा करने की मांग की है।
NIA ने अपने हलफनामे में कहा कि यासीन मलिक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, सीनेटरों और अलग-अलग प्रांतों के मुख्यमंत्रियों के संपर्क में था। एजेंसी का आरोप है कि इन संपर्कों के जरिए वह जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने के लिए माहौल तैयार कर रहा था।
मामले में यासीन मलिक ने यह दलील दी थी कि अतीत में भारत के कई प्रधानमंत्रियों ने कश्मीर मुद्दे पर उससे बातचीत की थी। इस पर NIA ने कोर्ट में कहा कि ऐसे संपर्क इस केस में कोई राहत नहीं देते और न ही आरोपों की गंभीरता को कम करते हैं।
एजेंसी ने अदालत में कहा कि यह मामला ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ की कैटेगेरी में आता है, इसलिए मलिक को मौत की सजा दी जानी चाहिए। फिलहाल वह उम्रकैद की सजा काट रहा है, जिसे NIA अब बढ़ाकर फांसी में बदलने की मांग कर रही है।
NIA ने यह भी आरोप लगाया कि यासीन मलिक का संबंध 1990 के दशक में हुई हत्याओं और अपहरण की घटनाओं से रहा है, जिसमें वायुसेना के चार अधिकारियों की हत्या का मामला भी शामिल है। एजेंसी के अनुसार, उसके संबंध हाफिज सईद और सैयद सलाहुद्दीन जैसे आतंकियों से भी रहे हैं जो आरोपों को और गंभीर बनाते हैं।
एजेंसी ने कोर्ट में कहा कि यासीन मलिक भारतीय नेताओं, नौकरशाहों, विदेशी प्रतिनिधियों और मीडिया से अपने संबंधों का जिक्र कर केवल सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रहा है। NIA का कहना है कि इन बातों का मामले की वास्तविकता और आरोपों से कोई संबंध नहीं है।
हलफनामे में यह भी कहा गया कि मलिक खुद को जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) का कमांडर-इन-चीफ बता चुका है। एजेंसी का कहना है कि बड़े नामों का जिक्र करने से उसके अपराध कम नहीं हो जाते।
दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई फिलहाल टल गई है। जानकारी के मुताबिक, सॉलिसिटर जनरल की अन्य मामलों में व्यस्तता के चलते सुनवाई स्थगित की गई। अब अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी, जहां इस पर विस्तृत बहस की जाएगी।
यह मामला 2017 के टेरर फंडिंग केस से जुड़ा है जिसमें यासीन मलिक पर हवाला के जरिए फंडिंग लेने, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से संबंध रखने और जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने के आरोप हैं। 24 मई 2022 को विशेष NIA अदालत ने उसे दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद NIA ने 2023 में उसकी सजा बढ़ाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था।
Updated on:
22 Apr 2026 09:17 pm
Published on:
22 Apr 2026 09:16 pm
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