
केरल में निपाह वायरस के केस। (फोटो- The Washington Post)
भारत में फिलहाल दो वायरल इंफेक्शन आम इंसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। वे निपाह वायरस और बर्ड फ्लू हैं। जनवरी 2026 में पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के दो पुष्ट मामले सामने आए हैं।
खास बात यह है जिन लोगों को निपाह वायरस ने पकड़ा है, वह दोनों स्वास्थ्यकर्मी हैं। दोनों एक अस्पताल से जुड़े हैं। निपाह वायरस की पुष्टि होने के बाद देश भर में हड़कंप मच गया है।
इसके अलावा, बिहार के दारभंगा जिले में कई कौवों में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है। जिससे हजारों पक्षियों को जान गंवानी पड़ी है। इंसानों में भारत में अभी हाल के मामले नहीं दिखे है, लेकिन पक्षियों में फैलाव जारी है।
बता दें कि यह वायरल इंफेक्शन मुख्य रूप से पक्षियों को प्रभावित करता है। हालांकि, कुछ डॉक्टरों का कहना है कि बर्ड फ्लू इंसानों में भी फैल सकता है, जिससे सावधान रहने की आवश्यकता है। इस बीच, हम यह बताने जा रहे हैं कि निपाह वायरस और बर्ड फ्लू में कौन से वायरल इंफेक्शन इंसानों के लिए जानलेवा हैं।
निपाह वायरस एक खतरनाक जूनोटिक वायरस है। यह मुख्य रूप से जानवरों से इंसानों में फैलता है। इसका नाम मलेशिया के एक गांव निपाह से पड़ा है। जहां 1998-99 में पहला बड़ा प्रकोप हुआ था।
निपाह वायरस चमगादड़ से इंसानों में फैलता है। ध्यान रहे कि यह वायरस चमगादड़ के लार, मूत्र और मल से फैलता है। कच्ची खजूर की शराब जैसे कि ताड़ी पीने से लोग इस वायरस की चपेट में आते हैं। जिसमें चमगादड़ का मूत्र या लार किसी तरह से गिर जाता है।
इसके अलावा, जिन फलों को चमगादड़ों ने चाट लिया हो, उसे खाने से भी निपाह वायरस हो जाता है। वहीं, यह वायरस कभी कभी इंसानों से इंसानों में भी फ़ैल जाता है। संक्रमण के बाद लक्षण 4 से 14 दिन में दिखते हैं।
WHO के अनुसार, निपाह वायरस से प्रभावित लोगों के बचने के चांस काफी कम होते हैं। इसमें मृत्यु दर 40 से 75 प्रतिशत तक होती है। कुछ प्रकोपों में यह 90 प्रतिशत तक भी पहुंची है। जो लोग बचते हैं, उनमें भी लंबे समय तक न्यूरोलॉजिकल समस्याएं रह सकती हैं।
बर्ड फ्लू भी एक वायरल संक्रमण है। यह खासकर पक्षियों को प्रभावित करता है। यह वायरस जंगली पक्षियों में प्राकृतिक रूप से मौजूद रहता है और कभी-कभी पोल्ट्री (मुर्गी और बत्तख फार्म) में बड़े पैमाने पर फैल जाता है।
यह वायरस 1996-97 से पॉपुलर है। सबसे पहले चीन में इसका प्रकोप देखने को मिला था। 2021 से वैश्विक स्तर पर बहुत तेजी से फैला है।
अब यह पक्षियों, पोल्ट्री, कौवों, बिल्लियों, बाघों, तेंदुओं और अमेरिका में डेयरी गायों तक पहुंच गया है। इंसानों में फिलहाल इसका संक्रमण बहुत दुर्लभ है, लेकिन जब होता है तो गंभीर हो सकता है।
यह इंफेक्शन संक्रमित पक्षी के मल, लार, पंख या उनके संपर्क में आए सतहों से फैलता है। यह पोल्ट्री फार्म, पक्षी पकड़ने और काटने के दौरान भी आसानी से इंसानों में फैल सकता है। संक्रमण के बाद लक्षण 1-5 दिन में दिखते हैं।
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की डेटा के अनुसार, बर्ड फ्लू के मामलों में लगभग 48-50 प्रतिशत मौतें हुई हैं। लेकिन कुल इंसानी मामले बहुत कम हैं, इसलिए सामान्य आबादी के लिए जोखिम अभी कम माना जाता है।
Published on:
03 Feb 2026 06:09 pm

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